साल 2050; कलियुग की वह कहानी जिसकी रूपरेखा ‘महाविस्फोट’ (बिग बैंग) के समय ही लिख दी गयी थी। एक ऐसी घटना जो कलियुग को समय से पहले खत्म कर देगी। कलियुग को समय से पहले खत्म होने से बचाने के लिए जन्म होता है ब्रह्मांड के चार रक्षकों का। अपनी कमजोरियों और कमियों के साथ जन्में चार आम मानव , जो वास्तव में शिवांश हैं और उनकी कमियां ही उनकी विशेषताएं और उनकी ताकत है। इनका मुख्य उद्देश्य है - ब्रह्मांड की रक्षा करना ताकि सही वक्त आने पर ब्रह्मवाणी सत्य हो और विष्णु के दशावतार कल्कि का जन्म हो सके।
समीक्षा : अवतार (महारक्षकों का आगमन) उपन्यास (पार्ट 1) लेखक : अभिलाष दत्ता जी प्रकाशक : फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन प्रथम संस्करण : Nov. 2021 ____//___
हमारी पौराणिक कथाओं में जितनी कमाल के पात्र और घटनाएं है अगर उनको लेकर अलग से कोई यूनिवर्स शुरू किया जाए तो मुझे लगता है शायद वो वर्षों तक आगे बढ़ सकता है। हमारे उन्हीं सभी प्रचलित किरदारों को लेकर अभिलाष दत्ता जी ने अपनी अवतार श्रृंखला को जन्म दिया है जिसका पहला भाग मैंने हाल फिलहाल में पढ़कर समाप्त किया जिसका नाम है "महारक्षकों का आगमन" इसका अगला भाग भी आ चुका है जिसका नाम है " मतांगो का रहस्य " उसकी भी समीक्षा आपको जल्द ही पढ़ने को मिलेगी। फिलहाल हम बात कर रहे है अवतार श्रृंखला के पहले भाग की "महारक्षकों का आगमन" जिसके कहानी है आज से कुछ वर्षों बाद की धरती की जहां शिवांश के रूप में चार रक्षकों मृदंग, नीलोहित, विशालाक्षी और रुद्र के जरिए ब्राह्मण को बचाने की चुनौती उनकी प्रतिक्षा कर रही है जिनमें उनका साथ देने के लिए उन्हें सही मार्ग दिखाने के लिए 7 चिरंजीवी भी है इन सब के साथ कैसे वो ब्रह्माण्ड को बचा पाते भी है या नहीं इसी की कहानी है इस उपन्यास में। उपन्यास को दो मुख्य भागों में बांटा गया है जिसके पहले भाग में चारों महारक्षकों के अच्छे से सेटअप किया गया है उनके बारे में हमें सब कुछ जानने को मिलता है और कैसे उन्हें अपनी शक्तियां प्राप्त हुई उसका भी एक विस्तृत वर्णन मिलता है साथ ही चारों रक्षकों की आपस में कहानी किस तरह किसी है उस चीज को भी साथ साथ जुड़ता हुआ पढ़ते है हम पहले भाग में वही इसके दूसरे भाग "महायुद्ध" में हमें इस पूरी कहानी और इस मौजूद अलग अलग ब्रह्मांड के बारे में जानकारी मिलती है साथ ही ये सभी किरदारों के साथ कहानी एक बड़े महायुद्ध तक कैसे पहुंचती है ये देखने को मिलता है। महायुद्ध में कालशील के साथ चारों महारक्षकों का युद्ध किस अंत तक पहुंचता है और क्या वाकई वो अंतिम छोर होता है या नहीं इसके लिए आपकों इस उपन्यास को पढ़ना पड़ेगा। कहानी की बात करे तो कहानी और इसका संसार बहुत ज्यादा रोचक और चमत्कारों से भरा है आपकों इसे पढ़ते वक्त अपनी एक दुनिया बनाए रखने में जितना मजा आएगा उससे ज्यादा मज़ा तब आने लगेगा जब कुछ कुछ तथ्य जो लेखक ने सच्ची घटनाओं से इसमें जोड़े है उनको पढ़कर। लेखक अभिलाष दत्ता जी ने सभी रक्षकों को भरपूर वक्त लगाकर सेटअप किया है कहानी में और वो चीज आपकों अंत में महसूस होती भी है हां शुरुआत काफ़ी धीमी लगती है खासकर पहले अध्याय में जिसमें मृदंग की कहानी को बताने में कुछ क्रियाओं और अनजाने पात्रों का ज़िक्र बार बार आता है जिसकी वजह से थोड़ी बोरियत होने लगती है मगर नीलोहित की कहानी से जो रफ्तार पकड़ती है कितन वो अंत तक समा बंद देती है। सभी पात्रों में मुझे रुद्र और नीलोहित के किरदार पसंद आए खासकर नीलोहित के किरदर का हलाहल प्राप्त करने वाली दूसरे आयाम में जाकर , वो पूरा प्रकरण जबदस्त लगा, साथ ही रुद्र का भगवान विष्णु के साथ संवाद बढ़िया लगा। लेखन की बात करे तो लेखन वैसे तो पूरे उपन्यास में अच्छा है सरल शब्दों का उपयोग भी कहानी को पाठकों के साथ जोड़े रखता है मगर जहां पात्र आपस में एक दूसरे से संवाद करते है वहां रचनात्मकता की कमी महसूस होती है संवाद थोड़े सपाट से लगते है और बार बार एक ने ये कहां दूसरे ने जवाब दिया ये थोड़ा बोरियत भरता है बातचीत में ,ऐसा मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है। बाकी मैं तो इसके अगले भाग को पढ़ने के लिए उत्साहित हूं और उम्मीद है कुछ और नए रहस्यों से पर्दा उठे और ये कहानी आगे कहां जाती है ये देखने भी मज़ेदार रहेगा। अभिलाष दत्ता जी ने एक बेहतरीन श्रृंखला रची है उन्हें बधाई और शुभकामनाएं हमारी तरफ से। अगर आप भी फिक्शन और माइथोलॉजी से भरपुर रोचक पढ़ना चाह रहे है तो अभी इस किताब को ऑर्डर कर लीजिए यकीन मानिए निराश नहीं होंगे । फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन ऐसी कमाल की कहानियों को प्रकाशित कर रहा है और आपके लिए लाने का प्रयास कर रहा है इसके लिए उनकी तारीफ अलग से बनती है। आपको ये किताबें सभी ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएंगी आप वहां से इसे खरीदे और जरूर पढ़ें।