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हॉरर स्टोरीस

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डर, खौफ या भय एक ऐसा शब्द है जिससे हमारा सामना बचपन से होता रहा है। अँधेरे से डर, किसी अनजाने माहौल से डर, जंगली जीवों से डर और ऐसे ही कई असंख्य डरों से हमारा सामना होता रहा है। एक तरफ तो यह डर हमे कोई भी कार्य करने से रोकता है जिससे हमे नुकसान हो लेकिन वहीं दूसरी तरफ यह डर एक तरह के रोमांच का प्रसार भी हमारे भीतर करता है।

डर से पैदा होने वाले इस रोमांच के प्रति इसी आकर्षण के चलते चार दोस्त मिलकर जब भी कहीं बैठते हैं तो डरावने किस्सों को साझा करने लगते हैं, लोग डरावनी फिल्में देखने जाते हैं और सर्द रात्रि में अपने बिस्तर में दुबके हुए हॉरर कहानियाँ पढ़ने लगते हैं। ड्रेकुला हो या फिर बेताल इनकी जनमानस पर पकड़ देख आप हॉरर के प्रति मनुष्यों के आकर्षण का सहस अंदाजा लगा सकते हैं।

इसी तर्ज पर अर्चना पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित हॉरर स्टोरीज में ऐसी ही 8 हॉरर कहानियों को संग्रहित किया गया है।

हॉरर स्टोरीस में निम्न कहानियाँ मौजूद हैं:


सयाली - विकास नैनवाल
होंटेड हाईवे - अटल पैन्यूली
पीर बाबा का प्रेत - देवेन्द्र प्रसाद
रास्ता - गिरीश देवांगन
एक अतृप्त जिन्न - अनामिका रत्नेश दुबे
आगन्तुक - प्रज्ञा तिवारी
भूत की आत्मकथा - नृपेन्द्र शर्मा 'सागर'
राज़ - सुजीत कुमार

140 pages, Paperback

Published November 1, 2020

4 people want to read

About the author

Vikas Nainwal is a writer and translator who currently lives in Gurgram, Haryana. He writes in Hindi and translates English books into Hindi. His first story 'Kursidhar' (कुर्सीधार) was published in Uttaranchal Patrika in 2018. He hails from a town called Pauri in Uttarakhand.

विकास नैनवाल लेखक और अनुवादक हैं जो फिलहाल हरियाणा के गुरुग्राम में रहते हैं। वह हिंदी में लिखते हैं और अंग्रेजी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद भी करते हैं। उनकी पहली कहानी 'कुर्सीधार' उत्तरांचल पत्रिका में 2018 में प्रकाशित हुई थी। वह मूलतः उत्तराखंड के पौड़ी नाम के कस्बे के रहने वाले हैं।

email: nainwal.vikas@gmail.com

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