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Sudhir Kohli #4

निम्फोमैनियाक

हालात से मजबूर एक स्त्री की हौलनाक कहानी जो जैसी खतरनाक जिंदगी जीती रही, वैसी ही खतरनाक मौत मरी।

“एक बार संतरा छिल जाए तो एक फांक की घट-बढ़ का कोई पता नहीं लगता था।” – ऐसे ही इंकलाबी खयालात की मालिक थी मेरे से विधिवत ब्याहता मेरी धर्मपत्नी।

जब मैंने उसे रंगे हाथों एक गैरमर्द के साथ पकड़ा तो उसने अपने उस विश्वासघात की एक ही सफाई दी :
‘वो निम्फ़ोमैनियाक थी।’ – सुधीर सीरीज का यादगार उपन्यास।

निम्फ़ोमैनियाक सुधीर सीरीज के सर्वाधिक चर्चित उपन्यासों में से एक है। सुधीर के वैवाहिक जीवन का संदर्भ कई उपन्यासों में है, जो हमेशा से पाठकों के लिए जिज्ञासा का कारण रहा है। निम्फ़ोमैनियाक सुधीर के इसी वैवाहिक जीवन की कहानी है।

काफी समय अप्राप्य रहा यह उपन्यास अब नई साज सज्जा के साथ उपलब्ध है। इस संस्करण के लिए लेखक ने खास तौर पर लेखकीय भी लिखा है, जो आमतौर पर रिप्रिंट्स के साथ नहीं होती। यही नहीं, उपन्यास में काफी कुछ नया जोड़ा है, जो निश्चय ही पाठकों को पसंद आएगा।

224 pages, Paperback

First published March 1, 1982

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About the author

Surender Mohan Pathak

335 books398 followers
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.

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Community Reviews

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66 (43%)
4 stars
51 (33%)
3 stars
19 (12%)
2 stars
11 (7%)
1 star
4 (2%)
Displaying 1 - 8 of 8 reviews
Profile Image for Sameer Mehra.
237 reviews2 followers
February 1, 2022
4/5 stars

यूँ तो सुधीर डिटेक्टिव होते हुए दुसरो के cases resolve करता है लेकिन इसमें सुधीर अपनी पत्नी के लिए संघर्ष करता है ऊपर से इंस्पेक्टर यादव के क्या कहने....जय-वीरू जैसे किरदार लगे दोनों के 👍🏾👍🏾👍🏾

Overall किताब अपने थ्रील औऱ एक्शन की वजह से अच्छी बन पड़ी है लेकिन डेविड वाले सीन बिल्कुल फालतू लगे, आराम से 30-40 pages कम किये जाने चाहिए थे.
Profile Image for Rajeev Roshan.
71 reviews14 followers
February 23, 2013
विश्लेषण - "निम्फोमानियक"

वाह...
बहुत दिनों के बाद सुधीर सीरीज का उपन्यास पढ़ा है। मैं शुरू से ही सुधीर सीरीज का दीवाना रहा हूँ। एक दिल्ली का है ऊपर से सभी मिजाज दिल्ली वाले लगते हैं। कभी कभी तो ऐसा लगता है की शायद आगे जो व्यक्ति गया वो सुधीर कोहली ही है। जब कभी नेहरु प्लेस जाना होता है तो बरबस ही यूनिवर्सल इन्वेस्टीगेशन की बिल्डिंग का बोर्ड देखने के लिए मेरी नज़रें ऊपर की ओर उठ जाती है।

जब एक सुधीर के उपन्यास में ये पढ़ा था की सुधीर द्वारा अपनी पत्नी के कल के छानबीन से सम्बंधित उपन्यास है तो मैंने सोच लिया था जरूर पढूंगा। जब दुसरो के सुधीर इतना कुछ कर जाता है तो जब अपनी पर बन आएगी तो क्या क्या करेगा। लेकिन उपन्यास आसानी से ढूंढे नहीं मिला। दरअसल मुझे तो मिला ही नहीं। लेकिन जब लाइब्रेरी ज्वाइन की तो तब भी इस उपन्यास को न लिया क्यूंकि नाम ही इतना बड़ा था इसका "निम्फोमानियक" । लेकिन इस बार जब लाइब्रेरी विजिट किया तो बस ले ही लिया और २४ घंटे के अन्दर ख़तम भी कर दिया।

उपन्यास का प्रारंभ कितना शानदार है इसके बारे में मैं शब्दों में बयां कर पान मुश्किल समझता हूँ। अपनी बेवफा पत्नी के लिए सुधीर के प्रेम भरे शब्द। क्या कहूँ दोस्तों जब मंजुला सुधीर से अपने कुकृत्यों के लिए माफ़ी मांगती है तो मेरे हालात भी वैसे ही हो जाते हैं जैसे सुधीर के थे। तब मेरे समझ में नहीं आया था की क्यूँ यह माफ़ी मांगती है। लेकिन जैसे ही सुधीर अपनी कहानी को बैकग्राउंड में ले जाता है। सभी परते खुलनी शुरू हो जाती है। बस इसी बैकग्राउंड हिस्से में आपको कुछ मुस्कराहटों के पल भी नज़र आयेंगे। वहीँ सुधीर के फ्लैट के आगे २ कारों का आकर रुकना और एक कार का जायदा आवाज करना यह फैक्टर बहुत ही शानदार डाला था पाठक साहब ने। इंस्पेक्टर यादव के साथ सुधीर की टाइम फैक्टर पर बातचीत ऐसी लगी की अगर उस वक्फे में मुझे कोई डिस्टर्ब करता तो रख के सुनाता उसको।

यादव और सुधीर द्वारा फोटोग्राफर और लेखक के से की गयी बातचीत शायद एक अमर वार्तालाप कहलायेगा क्यूंकि यही से लिए गए कुछ वाक्यों को सुधीर अपनी अगली कई उपन्यासों में प्रयोग करता आया है।

कहानी में मुझे एक अनावश्यक हिस्सा वो लगा जब यादव और सुधीर द्वारा डेविड का पीछा किया जा रहा था। मुझे लगा की वो हिस्सा बेकार में ही लम्बा बढाया गया है।

कातिल द्वारा एक भी सबूत न छोड़ना बड़ा आश्चर्य की बात है। कातिल ने बैग के हैंडल पर हाथों के प्रिंट जरूर छोड़े होंगे।

सबसे खौफनाक हिस्सा इस कहानी का वो हिस्सा है जिसमे मंजुला बचपन और मृदुला के भूतकाल को दर्शाया गया है। बहुत ही घृणा, दया, करुणामई मंजर लगता है मुझे।

दोस्तों यही कहूँगा की सुधीर को समझने में इस उपन्यास ने मुझे "मील का पत्थर" साबित किया है। मैंने इस उपन्यास को बहुत ही एन्जॉय किया क्यूंकि एन्जॉय करने वाली सभी मसाले इसमें मजूद है। मसालों के साथ साथ यहाँ हमें पाठक साहब द्वारा सामाजिक सन्देश भी मिलता है।
अब अगर सामाजिक सन्देश के बारे में लिखूंगा तो सभी mystry खुल जायेंगी।

आप सभी के अनुभवी शब्दों की प्रतीक्षा रहेगी।

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विनीत
राजीव रोशन
Profile Image for Yogendra Garg.
2 reviews
November 3, 2019
nice

readble because its sudhir kohli noval and their philosophy... best of one suredra mohan phatak noval recommended
“मैं जासूसी उपन्यास नहीं लिखता” - वह नाक चढ़ा कर बोला । “तुम क्या लिखते हो ?” - मैंने उत्सुक भाव से पूछा । “मैं क्या लिखता हूं” - वह बड़े गर्व से बोला - “मेरा सब्जैक्ट औरत है । और इस सब्जैक्ट पर जितनी रिसर्च मैं कर चुका हूं, दुनिया में किसी ने नहीं की है । अपनी सारी जिंदगी की रिसर्च से मैंने यह नतीजा निकाला है कि संसार में पैंतीस तरह की औरतें होती हैं....” “इसका मतलब यह हुआ” - मैं बोला - “कि अपनी जिंदगी में अभी तक तुम सिर्फ पैंतीस औरतों से मिले हो ।” “तुम भी लेखक हो ?” - वह बोला - “क्या तुम्हारा सब्जैक्ट भी औरत है ?” “मेरा लेखन से वही रिश्ता है जो पनडुब्बी का पैराशूट से होता है ।”
Profile Image for Soul longings.
111 reviews68 followers
December 13, 2015
smp sir ke khajane ka ek aur heera , was searching for this book for years ,thanks to daily hunt finally got to read it
6 reviews1 follower
November 10, 2019
लाजवाब

आदि से अंत तक किसी हिट बॉलीवुड फिल्म से भी ज्यादा मनोरंजक,सस्पेन्स और इमोशन्स से भरी बेजोड़ कहानी जिसे आप कभी भूल नही पाएँगे।
Displaying 1 - 8 of 8 reviews