कविताएँ जो इस किताब में संकलित है, वो मेरी भावनाएँ है, जो वर्षों से मेरे मन मे उठती थी और मैं उन्हें शाब्दिक रूप दे देता था। प्रकृति में घट रही घटनाएँ या उसकी ख़ूबसूरती को देखने का नज़रिया सबका अलग होता है, सबकी प्रतिक्रिया अलग होती है। मैंने इन्हें देख कर क्या महसूस किया मेरे अंतर में जो भावनाएँ जागृत हुई, हर कविता के माध्यम से मैने उसे उधृत करने का प्रयास किया है। इस किताब की अधिकांश कविता मोबाइल में लिखी गई है, जो ऑफिस जाने आने के समय का सदुपयोग था। मैं हमेशा से यह सोचता था कि क्या कभी कोई मेरी इन भावनाओं से खुद को जोड़ पाएगा, आज इसका जवाब आप सब हो। मैं अपनी भावनाओं को इस किताब के माध्यम से आपके पास छोड़े जाता हूँ, अगर आप इस से खुद को जोड़ पाते है तो किताब के प्रकाशन का उद्देश्य पूरा हो जाएगा।
जब भी कदम लड़खड़ाते है ,वो हाथ थाम लेते है। हर मुश्किल में मेरे बाबूजी मेरे साथ होते हैं। पुस्तक "कुल्हड़ की चाय और कुएं का पानी "नवेंदु निश्चल जी द्वारा लिखी उनकी पहली पुस्तक है , जो की एक 51 कविताओं का संग्रह है। पुस्तक @rajmangalpublishers से प्रकाशित, और मात्र 65 पन्नो में है, जो केवल 1 बैठक में पूरी की जा सकती है। किताब का नाम ही काफी है पाठको को प्रभावित करने के लिए, और इसमें लिखी छोटी छोटी कविताएं अपने में ही एक अलग एहसास कराती है। कहीं प्यार है तो कहीं इंतजार है, कहीं हसीं है तो कहीं गम है, कहीं बटवारा है तो कहीं खुला आसमान, कहीं वक्त है तो कहीं बेबसी, कहीं सुरूर है तो कहीं चाहत है, कहीं अश्क है तो कहीं सुकून है,कही अंधेरा है तो कहीं पतवार है, कहीं इजहार है तो कहीं धोखा है, कहीं शांत गांव तो कही भाग दौड़ भरी जिंदगी, कही जीवन भर का तजुर्बा है तो कहीं अहसास भर मात्र है। वैसे तो पुस्तक में लिखी हर कविता अच्छी है , लेकिन कुछ मेरी बहुत पसंदीदा है, जैसे:- ❤️बटवारा, फरिस्ता, तस्सवुर, तुम मैं हो जाओ, तेरे लिए, कैसा लगता है, जी चाहता है, दर्द, इत्यादि । अब आगे चलते है, और अपनी पसंदीदा पंक्तियों की बात करते है:- 🍁जब तक स्नेह सींचता है, मन प्रफुल्लित होता है। 🍁धुंधले तारे फिर दिख जाते है, सोए से अरमान मेरे पंख लग फिर उड़ जाते है। 🍁 मैं आग हूं और अंगारे है सीने में, नशा अलग ही है, जलते हुए जीने में। 🍁दुनिया जिसे कहते हो , मौत का बाजार है, गम के सौदागर है ये, गफलत ही यहाँ व्यापार है। 🍁 उघड़ सा गया ज़िंदगी का साया है, कढ़ाईदार पैबंद से तुमने ही तो सजाया है। 🍁तुम शाम हो जाओ, तेरे संग मैं ढल जाऊं। तुम सुबह हो जाओ, तेरे संग रौशन हो जाऊं। तुम चंदन हो जाओ, विषधर बन लिपट जाऊं। 🍁 गैरों की बस्ती में, घर अपना हो न सका। चांद होना था जिसको, वो चिराग भी बन न सका। लौट आया हूं अपनी मिट्टी में, वो शहर अपना हो न सका। 🍁ये ओस नहीं आसूं की बूंदे हैं, नहीं तोड़ सकता आसुओं से भीगे फूल तेरे लिए। 🍁 ओस की बूंदें जब कुश को संवारती है, मेरे अंदर भी एक चाहत हिलोरे मरती है। 🍁चमक खो ही जाती, घिस घिस के पत्थर से, मुरझा जाते है फूल भी, जीवन की चाक में पिस के। 🍁मत आ धरा पर मुरझा जाओगी, इंतजार होगा स्नेह का, और धोखा खा जाओगी। 🍁अधूरा होना मतलब कहानी अभी शेष हुआ, एक उम्मीद अभी बाकी है। 🍁विकास की राह बड़ी आसान है, बेमोल सबकी जान है। 🍁राह पकड़ो कोई एक मंजिल मिलेगी, वर्ना न इश्क मुकम्मल होगा ना जिंदगी मिलेगी। 🍁सुना है रात बादल बरसता रहा। मेरा वजूद एक बूंद को तरसता रहा। कुल मिलाकर पुस्तक पढ़ने योग्य है , लेखक ने अच्छा प्रयास किया है , साथ ही सरल शब्दों का चयन भी किया है, अगर आप कविताओं के सौखीन है, और सरल शब्दों में पढ़ना चाहते है, या हिंदी कविताओं की शुरुआत करने की सोच रहे है तो इस पुस्तक को जरूर से जरूर पढ़े। धन्यवाद🙏 अमीषा❤️
मेरे लिए कविता एक भाव है, शब्दों की गहराई का सार है। कविता एक अहसास है, शब्दों की अभिव्यक्ति का आधार है।।
हर कविता अपना गहरा अस्तित्व रखती है। , और शब्दों को भाव से प्रस्तुत करती है। कविता शब्दों को अलंकृत करती है । ऐसी ही एक पुस्तक है जिसमें लेखक कविताओं के माध्यम से अपने भाव प्रस्तुत कर रहे हैं। तो यह किताब है "कुल्हड़ की चाय और कुएं का पानी" जिसके लेखक हैं नवेंदु निश्चल ।
छोटी-छोटी कविताओं का संग्रह है जिसमें हर कविता अपना एक अलग एहसास कराती है। इन कविताओं में कहीं प्यार का दर्द , कहीं जीवन का एहसास , कहीं प्यार का इजहार, कहीं धोखे की खुशबू, कहीं गांव के सुनहरे पलों का राज, तो कहीं जीवन की भागदौड़ है , तो कहीं जीवन का तज़ुर्बे का अहसास पढ़ने को मिलता है।
इस पुस्तक में कवि ने तुकात्मक शैली का बखूबी प्रयोग किया है जो कविता को और अधिक रूचिकर बनाती है। साथ ही कविता में उर्दू में हिंदी के शब्दों का समावेश है। कविता लेखक के अनुभवों का भाव है। हिंदी कविताओं के साथ भोजपुरी कविता( सजनिया) का भी समावेश किया है।
हमें तो मोहब्बत के लिए , जिंदगी कम लगती है जाने लोग नफरत के लिए , वक्त कहां से लाते हैं।।
पुस्तक में मजबूरी, हरियाली ,नशा ,मुंबई लोकल, शायरी सनक अधूरा , बंटवारा आदि मेरी कुछ पसंदीदा रचनाएं हैं। लेखक ने बंटवारा कविता के माध्यम से बताया है कि "चाहे सब कुछ बढ़ जाए पर प्यार और एहसास नहीं बांटा जा सकता है यह अमूल्य संपत्ति है जो हमेशा साथ रहती है।" व मुंबई लोकल कविता के माध्यम से जिंदगी की भागदौड़ का चित्रण किया है। साथ ही और भी कविताएं हैं जो अपना भाव प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का कवर शीर्षक के अनुकूल है। जैसे शीर्षक गांव के सुनहरे पलों का एहसास कराता है वैसे ही कवर उस शीर्षक में जान डालता है।।
✍मुझे किताब का नाम है बहुत ही प्रभावकारी लगा। और इसमें लिखी कविताओं को पढ़ने के बाद अब ये मेरी मनपसंद कविताओ संग्रह में से एक बन गई है। इस तरह की कविताओ को पढ़कर मन को एक अलग तरह का सुख और एक राहत सी मिलती है।
✍नवेन्दु जी ने कुल 50 से अधिक कविताएँ लिखी है और हर कविता में लेखक ने व्यक्ति की सभी भावनाओं को बड़े सुंदर तरीके से दर्शाया है। लेखक ने व्यक्ति की प्रेम भावनाओ, उनके जीवन के उतर चड़ाव, उनकी कामकाजी जिंदगी को बहुत ही अच्छे ढंग से लिखा है। वैसे तो हर कविता अपने आप में अलग है पर मेरी कुछ व्यक्तिगत रूप से सबसे अधिक पसंदीदा कविताएँ है। जो इस प्रकार है। •सुकून •कब तक •तुम्हे कमाया नहीं •तेरे लिए •आशिकी या काम
✍लेखक ने इस कविता संग्रह को लिखने का अच्छा प्रयास किया है। शब्दो का चयन भी अच्छा ढंग से किया है। मैं चाहती हूं की सभी पाठको को एक बार जरूर इस कविता संग्रह को पढ़ना चाहिए।