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Aanandmath

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आनन्दमठ' मूल बांग्ला भाषा का एक प्रसिद्ध राजनीतिक उपन्यास है जिसकी रचना बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने सन् 1882 में की थी। इस उपन्यास में उत्तर बंगाल में सन् 1773 के सन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया है। अंग्रेजों ने इस ग्रन्थ की लोक-प्रसिद्धि देखते हुए इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। लेकिन भारत के स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात सन् 1947 को इस पुस्तक पर से प्रतिबन्ध हटा लिया गया था।

इस पुस्तक में बंकिमचन्द चट्टोपाध्याय ने अप्रशिक्षित किन्तु अनुशासित सन्यासी सैनिकों की कल्पना की है जो अनुभवी ब्रिटिश सैनिकों से संघर्ष करते हैं और उन्हें पराजित करते हैं। इस कृति का भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम और क्रान्तिकारियों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। भारत का राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् इसी उपन्यì

103 pages, Kindle Edition

Published April 5, 2022

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January 21, 2026
1882 में रचित बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ‘ का भारतीय साहित्य में ही अप्रतिम स्थान नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्रवाद की वैचारिक संकल्पना को समझने के लिए भी वह एक जरूरी ग्रंथ बन गया है. लिहाजा एक सामान्य औपन्यासिक कृति की तरह इसका मूल्यांकन करना उन तमाम सवालों, सरोकारों, संशयों और ऊहापोह को दरकिनार करना होगा जो एक स्तर पर अपने युग से खाद-पानी लेकर लेखक के रचनात्मक व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, तो दूसरे स्तर पर संस्कृति की सघन संश्लिष्ट विकास-यात्रा में से सुविधानुसार महज एक धागा उठाकर ‘मनुष्य‘, ‘समाज‘ और ‘राष्ट्र-राज्य‘ को नए सिरे से परिभाषित करने का जतन करते हैं.
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