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Pramey

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उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के ‘बालकृष्ण शर्मा नवीन’ पुरस्कार से सम्मानित भगवंत अनमोल नये विषयों पर लिखने के लिए जाने जाते हैं। ज़िंदगी 50-50 और बाली उमर के बाद उनका यह तीसरा उपन्यास साइंस फिक्शन, दर्शन और वैचारिकता का एक अद्भुत मिश्रण है। यह एक ऐसे युवा की कहानी है जिसकी परवरिश धार्मिक माहौल में हुई है और वह प्रौद्योगिकी की पढ़ाई कर रहा है। जहाँ एक तरफ तकनीकी यह बताती है कि इस ब्रह्मांण में ईश्वर है ही नहीं तो दूसरी तरफ उसके परिवार ने बचपन से यह सिखाया है कि दुनिया की हर एक वस्तु सिर्फ ईश्वर की देन है। उसका मन इस द्वंद्व में फंसकर रह जाता है। इसी द्वंद्व से निकलने की छटपटाहट है प्रमेय । पढ़ाई के दौरान सूर्यांश का दूसरे मज़हब की लड़की से प्रेम हो जाता है। धार्मिक कट्टरता के कारण इस नवयुगल को अनेक कठिनाइयों का सामना कराता है। इस बीच कुछ ऐसा घटित होता है, जिससे सूर्यांश का सोचने का तरीका ही बदल जाता है। इसी कथानक के आधार पर लेखक ने विज्ञान, आध्यात्म और धर्म के तर्कों के सहारे ब्रह्मांड और ईश्वर की परिकल्पना को समझने का प्रयास किया है।भगवंत अनमोल कानपुर में रहते हैं और इनका सम्पर्क है:contact@bhagwantanmol.combhagwantnovelwriter@gmail.com

144 pages, Paperback

Published June 30, 2021

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About the author

Bhagwant Anmol

8 books16 followers
साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार से सम्मानित लेखक भगवंत अनमोल उन चुनिन्दा लेखकों में से हैं, जिन्हें हर वर्ग के पाठको ने हाथो-हाथ लिया है. एक ओर जहाँ उन्हें आम पाठको ने खूब सराहा, वहीँ दूसरी ओर अकादमिक और साहित्यिक जगत का भी खूब प्यार मिला. नयी पीढ़ी के लेखकों में भगवंत अग्रिम पंक्ति पर नज़र आते हैं. उनकी किताब 'ज़िन्दगी 50-50' ने हिंदी साहित्य में नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं. किन्नर जीवन पर आधारित आपका उपन्यास 'ज़िन्दगी 50-50' एक ओर जहाँ दैनिक जागरण नील्सन बेस्ट सेलर लिस्ट में कई बार शामिल रहा, वहीँ उसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार' से भी अलंकृत किया गया. इस उपन्यास को कर्नाटक विश्वविद्यालय के परास्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और इस किताब पर देश भर के हज़ारो शोधार्थी शोध कर रहे हैं.
आपका अगला उपन्यास 'बाली उमर' एक ताज़ा हवा के झोंके जैसा है, इसमें बाल मन में उठ रहे वयस्क सवालो का रोचक अंदाज़ में चित्रण किया गया है.
हाल ही में आपका नया उपन्यास 'प्रमेय' हिंदी साहित्य में नया ट्रेड शुरू करने वाला उपन्यास है. यह साइंस फिक्शन, धर्म और अध्यात्म को एक ही धागे में पिरोता है. असल में यह विज्ञान और धर्म के बीच सत्ता संघर्ष दर्शाता है. इस उपन्यास के लिए आपको 'साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार 2022' से सम्मानित किया जा रहा है.

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Displaying 1 - 4 of 4 reviews
Profile Image for Praveen Kumar.
Author 38 books81 followers
July 21, 2021
एक रोचक विज्ञान-गल्प और दर्शन का कॉकटेल

फ़्लाइट के डेढ़ घंटे की यात्रा में आधे घंटे की नींद के साथ ‘प्रमेय’ किताब पूरी कर ली। यह लेखक भगवंत अनमोल की किताब है, जो उन्होंने ‘बाली उमर’ के बाद लिखी है। अब उनका नायक स्कूल से उठ कर कॉलेज पहुँच चुका है, और उस उमर में है जब मन में ये अजीबोग़रीब सवाल उठते हैं कि ‘भगवान है या नही’, ‘ब्रह्मांड किसने बनाया’।

हालाँकि सवाल उस उम्र के बाद भी ज्यों के त्यों रहते ही हैं, लेकिन आदमी रोज़मर्रा के जीवन में इतना खो जाता है कि इन प्रश्नों के लिए समय नहीं बचता। जैसे एक हास्य अभिनेता कहते हैं कि ‘मान लिया ब्रह्मांड में हम मात्र एक कण हैं, तो क्या करूँ? जॉब छोड़ दूँ?’

प्रमेय किताब का खाका स्टीरियोटाइप है। टाइम मशीन, दो धर्मों को मानने वालों के बीच प्रेम, या ब्रह्मांड के प्रश्नों पर बहुत लिखा गया है। यहाँ तक कि नायक का नाम भी एक मशहूर बाल-धारावाहिक से प्रेरित लग सकता है। मगर इसकी पहली नवीनता तो यही है कि हिंदी भाषा में इस तरह के विज्ञान-गल्प लिखने कम हो गए थे। जब यही प्लॉट उठ कर हिंदी बेल्ट आ जाता है, समसामयिक भारतीय समाज को ले आता है, तो यह अपने-आप में नयापन है।

कथा यहाँ लीक नहीं करूँगा, लेकिन कॉलेज जा रहे युवक-युवती इसे पढ़ेंगे तो रोचक लगेगा। कॉलेज के बाद वालों को भी अच्छा लगेगा, लेकिन आखिरी के कुछ पन्नों के में दार्शनिक ज्ञान का डोज़ थोड़ा ज्यादा है। मैंने उन पन्नों को ‘पता ही है’ मान कर पलट लिया, हालाँकि उन पंक्तियों से कई ‘क्वोट ऑफ द डे’ बन सकते हैं। मैं भी बाद में बनाऊँगा।

भगवंत की पिछली किताब में मैंने संवाद कम पाए थे, जो इस किताब में बहुतायत में हैं। यह लेखन शैली में गज़ब का बदलाव है, या शायद इस किताब में उसकी उपयोगिता अधिक होगी। अगर अब भी आलोचना करनी हो तो यह की जा सकती है कि संवाद अब लंबे हो गए हैं, थोड़े कतरे जा सकते हैं।

प्रमेय एक पठनीय पुस्तक है, जो पढ़ी जानी चाहिए। आनंद आएगा, प्रयोग मिलेंगे, निष्कर्ष भी मिलेंगे।
Profile Image for Navnit Nirav.
Author 5 books6 followers
August 29, 2021
अद्भुत विज्ञान गल्प कथा जो तार्किकता से ईश्वर के अस्तित्व को टटोलने की कोशिश करती है। पठनीय।

भगवंत का यह तीसरा उपन्यास है जिसे मैंने पढ़ा। विषय का अनूठापन और पठनीयता इसे संग्रहणीय बनाता है। यह उपन्यास धर्म, विज्ञान और अध्यात्म जैसे जटिल और दुरूह विषय को संबोधित करता है साथ ही उस इस के अस्तित्व को टटोलने की कोशिश करता है जो एक तरफ तो सृष्टि का रचयिता है परन्तु दूसरी ओर वैज्ञानिक तार्किकता की कसौटी पर कहते ही अस्तित्वहीन हो जाता है। प्रमेय एक साइंस फिक्शन है लेकिन इस उपन्यास की आत्मा ईश्वर के होने न होने के द्वंद में कहीं निहित है। विषय आज के संदर्भ में भी प्रासंगिक हैं और धर्म जाति के पूर्वाग्रह पर भी चोट करता है। उपन्यास की भाषा सरल और कहानी पाठक को बांधकर रखने वाली है। बधाई लेखक को।
Profile Image for Gyanesh Sahu.
Author 6 books7 followers
July 18, 2021
भगवंत भैया की किताब प्रमेय पढ़कर समाप्त किया। इसे पढ़ने में 2-3 दिन ही लगे।

कहानी साइंस फ़िक्शन पर आधारित है लेकिन ये मत सोचिये कि सिर्फ़ हॉलीवुड की मूवीज़ जैसे कहानी होगी। इसमें एक गहन चिंतन है। धर्म की बातें हैं। विज्ञान की बातें हैं। सबसे बड़ी बात कहानी के अंदर एक और कहानी लिखी गई है।

जो ब्रम्हांड को जानने में रुचि रखते हैं ये किताब उनकी जिज्ञासा बढ़ा देगी। जो धर्म के मर्म को जानना चाहते हैं ये किताब उनको भी उत्साहित करेगी।

साथ ही साथ प्रेम भी हैं प्रमेय में। लेकिन वह मूल विषय नहीं है कहानी का।

भगवंत भैया को शुभकामनायें फ़िर से। हिंदी में ऐसे प्रयोग से कुछ नया निकलकर आयेगा।
Displaying 1 - 4 of 4 reviews

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