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पल्टू बाबा रोड

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'पल्टू बाबू रोड' अमर कथाशिल्पी फनीश्वरनाथ रेणु का लघु उपन्यास है! यह उपन्यास पटना से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'ज्योत्स्ना' के दिसंबर, 1959 से दिसंबर, 1960 के अंकों में धारावाहिक रूप से छपा था! रेणु के निधन के बाद 1979 में पुस्तकाकार प्रकाशित हुआ! नई-नई कथाभूमियो की खोज करनेवाले रेणु 'पल्टू बाबू रोड' में एक कस्बे को अपनी कथा का आधार बनाते हैं! वे कठोर, विकृत और हासोंमुख समाज को लेखकीय प्रखरता के साथ परखते है! इस उपन्यास में रेणु अपने गाँव-इलाके को छोड़कर बैरगाछी कस्बे को कथाभूमि बनाते हैं! इस कस्बे की नियति पल्टू बाबू जैसे काईयां, धूर्त, कामुक बूढ़े के हाथ में है! उसने कस्बे के लिए ऐसी राह निर्मित की है जिस पर राजनीतिज्ञ, ठेकेदार, व्यापारी, वकील (पूरे कस्बे के लोग ही) चल रहे हैं! लगता है, कस्बावासी शतरंज के मोहरे हैं और पल्टू बाबू इनके संचालक! इस उपन्यास का लक्ष्य है उच्च वर्ग के अंतर्विरोधों, उसकी गिरावट, राजनितिक और आर्थिक संबंधों में यों-व्यापर आदि का चित्रण! निम्न वर्ग छिटपुट आया है! आदर्शवादी पत्र विडम्बना से घिरे है ! भाषा प्रव्पूर्ण और अर्थ व्यंजक है!

103 pages, Kindle Edition

Published November 1, 2021

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About the author

Phanishwar Nath 'Renu' (4 March 1921 – 11 April 1977) was one of the most successful and influential writers of modern Hindi literature in the post-Premchand era. He is the author of Maila Anchal, which after Premchand's Godaan, is regarded as the most significant Hindi novel.

हिन्दी कथा-साहित्य को सांगीतिक भाषा से समृद्ध करनेवाले फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गाँव में 4 मार्च, 1921 को हुआ। लेखन और जीवन, दोनों में दमन और शोषण के विरुद्ध आजीवन संघर्ष के प्रतिबद्ध रेणु ने राजनीति में भी सक्रिय हिस्सेदारी की। 1942 के भारतीय स्वाधीनता-संग्राम में एक प्रमुख सेनानी की हैसियत से शामिल रहे। 1950 में नेपाली जनता को राणाशाही के दमन और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए वहाँ की सशस्त्र क्रान्ति और राजनीति में सक्रिय योगदान। 1952-53 में दीर्घकालीन रोगग्रस्तता के बाद राजनीति की अपेक्षा साहित्य-सृजन की ओर अधिकाधिक झुकाव। 1954 में बहुचर्चित उपन्यास मैला आँचल का प्रकाशन। कथा-साहित्य के अतिरिक्त संस्मरण, रेखाचित्र और रिपोर्ताज़ आदि विधाओं में भी लिखा। व्यक्ति और कृतिकार, दोनों ही रूपों में अप्रतिम। जीवन की सांध्य वेला में राजनीतिक आन्दोलन से पुनः गहरा जुड़ाव। जे.पी. के साथ पुलिस दमन के शिकार हुए और जेल गए। सत्ता के दमनचक्र के विरोध में पद्मश्री लौटा दी।

मैला आँचल के अतिरिक्त आपके प्रमुख उपन्यास हैं: परती परिकथा और दीर्घतपा; ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप तथा सम्पूर्ण कहानियाँ में कहानियाँ संकलित हैं। संस्मरणात्मक पुस्तकें हैं: ऋणजल धनजल, वन तुलसी की गन्ध, श्रुत-अश्रुत पूर्व। नेपाली क्रान्ति-कथा चर्चित रिपोर्ताज है।,

भारत यायावर द्वारा सम्पादित रेणु रचनावली में फणीश्वरनाथ रेणु का सम्पूर्ण रचना-कर्म पाँच खंडों में प्रस्तुत किया गया है।

11 अप्रैल, 1977 को देहावसान।

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Profile Image for Divya Pal.
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February 1, 2024
इस मनोरंजक और प्रफुल्लित करने वाले उपन्यास में नव-स्वतंत्र भारत के राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यापारियों और आम लोगों की कमजोरियों को खूबसूरती से चित्रित किया गया है, विशेष रूप से एक छोटे से काल्पनिक कसबे (mofussil township) के निवासियों की गतिविधियों का वर्णन उल्लेखनिय है। 'रेणु' की लेखन की निराली अनूठी शैली छोटे शहरों के गरीबों की क्षेत्रीय बोली और परंपराओं का सार दर्शाती है। Homophone शब्दों का यह अभिनव प्रयोग कथा के वातावरण को सटीकता से दर्शाता है।
ब्रेसरी: brassiere
धनभाग: धन्यवाद
पाट: part
फुटगोल: football
भोलंटियर: volunteer
डिस्टीबोट: district board
हरमुनियाँ रोग: hernia
हिमापोथी दवा: homoeopathy
ठेठर: theatre
नारवास: nervous
हनिबूल: honeymoon
स्थानीय हलवाई की दूकान के बाहर यह छोटा सा अंतराल जहां ग्राहक एक खड़ूस वृद्ध और एक युवा महिला-वकील के बीच होने वाली शादी के बारे में गपशप कर रहे हैं
फत्तू खलीफा ने कचौड़ी खाते हुए स्टूडेंट से पुछा - कहिये तो बाबू, हनीमून का क्या माने होता है अंग्रेजी में?
विद्यार्थी ने कहा - हनि माने शहद, और मून माने चाँद।
- तो टोटल माने हुआ जाकर के - शहदचांद?
- शहदचांद
- क्या कहा? कुन्तला क्रिस्तान हो जाएगी?
यह राजनेताओं का व्याप्त पाखंड तथा लज्जाजनक कामुक्ता का एक उदाहरण है
यह मुरली बाबू जिसको देखते ही मैं, तुम एवं हमारे परिवार-भर के लोग श्रद्धा से, आदर से सिर झुका लेते हैं, जिसके भाषण को सुनने के लिए दूर-देहात के लोग उमड़ पड़ते हैं, जिला कांग्रेस में जिसको नए खून का नेता माना जाता है, वही मुरली बाबू चोली-अंगिआ, ब्लॉउज-ब्रेसरी के समस्या पर बीजू-दी से बात करता है। छबि के साथ अभद्रता कर सकता है। लेकिन, सारे समाज की समस्याओं को सुलझाने का सूत्र भी यही देते हैं। आश्चर्य की बात है न? तो, तुमने देख लिया कि किस तरह व्यक्तिगत रूप से, एक विकारग्रस्त व्यक्ति सामाजिक कल्याण के बातें सोच सकता है। कर सकता है ...।
गृह क्लेश की एक झलक
सभी तो देश का काम करते हो। फिर, आपस में यह लड़ाई क्यों? एक घर में वैष्णव और शाक्त रहते हैं, लड़ाई तो नहीं करते?
घंटा बोला - यदि वैष्णव की बिल्ली, शाक्त की मछली चुराकर खा जले - तब भी नहीं ?
जहाँ परती : परिकथा में लेखक का वैकल्पिक-अह्म (alter-ego) 'मीत' नामक एक कॉकर-स्पैनियल था, इस कथा में वह 'रूपन' नाम का एक पिंजरे में बंद तोता है।
एक अत्यंत रोचक व अविस्मरणीय लघु-उपन्यास …
21 reviews
October 29, 2022
राग दरबारी से पहले अगर यह किताब पढ़ेंगे तो शायद अच्छी लग सकती है। अगर राग दरबारी पढ़ चुके हैं तो फिर शायद अधूरी कथा लगेगी। एक कस्बे की कहानी है, आजादी के बाद वहां के कुछ संपन्न लोग कैसे अपने आप को 'कृत्रिम' शर्म हया संस्कार और आचार विचार से जीवन को अपने हिसाब से जी रहे हैं, और अपनी दुनिया को सम्पूर्ण मान कर चल रहे हैं। उनका जीवन उसी कस्बे तक सीमित है, और शायद आज भी उसी कस्बे में हों।
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