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पोखरण
1974 में परमाणु-परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' की सफलता ने भारत को परमाणु-शक्ति के तौर पर उल्लेखनीय गति प्रदान की। लेकिन पोखरण के निवासियों, विशेषकर चैतन्य पर, इसके दुष्प्रभाव की खबर मीडिया की सुर्खियाँ नहीं बनीं ।
बहुत जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि रेडियो एक्टिव फॉलआउट के इर्द-गिर्द बुने गए इस षड्यंत्र का गहरा संबंध इसकी स्थापना से जुड़ा था। इस षड्यंत्र को छिपाने में जिनका हाथ है, वे इस राज को दफनाने के लिए भरपूर और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं ।
चैतन्य इस सच्चाई को उजागर करने की राह पर चल पड़ता है। जारा का साथ पाकर उसे विश्वास हो जाता है कि वह लोगों को न्याय दिला सकता है । लेकिन जब नियति जारा को उससे दूर कर देती है, तो वह प्रतिशोेध की आग में जलने लगता है। धमकियों से डरे बिना वह एक मिशन पर निकल पड़ता है, जो उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है और एम.आई.टी. की सभाओं तक।
एक दिलचस्प मोड़ लेते हुए ' पोखरण' मुख्य रूप से बदले की असाधारण यात्रा, साहस, प्रेम और अजेय मानवीय शक्ति की कहानी है, जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाएँगे।
बहुत जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि रेडियो एक्टिव फॉलआउट के इर्द-गिर्द बुने गए इस षड्यंत्र का गहरा संबंध इसकी स्थापना से जुड़ा था। इस षड्यंत्र को छिपाने में जिनका हाथ है, वे इस राज को दफनाने के लिए भरपूर और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं ।
चैतन्य इस सच्चाई को उजागर करने की राह पर चल पड़ता है। जारा का साथ पाकर उसे विश्वास हो जाता है कि वह लोगों को न्याय दिला सकता है । लेकिन जब नियति जारा को उससे दूर कर देती है, तो वह प्रतिशोेध की आग में जलने लगता है। धमकियों से डरे बिना वह एक मिशन पर निकल पड़ता है, जो उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है और एम.आई.टी. की सभाओं तक।
एक दिलचस्प मोड़ लेते हुए ' पोखरण' मुख्य रूप से बदले की असाधारण यात्रा, साहस, प्रेम और अजेय मानवीय शक्ति की कहानी है, जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाएँगे।
224 pages, Paperback
First published July 15, 2020
About the author
Uday Singh
3 books12 followersUday is an economist and an engineer with keen interest in philosophy and a firm belief in the progressive march of humanity towards a better and brighter future. He lives in Princeton, New Jersey and works in New York. He is a Columbia University Alumnus, ex-strategy consultant with McKinsey & Co., investment banker, and writes on economy, philosophy, and fiction.
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Displaying 1 - 30 of 40 reviews
August 5, 2022
❤️📚BOOK REVIEW 📚❤️
पुस्तक - पोखरण
लेखक - उदय सिंह
प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन
पृष्ठों की संख्या -२२४
'पोखरण' भारतीय राज्य राजस्थान के जैसलमेर शहर के बाहर स्थित एक गाँव और एक नगर पालिका है। यह थार रेगिस्तान क्षेत्र में एक दूरस्थ स्थान है और भारत के पहले भूमिगत परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण स्थल के रूप में कार्य करता है।
ऑपरेशन 'स्माइलिंग बुद्धा' 18 मई 1974 को भारत के पहले सफल परमाणु बम परीक्षण का निर्दिष्ट कोड नाम था। बम को कई प्रमुख भारतीय जनरलों की देखरेख में भारतीय सेना द्वारा राजस्थान में सेना के आधार पोखरण टेस्ट रेंज पर ही विस्फोट किया था। इस परीक्षण ने हमारे देश को विश्व भर में एक नई पहचान तो दिलाई परंतु वहां रहने वाले निवासियों पर इस परीक्षण का कुछ गलत असर भी हुआ।
किताब की कहानी ऐसे ही एक किरदार चैतन्य के ऊपर लिखी गई है जिसकी जिंदगी पर भी इस परीक्षण का नकारात्मक प्रभाव हुआ। एक दिव्यांग इंसान को समाज में किस-किस तरह की मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं, चैतन्य के किरदार के माध्यम से लेखक ने इसे बखूबी बयां किया है जो दिल को छू जाता है।
अपने सपनों को किसी भी कीमत पर पूरा करने की चाहत चैतन्य को उसकी जिन्दगी में आने वाली मुश्किलों का सामना करने का हौसला देती है। सरकार द्धारा परीक्षण में हुई गलती को न मानने का रवैया और उसके जैसे कई सारे लोगों पर विकलांगता का श्राप, उनकी तकलीफे, उनके दर्द को दुनिया के सामने का प्रण चैतन्य को पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है।
अगर आप भी चैतन्य की इस यात्रा के साक्षी बनना चाहते हैं तो एक बार इस किताब को अवश्य पढ़ें। इस किताब की एक सब से बेहतरीन बात- कि ये शुरू से अंत तक बांधे रखती है। लेखक की लेखन शैली और इसके पात्रो का वर्णन बेहद ही सहज और सरल है। किताब अपने शीर्षक को पूरी तरह चरितार्थ करती है और हमें इंसानियत का संदेश भी देती है।
धन्यवाद 🙏😊
रेटिंग 🌟 - ४.५/५
पुस्तक - पोखरण
लेखक - उदय सिंह
प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन
पृष्ठों की संख्या -२२४
'पोखरण' भारतीय राज्य राजस्थान के जैसलमेर शहर के बाहर स्थित एक गाँव और एक नगर पालिका है। यह थार रेगिस्तान क्षेत्र में एक दूरस्थ स्थान है और भारत के पहले भूमिगत परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण स्थल के रूप में कार्य करता है।
ऑपरेशन 'स्माइलिंग बुद्धा' 18 मई 1974 को भारत के पहले सफल परमाणु बम परीक्षण का निर्दिष्ट कोड नाम था। बम को कई प्रमुख भारतीय जनरलों की देखरेख में भारतीय सेना द्वारा राजस्थान में सेना के आधार पोखरण टेस्ट रेंज पर ही विस्फोट किया था। इस परीक्षण ने हमारे देश को विश्व भर में एक नई पहचान तो दिलाई परंतु वहां रहने वाले निवासियों पर इस परीक्षण का कुछ गलत असर भी हुआ।
किताब की कहानी ऐसे ही एक किरदार चैतन्य के ऊपर लिखी गई है जिसकी जिंदगी पर भी इस परीक्षण का नकारात्मक प्रभाव हुआ। एक दिव्यांग इंसान को समाज में किस-किस तरह की मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं, चैतन्य के किरदार के माध्यम से लेखक ने इसे बखूबी बयां किया है जो दिल को छू जाता है।
अपने सपनों को किसी भी कीमत पर पूरा करने की चाहत चैतन्य को उसकी जिन्दगी में आने वाली मुश्किलों का सामना करने का हौसला देती है। सरकार द्धारा परीक्षण में हुई गलती को न मानने का रवैया और उसके जैसे कई सारे लोगों पर विकलांगता का श्राप, उनकी तकलीफे, उनके दर्द को दुनिया के सामने का प्रण चैतन्य को पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है।
अगर आप भी चैतन्य की इस यात्रा के साक्षी बनना चाहते हैं तो एक बार इस किताब को अवश्य पढ़ें। इस किताब की एक सब से बेहतरीन बात- कि ये शुरू से अंत तक बांधे रखती है। लेखक की लेखन शैली और इसके पात्रो का वर्णन बेहद ही सहज और सरल है। किताब अपने शीर्षक को पूरी तरह चरितार्थ करती है और हमें इंसानियत का संदेश भी देती है।
धन्यवाद 🙏😊
रेटिंग 🌟 - ४.५/५
August 6, 2022
पुस्तक:पोखरण
लेखक:उदय सिंह
....
'पोखरण' ये नाम सुनते ही मेरे दिमाग में जॉन अब्राहम कि फिल्म आती है।क्या ये सच नहीं लगता?हमें कहानियां फिल्मों के द्वारा ज़्यादा अच्छे से याद रहती है।जब मैंने ये किताब का नाम पहली बार सुनाते ही ना जाने क्यों मुझे काफी रोमांचक लगा।
कहानी पर जाने से पहले में बता देना चाहता हूँ ये किताब इंगलिश तथा हिंदी में लिखी गई है।मैंने हिंदी भाषा इसलिए कहूं क्योंकि बहुत दिनों से मैंने हिंदी किताबें पढ़ी नहीं थी और ये किताब मुझे ज़्यादा हिंदी भाषा में पढ़ने का मन हुआ।
ये कहानी में कहूंगा कि आधी सच्ची लगी तथा आधी काल्पनिक।ये काल्पनिक और सचाई का एक अच्छा अच्छा मिश्रण था।
कहानी चैतन्या नामक लड़के से शुरू होती है।एक अच्छा और तेज़ दिमाग वाला बालक जिसकी सिर्फ एक कमजोरी है उसका डिसएबल होना।
शुरवात में कहानी पढ़ते वक़्त काफी धीमी सी लगी पर जैसे हि पात्रों का उल्लेख होगया,जो ज्ञात कहानी ने पकड़ी वो पढ़ने को मज़ा आगया।
कहानी काफी दिलचस्प और पूर्ण रित से रोमांचक है।लेखक ने काफी बेहतरीन तरीके से कहानी को लिखा है।
मुझे बस एक शिकायत है कि हिंदी भाषा कि पुस्तक का मुखपृष्ठ काफी साधा सा है।वो अगर और थोड़ा भरा सा होता,तो और अच्छा लगता।
लेखक:उदय सिंह
....
'पोखरण' ये नाम सुनते ही मेरे दिमाग में जॉन अब्राहम कि फिल्म आती है।क्या ये सच नहीं लगता?हमें कहानियां फिल्मों के द्वारा ज़्यादा अच्छे से याद रहती है।जब मैंने ये किताब का नाम पहली बार सुनाते ही ना जाने क्यों मुझे काफी रोमांचक लगा।
कहानी पर जाने से पहले में बता देना चाहता हूँ ये किताब इंगलिश तथा हिंदी में लिखी गई है।मैंने हिंदी भाषा इसलिए कहूं क्योंकि बहुत दिनों से मैंने हिंदी किताबें पढ़ी नहीं थी और ये किताब मुझे ज़्यादा हिंदी भाषा में पढ़ने का मन हुआ।
ये कहानी में कहूंगा कि आधी सच्ची लगी तथा आधी काल्पनिक।ये काल्पनिक और सचाई का एक अच्छा अच्छा मिश्रण था।
कहानी चैतन्या नामक लड़के से शुरू होती है।एक अच्छा और तेज़ दिमाग वाला बालक जिसकी सिर्फ एक कमजोरी है उसका डिसएबल होना।
शुरवात में कहानी पढ़ते वक़्त काफी धीमी सी लगी पर जैसे हि पात्रों का उल्लेख होगया,जो ज्ञात कहानी ने पकड़ी वो पढ़ने को मज़ा आगया।
कहानी काफी दिलचस्प और पूर्ण रित से रोमांचक है।लेखक ने काफी बेहतरीन तरीके से कहानी को लिखा है।
मुझे बस एक शिकायत है कि हिंदी भाषा कि पुस्तक का मुखपृष्ठ काफी साधा सा है।वो अगर और थोड़ा भरा सा होता,तो और अच्छा लगता।
July 24, 2022
शीर्षक - पोखरण - एक उपन्यास
लेखक - उदय सिंह
प्रकाशक - सृष्टि प्रकाशक
शैली - कल्पना
पृष्ठ - 194
प्रारूप - पेपरबैक
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पोखरण की कहानी 1974 में किए गए 'स्माइलिंग बुद्धा' परमाणु परीक्षण की सफलता के इर्द-गिर्द घूमती है और यह विकिरण के पतन के कारण प्रभाव के बाद की कहानी है। यह विकिरण पतन मीडिया और सरकार द्वारा छिपाया गया था. इसके कई दुष्प्रभाव थे और नए जन्म अक्षम थे। पोखरन के लोगों का जीवन बहुत प्रभावित हुआ. और अब यह नायक चैतन्य की कहानी है जो पैरों की विकलांगता के साथ पैदा हुआ था. लेकिन उसके पास एक उपहारित आईक्यू है।
चैतन्य की यात्रा को जानने के लिए पुस्तक पढ़ें कि कैसे उसने अपनी पत्नी ज़ारा की मदद से इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई को उजागर किया।
पुस्तक का आवरण बेहतर हो सकता था और शीर्षक पूरी तरह से उपयुक्त है।
कहानी का कथानक रोमांचकारी, यथार्थवादी, प्रेरणादायक और आंख खोलने वाला है। यह बहुत सारे मोड़ और मोड़ के साथ वास्तविकता और कल्पना का एक आदर्श मिश्रण है। लेखक ने इस परमाणु परीक्षण के पीछे की सारी सच्चाई को आश्चर्यजनक रूप से वर्णित किया है। सभी भावनाओं को लेखक द्वारा अच्छी तरह से चित्रित किया गया है जैसे प्यार, मानवता, साहस, बदला आदि।
प्रयुक्त भाषा सरल और स्पष्ट है।
लेखक द्वारा वर्ण अच्छी तरह से विकसित और वर्णित हैं किए गए है। प्रत्येक चरित्र को समान महत्व दिया गया है।
कहानी अतीत और वर्तमान के बीच घूमती है लेकिन लेखक ने इसे पूरी तरह से प्रबंधित किया है।
अपने शोध कार्य और यज़ीदी समुदाय, लिंग और सांस्कृतिक असमानता, मीडिया की भूमिका जैसे संवेदनशील मुद्दों पर लिखने के लिए उनकी प्रशन्सा करती हूँ।सफल परमाणु परीक्षण और इतने सारे के कारण त्रासदी होती है लिखने के लिए शुक्रिया।
कहानी का अंत उल्लेखनीय है।
कुल मिलाकर, एक बेहद रोममंचक उपन्यास
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रेटिंग - 4.6 / 5
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मैं इस पुस्तक को सभी को सुझाती हूं।
लेखक - उदय सिंह
प्रकाशक - सृष्टि प्रकाशक
शैली - कल्पना
पृष्ठ - 194
प्रारूप - पेपरबैक
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पोखरण की कहानी 1974 में किए गए 'स्माइलिंग बुद्धा' परमाणु परीक्षण की सफलता के इर्द-गिर्द घूमती है और यह विकिरण के पतन के कारण प्रभाव के बाद की कहानी है। यह विकिरण पतन मीडिया और सरकार द्वारा छिपाया गया था. इसके कई दुष्प्रभाव थे और नए जन्म अक्षम थे। पोखरन के लोगों का जीवन बहुत प्रभावित हुआ. और अब यह नायक चैतन्य की कहानी है जो पैरों की विकलांगता के साथ पैदा हुआ था. लेकिन उसके पास एक उपहारित आईक्यू है।
चैतन्य की यात्रा को जानने के लिए पुस्तक पढ़ें कि कैसे उसने अपनी पत्नी ज़ारा की मदद से इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई को उजागर किया।
पुस्तक का आवरण बेहतर हो सकता था और शीर्षक पूरी तरह से उपयुक्त है।
कहानी का कथानक रोमांचकारी, यथार्थवादी, प्रेरणादायक और आंख खोलने वाला है। यह बहुत सारे मोड़ और मोड़ के साथ वास्तविकता और कल्पना का एक आदर्श मिश्रण है। लेखक ने इस परमाणु परीक्षण के पीछे की सारी सच्चाई को आश्चर्यजनक रूप से वर्णित किया है। सभी भावनाओं को लेखक द्वारा अच्छी तरह से चित्रित किया गया है जैसे प्यार, मानवता, साहस, बदला आदि।
प्रयुक्त भाषा सरल और स्पष्ट है।
लेखक द्वारा वर्ण अच्छी तरह से विकसित और वर्णित हैं किए गए है। प्रत्येक चरित्र को समान महत्व दिया गया है।
कहानी अतीत और वर्तमान के बीच घूमती है लेकिन लेखक ने इसे पूरी तरह से प्रबंधित किया है।
अपने शोध कार्य और यज़ीदी समुदाय, लिंग और सांस्कृतिक असमानता, मीडिया की भूमिका जैसे संवेदनशील मुद्दों पर लिखने के लिए उनकी प्रशन्सा करती हूँ।सफल परमाणु परीक्षण और इतने सारे के कारण त्रासदी होती है लिखने के लिए शुक्रिया।
कहानी का अंत उल्लेखनीय है।
कुल मिलाकर, एक बेहद रोममंचक उपन्यास
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रेटिंग - 4.6 / 5
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मैं इस पुस्तक को सभी को सुझाती हूं।
September 1, 2022
किताब : पोखरण
लेखक : उदय सिंह
रेटिंग : 4/5🌟
🌺🌺
'उदय सिंह द्वारा 'पोखरण - ए नॉवेल' वास्तविक जीवन की घटनाओं पर आधारित एक काल्पनिक पाठ है। कहानी दो समयसीमाओं में सेट होती है - 1974 पोखरण राजस्थान जहां भारत का पहला परमाणु परीक्षण जिसका नाम 'स्माइलिंग बुद्धा' था और इसने वहां के लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित किया और वर्तमान दिन जहां परमाणु परीक्षण चैतन्य के पतन का एक उत्तरजीवी जिसका जीवन दुखों और संघर्षों से भरा था क्योंकि उसने अपनी माँ को उसे और उसके पिता को जन्म देने के बाद खो दिया था । अपनी अक्षमताओं के कारण उनकी उपेक्षा की गई लेकिन उनका दिमाग तेज था जिसने उन्हें यूएसए में एमआईटी की सीटों तक पहुंचा दिया। उन्होंने अपने जीवन का प्यार भी खो दिया लेकिन उन्होंने परमाणु परीक्षण के पतन के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के अपने सपनों को पूरा करने का फैसला किया।
क्या वह इसमें सफल हो पा रहा था? जानने के लिए आपको किताब पढ़नी होगी।
लेखक ने कहानी को वास्तव में अच्छी तरह से सुनाया है और उसके द्वारा किया गया शोध कार्य अविश्वसनीय है। मैं एमआईटी में किए गए अध्ययनों की अंतर्दृष्टि को कम करने के लिए उनकी सराहना करता हूं। उन्होंने मानव तस्करी और भ्रष्टाचार जैसे समाज के अंधेरे पक्ष पर भी प्रकाश डाला। पुस्तक में दी गई शब्दावली पाठक के अनुकूल है। लेखक की लेखन शैली सुचारु है। उपयोग की जाने वाली भाषा सरल और समझने में आसान है। लेखक द्वारा वर्ण अच्छी तरह से विकसित और वर्णित हैं।मुझे चैतन्य का चरित्र बहुत पसंद आया। पुस्तक का कवर और शीर्षक पूरी तरह से सामग्री के लिए उपयुक्त है। पुस्तक का प्रवाह अच्छी तरह से चित्रित है। मैं इस पुस्तक को सभी को सुझाती हूं।
संक्षेप में, एक आंख खोलने वाला कथानक।
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लेखक : उदय सिंह
रेटिंग : 4/5🌟
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'उदय सिंह द्वारा 'पोखरण - ए नॉवेल' वास्तविक जीवन की घटनाओं पर आधारित एक काल्पनिक पाठ है। कहानी दो समयसीमाओं में सेट होती है - 1974 पोखरण राजस्थान जहां भारत का पहला परमाणु परीक्षण जिसका नाम 'स्माइलिंग बुद्धा' था और इसने वहां के लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित किया और वर्तमान दिन जहां परमाणु परीक्षण चैतन्य के पतन का एक उत्तरजीवी जिसका जीवन दुखों और संघर्षों से भरा था क्योंकि उसने अपनी माँ को उसे और उसके पिता को जन्म देने के बाद खो दिया था । अपनी अक्षमताओं के कारण उनकी उपेक्षा की गई लेकिन उनका दिमाग तेज था जिसने उन्हें यूएसए में एमआईटी की सीटों तक पहुंचा दिया। उन्होंने अपने जीवन का प्यार भी खो दिया लेकिन उन्होंने परमाणु परीक्षण के पतन के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के अपने सपनों को पूरा करने का फैसला किया।
क्या वह इसमें सफल हो पा रहा था? जानने के लिए आपको किताब पढ़नी होगी।
लेखक ने कहानी को वास्तव में अच्छी तरह से सुनाया है और उसके द्वारा किया गया शोध कार्य अविश्वसनीय है। मैं एमआईटी में किए गए अध्ययनों की अंतर्दृष्टि को कम करने के लिए उनकी सराहना करता हूं। उन्होंने मानव तस्करी और भ्रष्टाचार जैसे समाज के अंधेरे पक्ष पर भी प्रकाश डाला। पुस्तक में दी गई शब्दावली पाठक के अनुकूल है। लेखक की लेखन शैली सुचारु है। उपयोग की जाने वाली भाषा सरल और समझने में आसान है। लेखक द्वारा वर्ण अच्छी तरह से विकसित और वर्णित हैं।मुझे चैतन्य का चरित्र बहुत पसंद आया। पुस्तक का कवर और शीर्षक पूरी तरह से सामग्री के लिए उपयुक्त है। पुस्तक का प्रवाह अच्छी तरह से चित्रित है। मैं इस पुस्तक को सभी को सुझाती हूं।
संक्षेप में, एक आंख खोलने वाला कथानक।
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March 11, 2023
उदय सिंह की पोखराम एक सुंदर कहानी थी जिसे लेखक ने खूबसूरती से लिखा है। लेखक द्वारा लिखा गया अच्छा है। मुझे इसे पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। लेखक द्वारा पुस्तक कवर पेज को बहुत ही शानदार ढंग से सजाया गया है। कहानी चैतन्य के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसका जन्म हुआ है। परमाणु परीक्षण किए जाने के एक साल बाद, विकिरण के कारण विकलांग और मातृहीन हो गए। कठोर बचपन और निरंतर बदमाशी के बावजूद चैतन्य एक बेहतर पोखरण और बेहतर शासन के लिए प्रयास करता है। परमाणु परीक्षण से होने वाले नुकसान के बारे में सच्चाई को उजागर करने की अपनी इच्छा के करीब, वह एमआईटी में नामांकन करता है। अपनी प्रेम इच्छाओं, सबसे अच्छे दोस्त और अपने पिता के खो जाने के साथ, चैतन्य एक ऐसे बिंदु पर पहुंच जाता है, जहां वह अपने राज्य की बेहतरी के बदले काले और सफेद के बीच अंतर करना बंद कर देता है।
एक "विरासत" के मूल्यों के लिए कोई स्थान नहीं होगा क्योंकि यह समान अवसर को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों को अपनी विरासत अगली पीढ़ी को नहीं देने का प्रचार करता है। जैसा कि हम जानते हैं, भारत विविध संस्कृतियों और परंपराओं और मूल्यों का देश है, एक पैराक्रेटिक समाज होने से समाज को बहुत नुकसान होगाएक "विरासत" के मूल्यों के लिए कोई स्थान नहीं होगा क्योंकि यह समान अवसर को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों को अपनी विरासत अगली पीढ़ी को नहीं देने का प्रचार करता है। जैसा कि हम जानते हैं कि भारत विविधताओं का देश है
संस्कृतियों और परंपराओं और मूल्यों, एक पैराक्रेटिक समाज होने से पीढ़ियों और पीढ़ियों से पूरी तरह से स्थापित विरासत के मूल्यों को बहुत नुकसान होगा। मुझे इस पर लेखक के विचार जानना अच्छा लगेगा और अगर कोई समाधान है, तो यह मानवता के लिए सर्वोत्तम संभव आदर्श स्थिति हो सकती है। मुझे किताब सबसे ज्यादा पसंद है।
शुक्रिया...
एक "विरासत" के मूल्यों के लिए कोई स्थान नहीं होगा क्योंकि यह समान अवसर को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों को अपनी विरासत अगली पीढ़ी को नहीं देने का प्रचार करता है। जैसा कि हम जानते हैं, भारत विविध संस्कृतियों और परंपराओं और मूल्यों का देश है, एक पैराक्रेटिक समाज होने से समाज को बहुत नुकसान होगाएक "विरासत" के मूल्यों के लिए कोई स्थान नहीं होगा क्योंकि यह समान अवसर को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों को अपनी विरासत अगली पीढ़ी को नहीं देने का प्रचार करता है। जैसा कि हम जानते हैं कि भारत विविधताओं का देश है
संस्कृतियों और परंपराओं और मूल्यों, एक पैराक्रेटिक समाज होने से पीढ़ियों और पीढ़ियों से पूरी तरह से स्थापित विरासत के मूल्यों को बहुत नुकसान होगा। मुझे इस पर लेखक के विचार जानना अच्छा लगेगा और अगर कोई समाधान है, तो यह मानवता के लिए सर्वोत्तम संभव आदर्श स्थिति हो सकती है। मुझे किताब सबसे ज्यादा पसंद है।
शुक्रिया...
March 13, 2023
पुस्तक ~ पोखरण (हिंदी संस्करण)
लेखक ~ उदय सिंह
यह एक थ्रिलर फिक्शन बुक है जो नापाक गतिविधियों से भरी हुई है और एक ऐसी दुनिया है जहां कुछ भी ऐसा नहीं है जैसा बाहर से दिखता है। यह उपन्यास भारत के सबसे उदात्त मिशन "ग्रिनिंग बुद्धा" पर आधारित है जब भारत ने प्रभावी ढंग से अपने सबसे यादगार परमाणु बम का परीक्षण किया और ग्रह पर 6वें परमाणु शक्ति में बदल गया। जैसा कि हम जानते हैं, हर सिक्के के अलग-अलग पहलू होते हैं, इस घटना ने भी पोखरण में कई लोगों के जीवन को प्रभावित किया, कई विकलांग बच्चों का जन्म हुआ, और हमारे महापुरूष चैतन्य उनमें से एक हैं।
कहानी मुख्य व्यक्ति चैतन्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अन्यथा चैतु के नाम से जाना जाता है, जो वास्तव में विकलांग व्यक्ति है। उनका आश्चर्यजनक शरीर एक परमाणु परीक्षण का प्रभाव था। चैतन्य एक उत्साही नौजवान थे, वे अपने जीवन में बौद्धिकता के स्तर पर पहुंचे और बहुत पैसा कमाया। उनके पिता इस मिशन के पीछे की वास्तविकता को उजागर करने की योजना बनाते हैं, लेकिन वह मारा गया था, मैं लेखक द्वारा उस व्यक्ति को मारने के तरीके के बिना कर सकता था जब पाठक उसके लिए एड़ी पर गिर जाता है।
कहानी का कथानक रोमांचक, व्यावहारिक, मार्मिक और ज्ञानवर्धक है। यह सड़क में ढेर सारे रोमांचक मोड़ों के साथ वास्तविक दुनिया और कल्पना का एक आदर्श मिश्रण है। रचनाकार ने इस परमाणु परीक्षण के पीछे की सारी वास्तविकता को अविश्वसनीय रूप से चित्रित किया है। प्रेम, मानव जाति, निर्भीकता, प्रतिशोध, इत्यादि जैसी सभी भावनाओं का रचनाकार द्वारा बहुत अधिक प्रतिनिधित्व किया जाता है। पुस्तक की भाषा स्पष्ट है। किताब का कवर लाजवाब है। पुस्तक का शीर्षक अच्छा चुना गया है।
अत्यधिक अनुशंसित 💫
लेखक ~ उदय सिंह
यह एक थ्रिलर फिक्शन बुक है जो नापाक गतिविधियों से भरी हुई है और एक ऐसी दुनिया है जहां कुछ भी ऐसा नहीं है जैसा बाहर से दिखता है। यह उपन्यास भारत के सबसे उदात्त मिशन "ग्रिनिंग बुद्धा" पर आधारित है जब भारत ने प्रभावी ढंग से अपने सबसे यादगार परमाणु बम का परीक्षण किया और ग्रह पर 6वें परमाणु शक्ति में बदल गया। जैसा कि हम जानते हैं, हर सिक्के के अलग-अलग पहलू होते हैं, इस घटना ने भी पोखरण में कई लोगों के जीवन को प्रभावित किया, कई विकलांग बच्चों का जन्म हुआ, और हमारे महापुरूष चैतन्य उनमें से एक हैं।
कहानी मुख्य व्यक्ति चैतन्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अन्यथा चैतु के नाम से जाना जाता है, जो वास्तव में विकलांग व्यक्ति है। उनका आश्चर्यजनक शरीर एक परमाणु परीक्षण का प्रभाव था। चैतन्य एक उत्साही नौजवान थे, वे अपने जीवन में बौद्धिकता के स्तर पर पहुंचे और बहुत पैसा कमाया। उनके पिता इस मिशन के पीछे की वास्तविकता को उजागर करने की योजना बनाते हैं, लेकिन वह मारा गया था, मैं लेखक द्वारा उस व्यक्ति को मारने के तरीके के बिना कर सकता था जब पाठक उसके लिए एड़ी पर गिर जाता है।
कहानी का कथानक रोमांचक, व्यावहारिक, मार्मिक और ज्ञानवर्धक है। यह सड़क में ढेर सारे रोमांचक मोड़ों के साथ वास्तविक दुनिया और कल्पना का एक आदर्श मिश्रण है। रचनाकार ने इस परमाणु परीक्षण के पीछे की सारी वास्तविकता को अविश्वसनीय रूप से चित्रित किया है। प्रेम, मानव जाति, निर्भीकता, प्रतिशोध, इत्यादि जैसी सभी भावनाओं का रचनाकार द्वारा बहुत अधिक प्रतिनिधित्व किया जाता है। पुस्तक की भाषा स्पष्ट है। किताब का कवर लाजवाब है। पुस्तक का शीर्षक अच्छा चुना गया है।
अत्यधिक अनुशंसित 💫
July 25, 2022
पोखरण उदय कुमार द्वारा दृढ़ता से लिखा गया स्पन्दनशील थ्रिलर फिक्शन है, जो नापाक गतिविधियों और एक ऐसी दुनिया से भरा हुआ है, जहाँ कुछ भी ऐसा नहीं है जैसा बहार से लगता है ।
ये उपन्यास भारत के सबसे गौरवपूर्ण अभियानों मे से एक "स्माइलिंग बुद्धा" पर आधारित है, जब भारत अपने पहले परमाणु बम का सफलतापूर्वक परीक्षरण करने के बाद दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बन गया। जैसा की हम जानते हैं, हर सिक्के के दो पहलु होते हैं, इस घटना ने पोखरण में कई लोगों के जीवन को भी प्रभावित किया, कई विकलांग बच्चे पैदा हुए, और हमारे नायक चैतन्य उनमे से एक है ।
एक बौद्धिक, शिक्षित घर के माहौल में पले-बढ़े चैतन्य एक उज्ज्वल, बुद्धिमान, अच्छे दिल वाला लड़का है। हालाँकि, चीजें उसके लिए अच्छी नहीं होतीं, क्योंकि उसने एक राजनीतिक साजिश के तहत अपने पिता को खो दिया। और यहीं से शुरू हुई झूठ और षडयंत्रों के जाल को खोलते हुए चैतन्य की रोमांचक और जागृत यात्रा।
उदय कुमार ने चतुराई से पात्रों को गढ़ा हैं। चैतन्य पूरे कथा में कई तरह से विकसित होता है, और मुझे आश्चर्य है कि उदय कैसे संघर्षपूर्ण वातावरण, मजबूत नायक और विविध कथानक सेटिंग के बीच घनिष्ठता के साथ एक शक्तिशाली कहानी बनाई है।
यह कहानी उत्तर चाहने वाले पात्रों, सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य और पोखरण के लोगों के जीवन को परेशान करने वाले अंधेरे के बारे में है। इमोशनल, इंटेंस सीन्स, एक्शन और ट्विस्ट के साथ लेखन चतुर और संतुलित है।
मैं कहूँगी कि यह पुस्तक अब तक पढ़ी गई अच्छी पुस्तकों में से एक है; भविष्य में लेखक के और काम को पढ़ने के लिए उत्सुक; मैं सभी पाठकों के लिए इस पुस्तक की अत्यधिक अनुशंसा करती हूं।
ये उपन्यास भारत के सबसे गौरवपूर्ण अभियानों मे से एक "स्माइलिंग बुद्धा" पर आधारित है, जब भारत अपने पहले परमाणु बम का सफलतापूर्वक परीक्षरण करने के बाद दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बन गया। जैसा की हम जानते हैं, हर सिक्के के दो पहलु होते हैं, इस घटना ने पोखरण में कई लोगों के जीवन को भी प्रभावित किया, कई विकलांग बच्चे पैदा हुए, और हमारे नायक चैतन्य उनमे से एक है ।
एक बौद्धिक, शिक्षित घर के माहौल में पले-बढ़े चैतन्य एक उज्ज्वल, बुद्धिमान, अच्छे दिल वाला लड़का है। हालाँकि, चीजें उसके लिए अच्छी नहीं होतीं, क्योंकि उसने एक राजनीतिक साजिश के तहत अपने पिता को खो दिया। और यहीं से शुरू हुई झूठ और षडयंत्रों के जाल को खोलते हुए चैतन्य की रोमांचक और जागृत यात्रा।
उदय कुमार ने चतुराई से पात्रों को गढ़ा हैं। चैतन्य पूरे कथा में कई तरह से विकसित होता है, और मुझे आश्चर्य है कि उदय कैसे संघर्षपूर्ण वातावरण, मजबूत नायक और विविध कथानक सेटिंग के बीच घनिष्ठता के साथ एक शक्तिशाली कहानी बनाई है।
यह कहानी उत्तर चाहने वाले पात्रों, सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य और पोखरण के लोगों के जीवन को परेशान करने वाले अंधेरे के बारे में है। इमोशनल, इंटेंस सीन्स, एक्शन और ट्विस्ट के साथ लेखन चतुर और संतुलित है।
मैं कहूँगी कि यह पुस्तक अब तक पढ़ी गई अच्छी पुस्तकों में से एक है; भविष्य में लेखक के और काम को पढ़ने के लिए उत्सुक; मैं सभी पाठकों के लिए इस पुस्तक की अत्यधिक अनुशंसा करती हूं।
March 13, 2023
पोखरण उपन्यास लेखक उदय सिंह द्वारा लिखा गया है। पुस्तक सरल और सुबोध हंसी में लिखी गई है। पुस्तक का कवर इतना सुंदर है कि यह मुझे पूरी तरह से पुस्तक को पढ़ने के लिए मजबूर करता है। पुस्तक लेखक द्वारा अच्छी साजिश है। लेखक की मजबूत भावना के साथ। पोखरण में परमाणु परीक्षण के वर्णन के साथ, इसमें शामिल सभी पात्रों का परिचय देते हुए, यह पुस्तक अपेक्षित रूप से शुरू हुई, और जल्द ही यह मुख्य पात्र, चैतन्य, एक विकलांग व्यक्ति की एक काल्पनिक कहानी में बदल गई। इन दोनों घटनाओं के बीच के संबंध को लेखक ने इतनी सूक्ष्मता से वर्णित किया है कि कभी भी कुछ भी थोपा हुआ नहीं लगता। जबकि पाठक चैतन्य की स्थिति के प्रति सहानुभूति रखता है, उसके पिता का चरित्र उसे इतना दृढ़ इच्छाशक्ति देता है कि जीवन में कुछ भी उसे अपने लक्ष्यों से नहीं रोकता है, जिसके बारे में पढ़ना एक इलाज था! एक और अत्यंत महत्वपूर्ण बात जो यह पुस्तक प्रदान करती है वह है एक पैराक्रेटिक समाज के बारे में सामाजिक संदेश।
एक और बात जो मुझे पढ़ने के दौरान परेशान करती थी, वह थी संपादन की त्रुटियां, कई जगहों पर, शब्दों को ठीक से नहीं रखा गया था, और एक या दो पंक्तियों को दोहराया गया था। जे में देखने के लिए लेखक की उम्मीदएक और अत्यंत महत्वपूर्ण बात जो यह पुस्तक प्रदान करती है वह है एक पैराक्रेटिक समाज के बारे में सामाजिक संदेश। एक और बात जो मुझे पढ़ने के दौरान परेशान करती थी, वह थी संपादन की त्रुटियां, कई जगहों पर, शब्दों को ठीक से नहीं रखा गया था, और एक या दो पंक्तियों को दोहराया गया था। उम्मीद है कि लेखक इस पर गौर करेगा और अगले प्रिंट में इसे सुधारेगा क्योंकि पुस्तक का संपादन पाठकों के लिए बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। मुझे किताब सबसे ज्यादा पसंद है।
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July 10, 2022
I still remember जब इस किताब की डिलीवरी हुई थी घर पे, मेरे जीजू ने पूछा था क्या यह मूवी पोखरान वाली किताब हैं?
मैंने मूवी तो नही देखी थी लेकिन जीजू की बात सुनकर मुझे इस किताब में और ज़्यादा दिलचस्पी आ गयी जिसके चलते मैंने इस किताब को उसी दिन पढ़ डाला।
कवर: इस किताब की कवर फ़ोटो काफी दिलचस्प है, इसको देखके समझ आता है के काफी well-planned किताब है। कॉलोर कॉम्बिनेशन काफी खूबसूरत है।
कहानी: यह कहानी "स्माइलिंग बुद्धा" के परमाणु परीक्षण के ऊपर है। पहले ही बता दु मुझे यह किताब पढ़कर इस बारे मे पता चला तब मैंने इसपे रिसर्च किया। इस किताब की कहानी का मैन किरदार चैतन्य है, वह बचपन से ही काफी होशियार था। उसने और ज़ारा (उसकी बीवी) ने मिलके मन बना लिया था के वह दोनों मिलके इस मिशन के पीछे की सच्चाई को लोगों के सामने लेके आएंगे लेकिन ज़ारा को मार दिया जाता है, जिससे चैतन्य बदले की आग में जलने लगता है, और अब वह अकेले निकल पढ़ता है। उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक ले जाती है उसका मिशन। फिर क्या?
कहानी के अंत को जानने के लिए यह किताब ज़रूर पढ़े।
मेरी सोच: मुझे ज़ारा का किरदार काफी अच्छा लगा। उसके मौत से मुझे बहत बुरा लगा। चैतन्य का चरित्र काफी प्रगाढ़ता से लिखी गयी है। कुछ कुछ जगहों पे थोड़ा सा उबाऊ हो गया था लेकिन बाद में आगे जाके यह कहानी और ज़्यादा दिलचस्प हो गयी।
काफी उन्दा तरीके से लिखी हुई किताब है, लेकिन ओर ज़्यादा बेहतर हो सकती थी।
मैंने मूवी तो नही देखी थी लेकिन जीजू की बात सुनकर मुझे इस किताब में और ज़्यादा दिलचस्पी आ गयी जिसके चलते मैंने इस किताब को उसी दिन पढ़ डाला।
कवर: इस किताब की कवर फ़ोटो काफी दिलचस्प है, इसको देखके समझ आता है के काफी well-planned किताब है। कॉलोर कॉम्बिनेशन काफी खूबसूरत है।
कहानी: यह कहानी "स्माइलिंग बुद्धा" के परमाणु परीक्षण के ऊपर है। पहले ही बता दु मुझे यह किताब पढ़कर इस बारे मे पता चला तब मैंने इसपे रिसर्च किया। इस किताब की कहानी का मैन किरदार चैतन्य है, वह बचपन से ही काफी होशियार था। उसने और ज़ारा (उसकी बीवी) ने मिलके मन बना लिया था के वह दोनों मिलके इस मिशन के पीछे की सच्चाई को लोगों के सामने लेके आएंगे लेकिन ज़ारा को मार दिया जाता है, जिससे चैतन्य बदले की आग में जलने लगता है, और अब वह अकेले निकल पढ़ता है। उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक ले जाती है उसका मिशन। फिर क्या?
कहानी के अंत को जानने के लिए यह किताब ज़रूर पढ़े।
मेरी सोच: मुझे ज़ारा का किरदार काफी अच्छा लगा। उसके मौत से मुझे बहत बुरा लगा। चैतन्य का चरित्र काफी प्रगाढ़ता से लिखी गयी है। कुछ कुछ जगहों पे थोड़ा सा उबाऊ हो गया था लेकिन बाद में आगे जाके यह कहानी और ज़्यादा दिलचस्प हो गयी।
काफी उन्दा तरीके से लिखी हुई किताब है, लेकिन ओर ज़्यादा बेहतर हो सकती थी।
July 13, 2022
अधिकतर, ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें एक निश्चित तरीके से चित्रित किया जाता है, जीसके कारण हमें लगता है कि उस्मे कुछ भी गड़बड़ नहीं हो रही है, हालांकि ज्यादातर ऐसा इसलिए है क्योंकि हम गहराई में जाने और सच्चाई के बारे में जानने के लिए कोशिश नाही करते हैं।
अक्सर हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो दर्शाती हैं कि पोखरण परमाणु परीक्षण कैसे सफल रहा, लेकिन जो कई लोग दिखाने में असफल रहे, वह नकारात्मक प्रभाव के बारे में सच्चाई है जो इसके मद्देनजर पीछे छूट गया।
लेखक उदय सिंह की पुस्तक 'पोखरण' के हमारे मुख्य नायक चैतन्य परमाणु पतन का एक ऐसा उदाहरण थे, जिसके परिणामस्वरूप उनका जन्म एक विकलांगता के साथ हुआ, जिसके कारण उन्हें हमेशा अधूरापन महसूस हुआ।
सच्चाई को उजागर करने और सभी को सच्चाई और वास्तविकता का असली चेहरा दिखाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ हमारा मुख्य नायक रहस्यों को उजागर करने के लिए एक मिशन पर निकलता है।
लेकिन जिन ताकतों के खिलाफ चैतन्य लड़ना चाहते हैं, वे अनुभवी खिलाड़ी हैं और इसलिए हमे समझ आ जाता है की यह आसान काम नहीं होगा।
अब, क्या वह विजयी बनकर उभर पाएगा और उसने जो योजना बनाई है उसे हासिल कर पाएगा या अन्य दलों को उसका सर्वश्रेष्ठ मिलेगा, यह देखना बाकी है।
यह एक तेज गति वाला उपन्यास था जो वास्तव में पाठक को बैठकर कहानी के भीतर वर्णित कुछ गंभीर विषयों के बारे में सोचेने के लिए मजबूर करता है, इसलिए मैं इस पुस्तक को पांच सितारे देने जा रही हूं ⭐⭐⭐⭐⭐
अक्सर हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो दर्शाती हैं कि पोखरण परमाणु परीक्षण कैसे सफल रहा, लेकिन जो कई लोग दिखाने में असफल रहे, वह नकारात्मक प्रभाव के बारे में सच्चाई है जो इसके मद्देनजर पीछे छूट गया।
लेखक उदय सिंह की पुस्तक 'पोखरण' के हमारे मुख्य नायक चैतन्य परमाणु पतन का एक ऐसा उदाहरण थे, जिसके परिणामस्वरूप उनका जन्म एक विकलांगता के साथ हुआ, जिसके कारण उन्हें हमेशा अधूरापन महसूस हुआ।
सच्चाई को उजागर करने और सभी को सच्चाई और वास्तविकता का असली चेहरा दिखाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ हमारा मुख्य नायक रहस्यों को उजागर करने के लिए एक मिशन पर निकलता है।
लेकिन जिन ताकतों के खिलाफ चैतन्य लड़ना चाहते हैं, वे अनुभवी खिलाड़ी हैं और इसलिए हमे समझ आ जाता है की यह आसान काम नहीं होगा।
अब, क्या वह विजयी बनकर उभर पाएगा और उसने जो योजना बनाई है उसे हासिल कर पाएगा या अन्य दलों को उसका सर्वश्रेष्ठ मिलेगा, यह देखना बाकी है।
यह एक तेज गति वाला उपन्यास था जो वास्तव में पाठक को बैठकर कहानी के भीतर वर्णित कुछ गंभीर विषयों के बारे में सोचेने के लिए मजबूर करता है, इसलिए मैं इस पुस्तक को पांच सितारे देने जा रही हूं ⭐⭐⭐⭐⭐
July 26, 2022
समीक्षा by अर्पिता
पुस्तक:-पोखरण
लेखक :- उदय सिंह
रचना-पद्धति:-ऐतिहासिक
❤️समीक्षा❤️
ये उस समय की बात है जब भारत सरकार ने परमाणु परीक्षण पोखरण मे किया जो भारत के लिए तो बहुत बड़ी सफलता थी लेकिन दूसरी ओर उस परिक्षण का बहुत सी जिंदगीओ पर गहरा असर पड़ा। उस समय पेदा हुए बच्चों को विकलांगता का भोग बनना पड़ा। उन्हीं में से एक बच्चे की कहानी है जिसकी जिंदगी संघर्षों से लिपटी हुई थी पर बावजूद इसके उसने आखिरी सांस तक हार नहीं मानी। अपने पिताजी का कठोरपन बचपन में जो कडवा लगा वही जीवन की मुश्किलें आसान करने में मीठा लगा। शरीर की कमजोरी को ताकत बनाके साथ ही अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करते करते सारी मुश्किलें झेलली। पोखरण की भूमि पर पेदा होने का गर्व था सरकार के परीक्षण की गलतियों को ना मानने से नाराज था अपने को खोने का दुख था ओर उसी अपने का एक सिद्धांतवादी शहर बसाने का सपना पुरा करना था। कहानी रोचक है कई मोड है।
लेखक ने कहानी को अच्छी तरह से बयान किया कभी-कभी तो हम खुद को उस समय उस जगह पाए ऐसा महसूस हुआ। कहानी समझने के लिए थोड़ा धैर्य रखना पड़ेगा क्योंकि शुरू से जो कहानी चली उसका सिरा कुछ दूर चलके मिला।
लेखक के बारे में :
उदय एक अर्थशास्त्री और इंजीनियर हैं। अनका द्रढ विश्वास है कि बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के लिए मानवता का प्रगतिशील होना आवश्यक है।
#आज का प्रश्न :
परमाणु परीक्षण तो देश के विकास के लिए हुआ लेकिन उससे प्रभावित हुए लोगों की जिम्मेदारी कोन लेगा?
पुस्तक:-पोखरण
लेखक :- उदय सिंह
रचना-पद्धति:-ऐतिहासिक
❤️समीक्षा❤️
ये उस समय की बात है जब भारत सरकार ने परमाणु परीक्षण पोखरण मे किया जो भारत के लिए तो बहुत बड़ी सफलता थी लेकिन दूसरी ओर उस परिक्षण का बहुत सी जिंदगीओ पर गहरा असर पड़ा। उस समय पेदा हुए बच्चों को विकलांगता का भोग बनना पड़ा। उन्हीं में से एक बच्चे की कहानी है जिसकी जिंदगी संघर्षों से लिपटी हुई थी पर बावजूद इसके उसने आखिरी सांस तक हार नहीं मानी। अपने पिताजी का कठोरपन बचपन में जो कडवा लगा वही जीवन की मुश्किलें आसान करने में मीठा लगा। शरीर की कमजोरी को ताकत बनाके साथ ही अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करते करते सारी मुश्किलें झेलली। पोखरण की भूमि पर पेदा होने का गर्व था सरकार के परीक्षण की गलतियों को ना मानने से नाराज था अपने को खोने का दुख था ओर उसी अपने का एक सिद्धांतवादी शहर बसाने का सपना पुरा करना था। कहानी रोचक है कई मोड है।
लेखक ने कहानी को अच्छी तरह से बयान किया कभी-कभी तो हम खुद को उस समय उस जगह पाए ऐसा महसूस हुआ। कहानी समझने के लिए थोड़ा धैर्य रखना पड़ेगा क्योंकि शुरू से जो कहानी चली उसका सिरा कुछ दूर चलके मिला।
लेखक के बारे में :
उदय एक अर्थशास्त्री और इंजीनियर हैं। अनका द्रढ विश्वास है कि बेहतर और उज्ज्वल भविष्य के लिए मानवता का प्रगतिशील होना आवश्यक है।
#आज का प्रश्न :
परमाणु परीक्षण तो देश के विकास के लिए हुआ लेकिन उससे प्रभावित हुए लोगों की जिम्मेदारी कोन लेगा?
This entire review has been hidden because of spoilers.
March 11, 2023
"लाफिंग बुद्धा" परीक्षण, जिसे भारत सरकार ने पोखरण में प्रशासित किया, इस उपन्यास के केंद्रीय विषय के रूप में कार्य करता है।
यह कथा "स्माइलिंग बुद्धा" परमाणु परीक्षण परियोजना और उसके परिणाम से शुरू होती है, जिसका पोखरण के निवासियों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
इस कहानी में चैतन्य मुख्य पात्र हैं। वह अपंग बच्चों में से एक है जिसका जीवन उथल-पुथल से घिरा हुआ है क्योंकि वह एक छोटा लड़का था और जिसने एक राजनीतिक साजिश के परिणामस्वरूप अपने पिता को खो दिया। हालाँकि, वह तब से बुद्धिमान था जब वह छोटा था। उन्होंने जीवन में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की और पर्याप्त संपत्ति अर्जित की।
लेखक ने शोध का एक अद्भुत काम किया और कथा को बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। एमआईटी जांच से केवल कुछ प्रमुख निष्कर्षों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मैं उन्हें सलाम करता हूं। उन्होंने आगे भ्रष्टाचार और मानव तस्करी सहित समाज के सबसे बुरे पहलुओं पर जोर दिया। पुस्तक की शब्दावली पाठकों के लिए सुलभ है। लेखक की प्रवाहपूर्ण लेखन शैली है। भाषा सीधी और समझने में आसान है। लेखक पात्रों का वर्णन और विकास करने का अच्छा काम करता है। मैंने वास्तव में चैतन्य के व्यक्तित्व का आनंद लिया। पुस्तक का शीर्षक और आवरण इसकी विषय वस्तु के आदर्श पूरक हैं। पुस्तक का लेआउट प्रभावी ढंग से चित्रित किया गया है। मैं किसी को भी इस किताब को पढ़ने की सलाह देता हूं।
यह कथा "स्माइलिंग बुद्धा" परमाणु परीक्षण परियोजना और उसके परिणाम से शुरू होती है, जिसका पोखरण के निवासियों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
इस कहानी में चैतन्य मुख्य पात्र हैं। वह अपंग बच्चों में से एक है जिसका जीवन उथल-पुथल से घिरा हुआ है क्योंकि वह एक छोटा लड़का था और जिसने एक राजनीतिक साजिश के परिणामस्वरूप अपने पिता को खो दिया। हालाँकि, वह तब से बुद्धिमान था जब वह छोटा था। उन्होंने जीवन में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की और पर्याप्त संपत्ति अर्जित की।
लेखक ने शोध का एक अद्भुत काम किया और कथा को बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। एमआईटी जांच से केवल कुछ प्रमुख निष्कर्षों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मैं उन्हें सलाम करता हूं। उन्होंने आगे भ्रष्टाचार और मानव तस्करी सहित समाज के सबसे बुरे पहलुओं पर जोर दिया। पुस्तक की शब्दावली पाठकों के लिए सुलभ है। लेखक की प्रवाहपूर्ण लेखन शैली है। भाषा सीधी और समझने में आसान है। लेखक पात्रों का वर्णन और विकास करने का अच्छा काम करता है। मैंने वास्तव में चैतन्य के व्यक्तित्व का आनंद लिया। पुस्तक का शीर्षक और आवरण इसकी विषय वस्तु के आदर्श पूरक हैं। पुस्तक का लेआउट प्रभावी ढंग से चित्रित किया गया है। मैं किसी को भी इस किताब को पढ़ने की सलाह देता हूं।
March 12, 2023
यह किताब भारत सरकार द्वारा पोखरण में किये गए ''लाफिंग बुद्धा '' परिक्षण के इर्द-गिर्द घूमती है।
ये कहानी 'स्माइलिंग बुद्ध' नामक एक परमाणु परीक्षण परियोजना और उस नतीजे से शुरू होती है जिसने पोखरण के लोगों पर स्थायी प्रभाव छोड़ा था।
इस कहानी में विशेष रूप से मुख्य नायक, चैतन्य है | वह विकलांग बच्चों में से एक है, जिसकी जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से घिरी थी, उसने एक राजनीतिक साजिश के तहत अपने पिता को खो दिया। लेकिन वह बचपन से ही काफी होशियार था। वह अपने जीवन में बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचा और ढेर सारा पैसा कमाया।
लेखक ने कहानी को वास्तव में अच्छी तरह से सुनाया है और उसके द्वारा किया गया शोध कार्य अविश्वसनीय है। मैं एमआईटी में किए गए अध्ययनों की अंतर्दृष्टि को कम करने के लिए उनकी सराहना करता हूं। उन्होंने मानव तस्करी और भ्रष्टाचार जैसे समाज के अंधेरे पक्ष पर भी प्रकाश डाला। पुस्तक में दी गई शब्दावली पाठक के अनुकूल है। लेखक की लेखन शैली सुचारु है। उपयोग की जाने वाली भाषा सरल और समझने में आसान है। लेखक द्वारा वर्ण अच्छी तरह से विकसित और वर्णित हैं।मुझे चैतन्य का चरित्र बहुत पसंद आया। पुस्तक का कवर और शीर्षक पूरी तरह से सामग्री के लिए उपयुक्त है। पुस्तक का प्रवाह अच्छी तरह से चित्रित है। मैं इस पुस्तक को सभी को सुझाती हूं।
ये कहानी 'स्माइलिंग बुद्ध' नामक एक परमाणु परीक्षण परियोजना और उस नतीजे से शुरू होती है जिसने पोखरण के लोगों पर स्थायी प्रभाव छोड़ा था।
इस कहानी में विशेष रूप से मुख्य नायक, चैतन्य है | वह विकलांग बच्चों में से एक है, जिसकी जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से घिरी थी, उसने एक राजनीतिक साजिश के तहत अपने पिता को खो दिया। लेकिन वह बचपन से ही काफी होशियार था। वह अपने जीवन में बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचा और ढेर सारा पैसा कमाया।
लेखक ने कहानी को वास्तव में अच्छी तरह से सुनाया है और उसके द्वारा किया गया शोध कार्य अविश्वसनीय है। मैं एमआईटी में किए गए अध्ययनों की अंतर्दृष्टि को कम करने के लिए उनकी सराहना करता हूं। उन्होंने मानव तस्करी और भ्रष्टाचार जैसे समाज के अंधेरे पक्ष पर भी प्रकाश डाला। पुस्तक में दी गई शब्दावली पाठक के अनुकूल है। लेखक की लेखन शैली सुचारु है। उपयोग की जाने वाली भाषा सरल और समझने में आसान है। लेखक द्वारा वर्ण अच्छी तरह से विकसित और वर्णित हैं।मुझे चैतन्य का चरित्र बहुत पसंद आया। पुस्तक का कवर और शीर्षक पूरी तरह से सामग्री के लिए उपयुक्त है। पुस्तक का प्रवाह अच्छी तरह से चित्रित है। मैं इस पुस्तक को सभी को सुझाती हूं।
August 2, 2022
भारत ने 1974 से हथियारों के मामले में बहुत कुछ हासिल किया है और खासकर जब उसने परमाणु हथियार हासिल किए हैं। लेकिन किस कीमत पर?
1974 में परमाणु अनुसंधान, "स्माइलिंग बुद्धा" भारत के लिए एक बड़ी जीत थी, लेकिन कहीं न कहीं कोई था जो इस शोध से प्रतिकूल रूप से प्रभावित था, गाँव, पोखरण और विशेष रूप से मुख्य नायक, चैतन्य। रेडियोएक्टिव फॉलआउट के प्रभाव, जो एक गाँव को भारी नुकसान पहुंचाने से रोका जा सकता था, को रोका नहीं गया या उसकी देखभाल नहीं की गई। चैतन्य को जैसे ही इस सारे षडयंत्र के बारे में पता चला वह उन सभी का पर्दाफाश करना चाहता था। बहुत कठिनायों के उसके जीवन में भी प्यार आया लेकिन फिर नियति इस बार भी चैतन्य के साथ नहीं थी। क्या चैतन्य गलत काम करने वालों का पर्दाफाश कर पाएगा? क्या उसे सफलता मिलेगी?
यह कहानी बहुत ही सुंदर रूप से लिखी गई है, युगों बाद एक हिंदी उपन्यास पढ़ा और कहानी पूरी होने से पहले पढ़ना बंद नहीं कर सकी। मैं पूरी कहानी में पूरी तरह से उत्सुक थी। मैं अंत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। सुंदर संवाद के साथ पूरी कहानी को जैसे बयां किया गया है, यह बहुत अच्छा था, यदि आप हिंदी उपन्यास पढ़ना चाहते हैं, तो आप इसे अवश्य पढ़ें।
1974 में परमाणु अनुसंधान, "स्माइलिंग बुद्धा" भारत के लिए एक बड़ी जीत थी, लेकिन कहीं न कहीं कोई था जो इस शोध से प्रतिकूल रूप से प्रभावित था, गाँव, पोखरण और विशेष रूप से मुख्य नायक, चैतन्य। रेडियोएक्टिव फॉलआउट के प्रभाव, जो एक गाँव को भारी नुकसान पहुंचाने से रोका जा सकता था, को रोका नहीं गया या उसकी देखभाल नहीं की गई। चैतन्य को जैसे ही इस सारे षडयंत्र के बारे में पता चला वह उन सभी का पर्दाफाश करना चाहता था। बहुत कठिनायों के उसके जीवन में भी प्यार आया लेकिन फिर नियति इस बार भी चैतन्य के साथ नहीं थी। क्या चैतन्य गलत काम करने वालों का पर्दाफाश कर पाएगा? क्या उसे सफलता मिलेगी?
यह कहानी बहुत ही सुंदर रूप से लिखी गई है, युगों बाद एक हिंदी उपन्यास पढ़ा और कहानी पूरी होने से पहले पढ़ना बंद नहीं कर सकी। मैं पूरी कहानी में पूरी तरह से उत्सुक थी। मैं अंत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। सुंदर संवाद के साथ पूरी कहानी को जैसे बयां किया गया है, यह बहुत अच्छा था, यदि आप हिंदी उपन्यास पढ़ना चाहते हैं, तो आप इसे अवश्य पढ़ें।
August 3, 2022
जिस दिन मेरे दरवाजे पर किताब पहुंचाई गई वह एक खास दिन था! एक पाठक होने के नाते मेरी रगों में बहुत सारी भावनाएँ उमड़ रही थीं और मैं इस पुस्तक को पढ़ने के लिए उत्सुक था।
इस पुस्तक ने अपने नाम और टैग लाइन के माध्यम से मेरा ध्यान खींचा, यह अपने आप में बहुत अधिक क्षमता धारण करता है, हालांकि हम में से अधिकांश ने हमारे बहादुर सैनिकों की फिल्म और कार्यों को देखा तथा सुना था, लेकिन इस पुस्तक ने कहानी की ओर एक अलग कोण लिया। और हमें नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
यह पुस्तक पूरी तरह से 18 मई, 1974 को प्रसिद्ध "लाफिंग बुद्धा" परमाणु प्रयोग पर आधारित है। वास्तव में हर चेहरे के दो पहलू होते हैं, एक लाभदायक और आकर्षक और दूसरा हानिकारक तथा आधारित होता है। इस कहानी को इस परमाणु प्रयोग चैतन्य के उसी नकारात्मक पक्ष द्वारा देखा जाता है।
कहानी के लेखक श्री उदय सिंह जी एक सच्चे शिल्पकार हैं और उन्होंने इस चरित्र को एक अलग रूप में और बहुत अच्छी तरह से किए गए वातावरण के साथ विकसित किया है, और अगर वह अपने चरित्र को हर किनारे दिखाते हैं।
इस पुस्तक को अपने आप में किसी परिचय और अनुशंसा की आवश्यकता नहीं है, लेकिन फिर भी यह कहेगा कि इसे आजमाएँ और देखें कि इसे कितनी अच्छी तरह से गढ़ा गया है।
इस पुस्तक ने अपने नाम और टैग लाइन के माध्यम से मेरा ध्यान खींचा, यह अपने आप में बहुत अधिक क्षमता धारण करता है, हालांकि हम में से अधिकांश ने हमारे बहादुर सैनिकों की फिल्म और कार्यों को देखा तथा सुना था, लेकिन इस पुस्तक ने कहानी की ओर एक अलग कोण लिया। और हमें नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
यह पुस्तक पूरी तरह से 18 मई, 1974 को प्रसिद्ध "लाफिंग बुद्धा" परमाणु प्रयोग पर आधारित है। वास्तव में हर चेहरे के दो पहलू होते हैं, एक लाभदायक और आकर्षक और दूसरा हानिकारक तथा आधारित होता है। इस कहानी को इस परमाणु प्रयोग चैतन्य के उसी नकारात्मक पक्ष द्वारा देखा जाता है।
कहानी के लेखक श्री उदय सिंह जी एक सच्चे शिल्पकार हैं और उन्होंने इस चरित्र को एक अलग रूप में और बहुत अच्छी तरह से किए गए वातावरण के साथ विकसित किया है, और अगर वह अपने चरित्र को हर किनारे दिखाते हैं।
इस पुस्तक को अपने आप में किसी परिचय और अनुशंसा की आवश्यकता नहीं है, लेकिन फिर भी यह कहेगा कि इसे आजमाएँ और देखें कि इसे कितनी अच्छी तरह से गढ़ा गया है।
August 5, 2022
उदय सिंह द्वारा पोखरण चैतन्य की कहानी है। "पोखरण" शीर्षक अपने आप में पुस्तक के बारे में बहुत कुछ कहता है। कहानी 'स्माइलिंग बुद्धा' परमाणु परीक्षण की सफलता पर आधारित है जिसने 1974 में भारत के परमाणु शक्ति के रूप में उदय को चिह्नित किया। लेकिन साथ ही कहानी और भी बहुत कुछ कहती है जिसमें बदला, साहस, प्रेम और अपराजेय मानवीय भावना शामिल है। अपनी विकलांगता के कारण चैतन्य का अपने पिता के साथ अच्छे संबंध नहीं थे, लेकिन फिर भी वे एक मजबूत चरित्र के थे और कई चुनौतियों का सामना करने के बाद भी वे अपने मिशन में मजबूत और दृढ़ थे। मैं आपको स्पॉइलर नहीं दे सकता, आपको किताब पढ़ने की जरूरत है और मेरा विश्वास करें कि आपको इस किताब को पढ़कर पछतावा नहीं होगा। यह आपको चैतन्य की यात्रा के रोलर कोस्टर राइड में ले जाएगा। विकृत लोगों को उनकी खामियों से परे देखने के लिए यह उपन्यास एक और शक्तिशाली संदेश देता है। यहां तक कि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के विभिन्न जाति, पंथ और धार्मिक विश्वासों के लोग भी प्रेम में पड़ गए, उन्हें विवाह बंधन में बांध दिया। यह उपन्यास कई मिथकों के खिलाफ बोलता है। यहां तक कि डकैती भी नेक काम की बिक्री के लिए नेक इरादे से की जा सकती है।
March 13, 2023
कुछ किताबें, कुछ कहानियाँ हमारे दिल के मूल में हमेशा के लिए रह जाती हैं और हमारे दिमाग में एक छाप छोड़ जाती हैं। लेखक UDAY SINGH द्वारा " POKHRAN " एक ऐसी कहानी है जिसने मेरे दिमाग में एक छाप छोड़ी। ये कहानी 'स्माइलिंग बुद्ध' नामक एक परमाणु परीक्षण परियोजना और उस नतीजे से शुरू होती है जिसने पोखरण के लोगों पर स्थायी प्रभाव छोड़ा था।
जिस चीज से मैं सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ वह थी लेखन का प्रवाह! सब कुछ एक साथ समेकित रूप से जुड़ा हुआ है और मैंने एक बैठक में पुस्तक के माध्यम से चक्कर लगाया। यह एक प्रकार की किताब है जिसे मैं जब भी या जहां भी हूं पढ़ सकता हूं। कच्चे, चुंबकीय चरित्रों और महान कथानक की लेखक की तकनीक एक उपहार है।
कुल मिलाकर, मुझे पुस्तक बहुत पसंद आई और साथी पाठकों को इसे आजमाने की जोरदार सलाह दी। और अंत में, मैं उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहूँगा जिसने इस कवर को संपादित किया है, अन्यथा मेरे संग्रह की अन्य पुस्तकों को पूरा करने के बाद पढ़ने में आने में कम या ज्यादा महीने लग जाते।
समीक्षा। मैंने अपनी निष्पक्ष और ईमानदार समीक्षा देने के लिए इस पुस्तक को पढ़ा। मैं इसकी सिफारिश करता हूं और मैं अपने लिए सिद्धांतों को आजमाने के लिए उत्सुक हूं।
जिस चीज से मैं सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ वह थी लेखन का प्रवाह! सब कुछ एक साथ समेकित रूप से जुड़ा हुआ है और मैंने एक बैठक में पुस्तक के माध्यम से चक्कर लगाया। यह एक प्रकार की किताब है जिसे मैं जब भी या जहां भी हूं पढ़ सकता हूं। कच्चे, चुंबकीय चरित्रों और महान कथानक की लेखक की तकनीक एक उपहार है।
कुल मिलाकर, मुझे पुस्तक बहुत पसंद आई और साथी पाठकों को इसे आजमाने की जोरदार सलाह दी। और अंत में, मैं उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहूँगा जिसने इस कवर को संपादित किया है, अन्यथा मेरे संग्रह की अन्य पुस्तकों को पूरा करने के बाद पढ़ने में आने में कम या ज्यादा महीने लग जाते।
समीक्षा। मैंने अपनी निष्पक्ष और ईमानदार समीक्षा देने के लिए इस पुस्तक को पढ़ा। मैं इसकी सिफारिश करता हूं और मैं अपने लिए सिद्धांतों को आजमाने के लिए उत्सुक हूं।
August 5, 2022
पोखरण-द्वितीय परीक्षण के रूप में जाने जाने वाले पांच परमाणु बम परीक्षण विस्फोट भारत द्वारा भारतीय सेना के लिए पोखरण परीक्षण स्थल पर किए गए थे। भारत ने "ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा" की आड़ में अपना पहला परमाणु बम परीक्षण सफलतापूर्वक किया। पोखरण सैन्य अड्डे पर बम विस्फोट हुआ। परिचालन गोपनीयता और कार्यक्षमता की गारंटी के लिए, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक छोटी टीम को पेशेवर रूप से संगठित और प्रबंधित किया गया था। पोखरण के निकट संभावित रूप से खतरनाक स्वास्थ्य परिघटनाओं के अस्तित्व को अनगिनत छोटे शोधों द्वारा दिखाया गया है। कैंसर मृत्यु दर और अन्य बीमारियों के कारण आसपास के गांव बहुत प्रभावित हुए हैं लेकिन चीजें अभी भी सरकार ने इसे मान्यता नहीं दी है। पुस्तक काल्पनिक और वास्तविकता दोनों का मिश्रण है जिसमें यह शामिल है। किताबें उन प्रभावित लोगों की आवाज उठाने में एक प्रमुख भूमिका निभाती हैं। एक उत्कृष्ट, सही मायने में मूल कार्य लेखक का निर्माण करता है। यह पुस्तक बहुत विशिष्ट हो जाती है, फिर भी यह पूरी तरह से समझने में काफी आसान है।
March 11, 2023
एक शब्द में इस पुस्तक का वर्णन करने के लिए - आंख खोलने वाला।
उदय सिंह द्वारा लिखित पुस्तक 'पोखरण' 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण के बारे में और उसके बारे में कई अनकही सच्चाइयों की एक काल्पनिक कहानीकार तरीके से पड़ताल और खुलासा करती है। कथानक परीक्षणों के बाद किए गए 'ऑपरेशन लाफिंग बुद्धा' के इर्द-गिर्द घूमता है।
इस पुस्तक में सार्वजनिक पीओवी का अत्यधिक उपयोग किया गया है, और आसपास रहने वाले लोगों द्वारा परमाणु परीक्षणों से कैसे निपटा गया इसका विशेष उल्लेख है। अंदर ऐसी कहानियां बताई गई हैं जो शायद किसी ने कभी नहीं सुनी होंगी।
भाषा की बात करें तो, यह पुस्तक जो चित्रित करना चाहती है, उसके लिए सरल, वाक्पटु और उपयुक्त है। कठिन शब्दों को छोड़ दिया गया है और लेखन शैली वही है जो हम अपने स्कूल के उपन्यासों में पढ़ते थे।
कुल मिलाकर, यह 5-6 घंटे की एक मनोरंजक पुस्तक है। यह हिंदी उपन्यासों में नौसिखियों और वास्तविकता के काल्पनिक प्रतिनिधित्व से उत्साहित होने वालों के लिए सबसे अच्छा है।
उदय सिंह द्वारा लिखित पुस्तक 'पोखरण' 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण के बारे में और उसके बारे में कई अनकही सच्चाइयों की एक काल्पनिक कहानीकार तरीके से पड़ताल और खुलासा करती है। कथानक परीक्षणों के बाद किए गए 'ऑपरेशन लाफिंग बुद्धा' के इर्द-गिर्द घूमता है।
इस पुस्तक में सार्वजनिक पीओवी का अत्यधिक उपयोग किया गया है, और आसपास रहने वाले लोगों द्वारा परमाणु परीक्षणों से कैसे निपटा गया इसका विशेष उल्लेख है। अंदर ऐसी कहानियां बताई गई हैं जो शायद किसी ने कभी नहीं सुनी होंगी।
भाषा की बात करें तो, यह पुस्तक जो चित्रित करना चाहती है, उसके लिए सरल, वाक्पटु और उपयुक्त है। कठिन शब्दों को छोड़ दिया गया है और लेखन शैली वही है जो हम अपने स्कूल के उपन्यासों में पढ़ते थे।
कुल मिलाकर, यह 5-6 घंटे की एक मनोरंजक पुस्तक है। यह हिंदी उपन्यासों में नौसिखियों और वास्तविकता के काल्पनिक प्रतिनिधित्व से उत्साहित होने वालों के लिए सबसे अच्छा है।
March 11, 2023
1974 में परमाणु-परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' की सफलता ने भारत को परमाणु-शक्ति के तौर पर उल्लेखनीय गति प्रदान की। लेकिन पोखरण के निवासियों, विशेषकर चैतन्य पर, इसके दुष्प्रभाव की खबर मीडिया की सुर्खियाँ नहीं बनीं ।
बहुत जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि रेडियो एक्टिव फॉलआउट के इर्द-गिर्द बुने गए इस षड्यंत्र का गहरा संबंध इसकी स्थापना से जुड़ा था। इस षड्यंत्र को छिपाने में जिनका हाथ है, वे इस राज को दफनाने के लिए भरपूर और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं ।
चैतन्य इस सच्चाई को उजागर करने की राह पर चल पड़ता है। जारा का साथ पाकर उसे विश्वास हो जाता है कि वह लोगों को न्याय दिला सकता है । लेकिन जब नियति जारा को उससे दूर कर देती है, तो वह प्रतिशोेध की आग में जलने लगता है। धमकियों से डरे बिना वह एक मिशन पर निकल पड़ता है, जो उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है और एम.आई.टी. की सभाओं तक।
एक दिलचस्प मोड़ लेते हुए ' पोखरण' मुख्य रूप से बदले की असाधारण यात्रा, साहस, प्रेम और अजेय मानवीय शक्ति की कहानी है, जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाएँगे।
बहुत जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि रेडियो एक्टिव फॉलआउट के इर्द-गिर्द बुने गए इस षड्यंत्र का गहरा संबंध इसकी स्थापना से जुड़ा था। इस षड्यंत्र को छिपाने में जिनका हाथ है, वे इस राज को दफनाने के लिए भरपूर और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं ।
चैतन्य इस सच्चाई को उजागर करने की राह पर चल पड़ता है। जारा का साथ पाकर उसे विश्वास हो जाता है कि वह लोगों को न्याय दिला सकता है । लेकिन जब नियति जारा को उससे दूर कर देती है, तो वह प्रतिशोेध की आग में जलने लगता है। धमकियों से डरे बिना वह एक मिशन पर निकल पड़ता है, जो उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है और एम.आई.टी. की सभाओं तक।
एक दिलचस्प मोड़ लेते हुए ' पोखरण' मुख्य रूप से बदले की असाधारण यात्रा, साहस, प्रेम और अजेय मानवीय शक्ति की कहानी है, जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाएँगे।
March 11, 2023
पुस्तक : पोखरण
लेखक : उदय सिंह
यह किताब भारत सरकार द्वारा पोखरण में किये गए ''लाफिंग बुद्धा '' परिक्षण के इर्द-गिर्द घूमती है।
ये कहानी 'स्माइलिंग बुद्ध' नामक एक परमाणु परीक्षण परियोजना और उस नतीजे से शुरू होती है जिसने पोखरण के लोगों पर स्थायी प्रभाव छोड़ा था।
1974 पोखरण राजस्थान जहां भारत का पहला परमाणु परीक्षण जिसका नाम 'स्माइलिंग बुद्धा' था और इसने वहां के लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित किया और वर्तमान दिन जहां परमाणु परीक्षण चैतन्य के पतन का एक उत्तरजीवी जिसका जीवन दुखों और संघर्षों से भरा था क्योंकि उसने अपनी माँ को उसे और उसके पिता को जन्म देने के बाद खो दिया था । अपनी अक्षमताओं के कारण उनकी उपेक्षा की गई लेकिन उनका दिमाग तेज था जिसने उन्हें यूएसए में एमआईटी की सीटों तक पहुंचा दिया।
इस कहानी के पात्र वास्तविक और भरोसेमंद दिखाई देते हैं। इस पुस्तक में प्रयोग भाषा सरल और स्पष्ट है। पुस्तक शुरुआत के अनुकूल है और किया गया वर्णन बहुत अच्छी तरह से किया गया है। मैं यह पुस्तक सभी पाठकों को पढ़ने की सलाह दूँगा।
लेखक : उदय सिंह
यह किताब भारत सरकार द्वारा पोखरण में किये गए ''लाफिंग बुद्धा '' परिक्षण के इर्द-गिर्द घूमती है।
ये कहानी 'स्माइलिंग बुद्ध' नामक एक परमाणु परीक्षण परियोजना और उस नतीजे से शुरू होती है जिसने पोखरण के लोगों पर स्थायी प्रभाव छोड़ा था।
1974 पोखरण राजस्थान जहां भारत का पहला परमाणु परीक्षण जिसका नाम 'स्माइलिंग बुद्धा' था और इसने वहां के लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित किया और वर्तमान दिन जहां परमाणु परीक्षण चैतन्य के पतन का एक उत्तरजीवी जिसका जीवन दुखों और संघर्षों से भरा था क्योंकि उसने अपनी माँ को उसे और उसके पिता को जन्म देने के बाद खो दिया था । अपनी अक्षमताओं के कारण उनकी उपेक्षा की गई लेकिन उनका दिमाग तेज था जिसने उन्हें यूएसए में एमआईटी की सीटों तक पहुंचा दिया।
इस कहानी के पात्र वास्तविक और भरोसेमंद दिखाई देते हैं। इस पुस्तक में प्रयोग भाषा सरल और स्पष्ट है। पुस्तक शुरुआत के अनुकूल है और किया गया वर्णन बहुत अच्छी तरह से किया गया है। मैं यह पुस्तक सभी पाठकों को पढ़ने की सलाह दूँगा।
March 12, 2023
"पोखरण- एक रोमांचक उपन्यास" की कहानी भारत द्वारा किए गए पहले परमाणु परीक्षण के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे "स्माइलिंग बुद्धा" कहा जाता है।
यह एक बहुत अच्छी तरह से शोधित और विचारशील उपन्यास है। इसी कहानी से निकलती है कहानी चैतन्य की, जो विकलांग शरीर होने के बावजूद अद्भुत क्षमता रखता हैं।
पुस्तक में विभिन्न अध्याय हैं जो राधिका, चैतन्य की बहन जैसे कुछ महत्वपूर्ण पात्रों के विवरण के साथ कदम दर कदम आगे बढ़ती हैं। ज़ारा, उसके जीवन का प्यार। देवयानी, कृष्णा, रोब, रमेश सर आदि। किरदार इसकी रोमांच को भरपूर न्याय देते है ।
इन किरदारों को समझने आपको उतरना है उस दुनिया में जो लेखक उदय सिंह द्वारा शानदार साहित्यिक निष्पादन में गहराई से बनी है, जिसमे उन्होंने भावनाओं, विचार प्रक्रिया और बेहतर समाज और उसके मूल्यों के विचार को बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। जिस तरह से उन्होंने चैतन्य की कहानी को इसमें शामिल किया, उसके मुश्किल लेकिन प्रेरणादायक जीवन को ट्विस्ट और टर्न के साथ बुना है। यह इस पुस्तक को बेहद प्रभावशाली बनाता है। 💯
यह एक बहुत अच्छी तरह से शोधित और विचारशील उपन्यास है। इसी कहानी से निकलती है कहानी चैतन्य की, जो विकलांग शरीर होने के बावजूद अद्भुत क्षमता रखता हैं।
पुस्तक में विभिन्न अध्याय हैं जो राधिका, चैतन्य की बहन जैसे कुछ महत्वपूर्ण पात्रों के विवरण के साथ कदम दर कदम आगे बढ़ती हैं। ज़ारा, उसके जीवन का प्यार। देवयानी, कृष्णा, रोब, रमेश सर आदि। किरदार इसकी रोमांच को भरपूर न्याय देते है ।
इन किरदारों को समझने आपको उतरना है उस दुनिया में जो लेखक उदय सिंह द्वारा शानदार साहित्यिक निष्पादन में गहराई से बनी है, जिसमे उन्होंने भावनाओं, विचार प्रक्रिया और बेहतर समाज और उसके मूल्यों के विचार को बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। जिस तरह से उन्होंने चैतन्य की कहानी को इसमें शामिल किया, उसके मुश्किल लेकिन प्रेरणादायक जीवन को ट्विस्ट और टर्न के साथ बुना है। यह इस पुस्तक को बेहद प्रभावशाली बनाता है। 💯
January 20, 2023
पुस्तक पोखरण में लिए गए "स्माइलिंग बुद्धा" के परमाणु परीक्षण मिशन पर आधारित है। कहानी केंद्रीय चरित्र चैतन्य उर्फ चैतू के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति है। उनका असामान्य शरीर परमाणु परीक्षण का प्रभाव था। चैतन्य एक बुद्धिमान बच्चा था, वह अपने जीवन में अकादमिक उत्कृष्टता की ऊंचाइयों तक पहुंचा और बहुत पैसा कमाया। उनके पिता इस मिशन के पीछे की सच्चाई को उजागर करने का संकल्प लेते हैं लेकिन उनकी हत्या कर दी गई थी, मुझे लेखक की शैली पसंद नहीं है कि पाठक को उनके प्यार में पड़ने के बाद चरित्र को मार दिया जाए। सच्चाई को प्रकट करने के लिए नायक का दृष्टिकोण रोमांचक और दिलचस्प कहानी था लेकिन इसका अंत बहुत निराशाजनक था । पुस्तक का उद्देश्य बहुत ही नेक था लेकिन यह उसे पूरा करने में विफल रहा और मैंने इसे उच्च आशा के साथ शुरू किया लेकिन निराशा के साथ समाप्त हुआ। पुस्तक शुरुआत के अनुकूल है और भाषा बहुत आसान है।
March 12, 2023
"पोखरण" एक उपन्यास है जो 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण के बाद और पोखरण के निवासियों पर इसके प्रभाव को उजागर करता है। पुस्तक रेडियोधर्मी पतन और स्थापना द्वारा इसके कवर-अप के आसपास एक काल्पनिक षड्यंत्र सिद्धांत प्रस्तुत करती है। नायक, चैतन्य, सच्चाई को उजागर करने और अपने लोगों को न्याय दिलाने के लिए निकल पड़ता है।
पुस्तक एक रोमांचक पृष्ठ-टर्नर है जो पाठकों को अपनी सीटों के किनारे पर रखती है। लेखक एक सम्मोहक आख्यान बुनता है जो पाठकों को पोखरण के रेगिस्तान से लेकर सीरिया के रेगिस्तान और एमआईटी के हॉल तक की यात्रा पर ले जाता है। कहानी सस्पेंस, एक्शन और ड्रामा से भरपूर है जो पाठकों को पूरी किताब में बांधे रखती है।
इसके मूल में, "पोखरण" केवल बदले की कहानी नहीं है, बल्कि साहस, प्रेम और मानवीय भावना की भी कहानी है। यह पुस्तक अच्छी तरह से लिखी गई और विचारोत्तेजक है, जो इसे राजनीतिक रोमांच और साजिश के सिद्धांतों में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए पढ़ने योग्य बनाती है।
पुस्तक एक रोमांचक पृष्ठ-टर्नर है जो पाठकों को अपनी सीटों के किनारे पर रखती है। लेखक एक सम्मोहक आख्यान बुनता है जो पाठकों को पोखरण के रेगिस्तान से लेकर सीरिया के रेगिस्तान और एमआईटी के हॉल तक की यात्रा पर ले जाता है। कहानी सस्पेंस, एक्शन और ड्रामा से भरपूर है जो पाठकों को पूरी किताब में बांधे रखती है।
इसके मूल में, "पोखरण" केवल बदले की कहानी नहीं है, बल्कि साहस, प्रेम और मानवीय भावना की भी कहानी है। यह पुस्तक अच्छी तरह से लिखी गई और विचारोत्तेजक है, जो इसे राजनीतिक रोमांच और साजिश के सिद्धांतों में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए पढ़ने योग्य बनाती है।
March 12, 2023
पुस्तक का शीर्षक कथानक के लिए बहुत उपयुक्त है क्योंकि लेखक ने सच्ची घटना “ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा” पर आधारित एक काल्पनिक कथानक को अच्छी तरह से बुनाया है।
'पोखरण' की कहानी 1974 'स्माइलिंग बुद्ध' के परमाणु परीक्षणककी सफलता के इर्द-गिर्द घूमती है जिसने भारत को परमाणु शक्ति के रूप में विकसित करने में मदद की। पुस्तक मे पोखरण के निवासियों पर परमाणु परीक्षण के पतन के स्थायी प्रभाव को उजागर किया है, लेकिन यह मीडिया द्वारा पूरी तरह से अप्रमाणित था।
लेखक ने नायक, चैतन्य के माध्यम से इस सब के बारे में बात की है|
यह सबसे अच्छी किताबों में से एक है जिसे मैंने लंबे समय में पढ़ा है।
यह उन सभी के लिए अवश्य पढ़ें जो बहुत सारी भावनाओं और एक महान कथानक के साथ एक अच्छी कहानी पसंद करते हैं।
सब कुछ आसान और विस्तृत तरीके से समझाया गया है जो वाक्य संरचना को समझने पर जोर दिए बिना चीजों को समझने में मदद करता है और किताब पढ़ते समय उत्पादकता को उच्च बनाता है|
'पोखरण' की कहानी 1974 'स्माइलिंग बुद्ध' के परमाणु परीक्षणककी सफलता के इर्द-गिर्द घूमती है जिसने भारत को परमाणु शक्ति के रूप में विकसित करने में मदद की। पुस्तक मे पोखरण के निवासियों पर परमाणु परीक्षण के पतन के स्थायी प्रभाव को उजागर किया है, लेकिन यह मीडिया द्वारा पूरी तरह से अप्रमाणित था।
लेखक ने नायक, चैतन्य के माध्यम से इस सब के बारे में बात की है|
यह सबसे अच्छी किताबों में से एक है जिसे मैंने लंबे समय में पढ़ा है।
यह उन सभी के लिए अवश्य पढ़ें जो बहुत सारी भावनाओं और एक महान कथानक के साथ एक अच्छी कहानी पसंद करते हैं।
सब कुछ आसान और विस्तृत तरीके से समझाया गया है जो वाक्य संरचना को समझने पर जोर दिए बिना चीजों को समझने में मदद करता है और किताब पढ़ते समय उत्पादकता को उच्च बनाता है|
March 14, 2023
यह किताब 1974 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण पर आधारित है | परमाणु परीक्षण के माध्यम से यह पुस्तक आशा और आशावाद की भावना का भी प्रतिनिधित्व करती है, लेखक ने लैंगिक असमानता, सामाजिक असमानता और सांस्कृतिक और धार्मिक भेदभाव आदि जैसे विषयों को भी छुआ है। 💗
यह "स्माइलिंग बुद्धा" परियोजना के वैज्ञानिक संघर्षों का वर्णन करता है लेकिन एक अलग कहानी की मदद से| यह आपको अतीत की यात्रा में ले जाता है| ✨
आसपास रहने वाले लोगों के बच्चे रेडियोधर्मी तरंगों के कारण गंभीर विकृति या अक्षमताओं के साथ पैदा हुए थे | चैतन्य उनमें से एक थे| 😇
किताब में कई उतार-चढ़ाव हैं लेकिन आप हमेशा यह जानने में रुचि रखते हैं कि आगे क्या होता है| ✨
इसने इतिहास, राजनीति और कई सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों से के प्रति भी आवाज उठाई है| 😇
यह एक दिलचस्प पठन था| अगर आप हिंदी किताबें पढ़ने की कोशिश करना चाहते हैं तो मैं पूरी तरह से आप लोगों को इसे लेने की सलाह दूंग! कुछ शब्द लोगों को समझने में मुश्किल साबित हो सकते हैं! 😇
यह "स्माइलिंग बुद्धा" परियोजना के वैज्ञानिक संघर्षों का वर्णन करता है लेकिन एक अलग कहानी की मदद से| यह आपको अतीत की यात्रा में ले जाता है| ✨
आसपास रहने वाले लोगों के बच्चे रेडियोधर्मी तरंगों के कारण गंभीर विकृति या अक्षमताओं के साथ पैदा हुए थे | चैतन्य उनमें से एक थे| 😇
किताब में कई उतार-चढ़ाव हैं लेकिन आप हमेशा यह जानने में रुचि रखते हैं कि आगे क्या होता है| ✨
इसने इतिहास, राजनीति और कई सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों से के प्रति भी आवाज उठाई है| 😇
यह एक दिलचस्प पठन था| अगर आप हिंदी किताबें पढ़ने की कोशिश करना चाहते हैं तो मैं पूरी तरह से आप लोगों को इसे लेने की सलाह दूंग! कुछ शब्द लोगों को समझने में मुश्किल साबित हो सकते हैं! 😇
August 5, 2022
पोखरण एक ऐसी कहानी है जो एक सच्ची घटना के इर्द-गिर्द लिखी हुई है.
18 मई, 1974 में लाफिंग बुद्धा नाम की प्रसिद्ध परमाणु प्रयोग पोखरा में हुई थी जो राजस्थान में एक गांव है.
इस परमाणु प्रयोग का आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ा यह किताब उसी के बारे में है.
एक परमाणु प्रयोग जो राज और षड्यंत्र के लिए प्रसिद्ध है उसके नुकसान उन पोखरण के लोगों और निवासियों पर क्या असर किए इस किताब में दर्शाए गए हैं.
चैतन्य इस किताब का नायक है उन्हीं के जीवन के माध्यम से इस घटना की नकारात्मकता को पेश किया गया है.
यह किताब एक इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है कि किसी भी घटना का कितना गंभीर असर हो सकता है.
लेखक उदय सिंह ने अपने पात्रों को बड़ी कुशलता के साथ लिखा है और उनकी कहानी बहुत ही दिलचस्प और रोमांचक तरीके से लिखी गई है.
18 मई, 1974 में लाफिंग बुद्धा नाम की प्रसिद्ध परमाणु प्रयोग पोखरा में हुई थी जो राजस्थान में एक गांव है.
इस परमाणु प्रयोग का आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ा यह किताब उसी के बारे में है.
एक परमाणु प्रयोग जो राज और षड्यंत्र के लिए प्रसिद्ध है उसके नुकसान उन पोखरण के लोगों और निवासियों पर क्या असर किए इस किताब में दर्शाए गए हैं.
चैतन्य इस किताब का नायक है उन्हीं के जीवन के माध्यम से इस घटना की नकारात्मकता को पेश किया गया है.
यह किताब एक इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है कि किसी भी घटना का कितना गंभीर असर हो सकता है.
लेखक उदय सिंह ने अपने पात्रों को बड़ी कुशलता के साथ लिखा है और उनकी कहानी बहुत ही दिलचस्प और रोमांचक तरीके से लिखी गई है.
August 6, 2022
पोखरण किताब भारत के लाफिंग बुद्धा अभियान के इर्द गिर्द घूमती है| पोखरण किताब में आपकी मुलाकात होती है चैतन्य से, जो शारीरिक रूप से हम आप की तरह नहीं है, और यह शरीर पोखरण टेस्टिंग का नतीजा है।
पोखरण की कहानी बेशक प्रशंसनीय है, मैने इसके लेखन का भरपूर आनंद लिया| साथ ही यह एक रोमांचक पुस्तक भी थी, और मूझे इसकी लेखन शैली ने भी काफी लुभाया|
अगर आप इसी कहानी के तलाश में है जो आप पूरी तरीके से महसूस कर सके और पत्रों को समझ सके तो आपको बेशक इस किताब का चुनाव करना चाहिए। यह न ही केवल रोमांचक है पर दिल को भी याद रहने वाली कहानी है|
उदय सिंह ने सभी पत्रों को अलग ढंग से लिखा है, उन्होंने वाकई काफी अच्छी तरह उनकी कहानी लिखी और सोची हैं|
पोखरण की भाषा बिलकुल सरल है, अगर आप इसे एक बार पढ़ना शुरू कर दे, तो रखना मुश्किल होगा|
पोखरण की कहानी बेशक प्रशंसनीय है, मैने इसके लेखन का भरपूर आनंद लिया| साथ ही यह एक रोमांचक पुस्तक भी थी, और मूझे इसकी लेखन शैली ने भी काफी लुभाया|
अगर आप इसी कहानी के तलाश में है जो आप पूरी तरीके से महसूस कर सके और पत्रों को समझ सके तो आपको बेशक इस किताब का चुनाव करना चाहिए। यह न ही केवल रोमांचक है पर दिल को भी याद रहने वाली कहानी है|
उदय सिंह ने सभी पत्रों को अलग ढंग से लिखा है, उन्होंने वाकई काफी अच्छी तरह उनकी कहानी लिखी और सोची हैं|
पोखरण की भाषा बिलकुल सरल है, अगर आप इसे एक बार पढ़ना शुरू कर दे, तो रखना मुश्किल होगा|
August 23, 2022
'पोखरण' की कहानी 1974 'स्माइलिंग बुद्ध' के परमाणु परीक्षणककी सफलता के इर्द-गिर्द घूमती है जिसने भारत को परमाणु शक्ति के रूप में विकसित करने में मदद की। पुस्तक मे पोखरण के निवासियों पर परमाणु परीक्षण के पतन के स्थायी प्रभाव को उजागर किया है, लेकिन यह मीडिया द्वारा पूरी तरह से अप्रमाणित था। लेखक ने नायक, चैतन्य के माध्यम से इस सब के बारे में बात की है ,
जिन्होंने साजिश के पीछे की सच्चाई को उजागर करने की कोशिश की।
छिपे हुए सत्य के बारे में अधिक जानने के लिए पुस्तक पढ़ें।
पुस्तक का आवरण सरल है और शीर्षक पूरी तरह से उपयुक्त है। कहानी की अवधारणा यथार्थवादी है । लेखक ने समाज के कटु सत्य परमाणु प्रभाव, लिंग भेदभाव, शक्ति का दुरुपयोग, शरणार्थियों आदि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की है। कथन अच्छा है। पुस्तक का प्रवाह सुचारू है।
संक्षेप में, एक जानकारीपूर्ण कथानक।
जिन्होंने साजिश के पीछे की सच्चाई को उजागर करने की कोशिश की।
छिपे हुए सत्य के बारे में अधिक जानने के लिए पुस्तक पढ़ें।
पुस्तक का आवरण सरल है और शीर्षक पूरी तरह से उपयुक्त है। कहानी की अवधारणा यथार्थवादी है । लेखक ने समाज के कटु सत्य परमाणु प्रभाव, लिंग भेदभाव, शक्ति का दुरुपयोग, शरणार्थियों आदि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की है। कथन अच्छा है। पुस्तक का प्रवाह सुचारू है।
संक्षेप में, एक जानकारीपूर्ण कथानक।
March 12, 2023
भारत में परमाणु परिक्षण की जब भी बात की जाती है उसमें सबसे पहला ज़िक्र पोखरण का होता है | परिक्षण की सफलता के बारे में तो सब जानते हैं पर उसका प्रभाव वहां के स्थानीय लोगों पर कैसे पड़ा इस किताब के ज़रिये बताया गया है |
किताब में दिया गया विवरण काफी अविस्मरणीय है | कहानी में कई मोड़ है जिसका हम आनंद उठा सकते है |
सच्ची घटना पर आधारित यह किताब हमे पोखरण के लोगों की आप बीती और उनके हसूसलड के बारे में बताती है जिसमें उन्होंने न्याय के लिए हर ज़रूरी कदम उठाया |
लेखक ने बड़ी ख़ूबसूरती से कहानी का विवरण किया है जिससे हर वर्ग के लोग इसे पढ़ सकते हैं |कहानी का लेखन इतना प्रभावशाली है के इससे पढ़ने में हमारी दिलचस्पी हर मोड़ पर बढ़ते जाती है | कहानी का हर किरदार अद्भुत है और हर किरदार ने अपनी भूमिका बखूभी निभाई है |लेखक की बेहतरीन सोच इस किताब की सफलता कारण है |
किताब में दिया गया विवरण काफी अविस्मरणीय है | कहानी में कई मोड़ है जिसका हम आनंद उठा सकते है |
सच्ची घटना पर आधारित यह किताब हमे पोखरण के लोगों की आप बीती और उनके हसूसलड के बारे में बताती है जिसमें उन्होंने न्याय के लिए हर ज़रूरी कदम उठाया |
लेखक ने बड़ी ख़ूबसूरती से कहानी का विवरण किया है जिससे हर वर्ग के लोग इसे पढ़ सकते हैं |कहानी का लेखन इतना प्रभावशाली है के इससे पढ़ने में हमारी दिलचस्पी हर मोड़ पर बढ़ते जाती है | कहानी का हर किरदार अद्भुत है और हर किरदार ने अपनी भूमिका बखूभी निभाई है |लेखक की बेहतरीन सोच इस किताब की सफलता कारण है |
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