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जवाब देना होगा: Volume-I "Questions of Postmodern World"
हम इंसान हैं और यही प्रवित्ति हमें जानवरों से अलग करती हैं क्योंकि हम सवाल पूछ सकते हैं, हम जवाब मांग सकते हैं और जवाबोँ में भी सवाल ढूंढ़ सकने का प्रयास कर सकते हैं। हम भारत के नागरिक हैं और यह सिर्फ हमारा मौलिक अधिकार ही नहीं अपितू मौलिक कर्तव्य भी है कि हम सवाल पूछकर, जवाब मांगकर अपनी विचारधारा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और समाज सुधार की दिशा में प्रेरित करें। एक लोकतान्त्रिक गणतंत्र के संप्रभु नागरिक होने के नाते, इस संप्रभुता को बनाए रखने के लिए सवाल पूछना, जवाब मांगना और जवाबों में फिर से सवाल खड़ा करना अत्यंत आवश्यक है। इस कठिन समय में जब कोरोना वायरस नामक महामारी चारों तरफ फैली है, हमें मानवता के सबसे बहुमूल्य उपहार, जो कि सवालों को पूछना और जवाबों को मांगना है, को भूलना न
44 pages, Kindle Edition
Published June 21, 2020
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