समय के साथ मुक्ति और प्रेम की और मार्गदर्शन करने वाले सिद्धांतो का सरल विश्लेषण।
कृपालु जी महाराज की इस पुस्तक से मिली सिख के नाम ये छोटी सी कविता -
समय ही सनातन धर्म हैं,
समय ही सनातन धर्म हैं,
समय के साथ जो चले वो ही है, सनातनी।
पर क्या समय के साथ चलना इतना ही आसान है,
चार लोगो से जुड़ी तेरी छोटी पहचान है।
बंधन के इस चक्कर का तो आदि और अन्त है,
पर जिसका न आदि और अंत है,
वो समय नहीं तो और क्या हैं।
समय में डूब के निकाले गए ज्ञान के मोती ही तो समयातित है।
(Only the religion which deal in time can be timeless.)
समय ही सनातन धर्म हैं,
समय ही सनातन धर्म हैं,
समय के साथ जो चले वो ही है, सनातनी।