जाने-माने कवि, विचारक और पेंटर गजानन स्वामी नहीं रहे।
दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित एक सोसाइटी में उनका क़त्ल होता है। कौन कर गया एक बुज़ुर्ग का क़त्ल? क़ातिल का क्या मक़सद था? और आख़िर क्यों क़त्ल के बाद क़ातिल दीवार पर ख़ून से बड़े-बड़े अक्षरों में लिख गया—‘पिशाच’?
क्या संदेश छिपा है इसमें?
उनकी हैरतअंगेज़ हत्या की ख़बर पूरे देश में आग की तरह फैल गयी। पुलिस अभी इसी गुत्थी को सुलझाने में मशक्कत कर रही थी कि सिलसिलेवार तरीक़े से कुछ और मशहूर लोगों का क़त्ल हो जाता है।
कौन है रहस्यमयी क़ातिल?
पहले उपन्यास नैना की अपार सफलता के बाद लेखक संजीव पालीवाल लौट रहे हैं एक और रोंगटे खड़े कर देने वाला क्राइम थ्रिलर लेकर।
"एक अखबार जो छापता है वह खबर होती है - लेकिन हमेशा सच नहीं होता: अगाथा क्रिस्टी"
पिछले महीने, जब मैं रक्षाबंधन के लिए अपने गाँव जाने के लिए अपना सामान पैक कर रहा था, मैंने एक सबसे अधिक बिकने वाले अंतर्राष्ट्रीय लेखक द्वारा लिखित 450 पृष्ठों की थ्रिलर पुस्तक ली। उसी समय, मेरी आत्मा बाहर आई और मुझसे बातचीत की "यार, तुम गाँव में क्रिकेट खेलोगे और फिल्में देखोगे, एक और टी-शर्ट पैक करना बेहतर है"।
एक दिन जब गांव में बिजली नहीं थी तो मैंने किताब उठाई और 2 दिन में खत्म कर दी !! उस समय, एक विचार ने मुझे उकसाया, "क्या आपको लगता है कि हिंदी भाषा में थ्रिलर लिखने वाले भारतीय लेखक उस स्तर से मेल खा सकते हैं?"
वापस दिल्ली !! दो हफ्ते पहले, मुझे एक किताब मिली। यह संजीव पालीवाल द्वारा लिखित "पिसाच" था। मेरे शब्दों पर ध्यान दें, इस पुस्तक ने मेरे उस अनुत्तरित प्रश्न का उत्तर दिया है।
मेरा विश्वास करो, मैं कहानी से बहुत प्रभावित हूं। यह निश्चित रूप से एक ही शैली के विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय लेखकों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। इस किताब को पढ़ते हुए आप शाम और भोर में अंतर नहीं कर पाएंगे। इस किताब में ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं, जैसे पानी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन।
"अपराध आम है। तर्क दुर्लभ है: आर्थर कॉनन डॉयल"
संजीव पालीवाल हिंदी पत्रकारिता के अग्रणी पत्रकार हैं। आप इस क्षेत्र में तीस वर्षों से कार्यरत हैं और दैनिक जागरण, अमर उजाला, दूरदर्शन, और टीवी टुडे जैसे प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों और न्यूज़ चैनलों में काम कर चुके हैं। फिलहाल आप आज तक में सीनियर एग्ज़िक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। नैना आपका पहला उपन्यास था।
कहानी पर वापस,अगर आप जासूस बनने की योजना बना रहे हैं और आपका परिवार आपके फैसले का समर्थन नहीं कर रहा है तो मेरे प्यारे दोस्त, यह किताब आपके लिए है !! इसे अपने घर पर आराम से पढ़ें, और इस मर्डर मिस्ट्री को अपने इंटर्नशिप असाइनमेंट के रूप में सुलझाएं।
गजानन स्वामी की नृशंस हत्या की खबर सभी समाचार चैनलों पर बड़े अक्षरों में दिखाई दे रही थी। एक प्रसिद्ध चित्रकार होने के साथ-साथ वे एक प्रशंसित तथा प्रतिष्ठित जन कवि, पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता कवि, पत्रकार, विचारक, समाजसेवी भी थे। उनका शरीर खून से लथपथ था और गंभीर रूप से क्षत-विक्षत पाया गया था। इस से यही साबित हो रहा था की ये काम किसी ऐसे शक्स का ही हो सकता है जो स्वामी जी से बहुत नफ़रत करता हो।
उनके चेहरे पर खून लगा हुआ था, साथ ही खून उसके होठों से भी टपक रहा था और दीवार पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया था 'पिशाच'। पुलिस और मीडिया ये पता लगाने की कोशिश में जुटे हुए थे की एक बुजुर्ग की इतने बेरहम ढंग से की गई हत्या के पीछे किसका हाथ हो सकता है तभी उन्हे और कई मशहूर लोगो के उस ही ढग से एक के बाद एक मारे जाने की खबर मिलती है।
आखिर क्या राज छुपा है पिशाच के इस मुखौटे के पीछे? असल में कौन है पिशाच?
पिशाच ना ही केवल एक दिलचस्प उपन्यास एच बल्कि यह एक मनोरंजक उपन्यास का कथानक भी है। संजीव पालीवाल द्वारा लिखित पिशाच ऐसी मर्डर मिस्ट्री है जो आपको जरूर सोचने पर मजबूर कर देगी कि असली हत्यारा कौन है।
पहले हम किताब के नाम "पिशाच" की बात करें , तो वाकई ये पिशाच की कहानी है। लेकिन ये पिशाच वो टीवी वाला वैंपायर नहीं है । ये हमारे समाज और हमारे समाज में पल रहे पिशाच की कहानी है। जो हमारे विश्वास का गला घोटते हैं , जो हमारे आत्म सम्मान का खून पीते हैं। ये बताती है कि साहित्य के जाने माने कवि, और कई जाने माने हाई प्रोफाइल नाम, पतलून के कितने ढीले हैं। हवस कि आड़ में आ के जिन्हें छोटी बच्ची तक नहीं दिखती। स्त्रियों के शोषण करने वालों को सज़ा देने के लिए, और ख़ुद को न्याय दिलाने के लिए। पीड़ित को काफ़ी इंतज़ार करना पड़ता हैं। हवस के भूखे, हवसियो का हत्या की वजह भी हवस है, एक बलात्कारी को जिस तरह की मौत मिलनी चाहिए , बिल्कुल उसी तरह से मौत मिलती है, एक के बाद एक हत्या। और हत्या की वजह ही नहीं, मरने का तरीक़ा भी एक है।
साहित्य की दुनिया जहाँ सम्मान की बात आती है, वहीं बलात्कार की बात है। तमाम न्यूज़ चैनल, जो अपने टीआरपी और नंबर वन चैनल बनने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। कुछ नहीं मिला तो जनता को गुमराह करने के लिए हिंदू मुसलमान एक टॉपिक तो है ही ।
बीके हुए कानून के बारे में क्या ही कहना , जो एक बाप पे बलात्कार का आरोप लगाने में, पल भर का समय नहीं लेता हैं।
और बात हम अपनी, या अपने समाज की करे तो आँख मूंदे हुए देखना ये हमारी गलती है।
इस किताब में साहित्य, मीडिया, कानून, सियासत की चर्चा है। लेखक ने पत्रकार होने की भूमिका बख़ूबी निभाई है और हर मामले को बड़ी संजीदगी से कहा है।
हर दूसरे पन्ने पे सस्पेंस हैं, ये सिलसिला आख़री पन्ने तक रहता है, आख़री पन्ने तक जिसकी अनुपस्थिति रहती है , वही क़ातिल है, ये पढ़ के आप सत्र रह जायेंगे ।
मैं किसी किरदार या क़ातिल की बात कर के सस्पेंस बिगाड़ना नहीं चाहती। आप ये किताब ख़ुद पढ़े , उम्मीद है ये नहीं कहूँगी , मैं उम्मीद दिलाती हूँ आपको ये किताब ज़रुर पसंद आयेगी।, ,
पिछले वर्ष संजीव सर के 'नैना' के बाद आज 'पिशाच' पढ़ा, और आखिरी पन्ने तक छोड़ने का मन नहीं हुआ। नैना, जिसके कत्ल की कहानी पिछले उपन्यास में पढ़ी थी, उसने इस उपन्यास में भी आखिर सुर्खियां बटोर ही ली। इसके अलावा इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह के लौटने पर भी अत्यंत हर्ष हुआ। समर एक दिलचस्प किरदार है और एंकर वर्षा दत्त के साथ उसकी नोक-झोंक में मुझे भविष्य की इक्वेशन की उम्मीद नज़र आई। हालांकि यह एक क्राइम उपन्यास है किन्तु भीतर की आशावादी पाठक कहानी के नायक-नायिका के लिए एक सुखद समापन की उम्मीद रखती है। इसके आलावा कहानी के रोमांचक मोड़ रोंगटे खड़े करने वाले थे, और आखिरी के ट्विस्ट से सस्पेंस बढ़ गया है। अगले भाग का इन्तज़ार रहेगा।
पिशाच एक रोमांचक उपन्यास है जो पाठक को आखिरी पन्ने तक बांधे रखता है . एक ऐसा क्राईम थ्रिल्लर जो आपको सोचने को मजबुर कर देगा कौन है पिशाच, जो एक के बाद एक क़तल करता जा रहा है, क्या है उसका मकसद . जानने के लिए पढ़िये यह किताब सरल भाषा में लिखी गयी है तो आप को पढने मे ज्यादा समय भी नहीं लगेगा .कहानी भी अच्छी है और जिन लोगो को हिन्दी में पढ़ना अच्छा लगता है उन्हे यह जरूर पसंद आयेगी .
कहानी की शुरुआत काफ़ी दर्दनाक हत्या से होती है। एक महान हस्ती स्वामी गजानन की बेहद ही ख़ौफ़नाक तरीक़े से हत्या कर दिया गया और पूरे देश में एक सनसनी सी फैल गयी। पुलिस जहां हत्यारे और हत्या की वजह जाने की कोशिश में लग गयी वही मीडिया इस खबर से अपने चैनल की TRP निकलने की जद्दोजिहद में लग गयी। लेकिन यह मौत का क़ाफ़िला था जो शुरू तो हो गया और वजह की तलाश का सफ़र बेहद ही रोमांचक है।