जयप्रकाश नारायण की कहानी आज़ादी से पूर्व और आज़ादी के बाद लगभग बराबर बँटी है। और इसलिए जे पी को समझना देश को समझने के लिए एक आवश्यक कड़ी है। अगस्त क्रांति के नायक जिनका जीवन एक क्रांतिकारी मार्क्सवादी से गुजरते हुए गांधीवाद और समाजवाद के मध्य लौटता है, और पुनः एक लोकतांत्रिक क्रांति के बीज बोता है। एक ऐसे नायक की कथा जिनके स्वप्न और यथार्थ के मध्य एक द्वंद्व रहा, और कहीं ना कहीं यह देश भी उसी द्वंद्व से आज तक गुजर रहा है।
जे पी नायक से लोकनायक तक की किताब को बेजोड़ लेखक प्रवीण कुमार झा ने इस खूबसूरती से लिखा है की आपको राजनीति में दिलचस्पी हो या न हो पर एक बार इस किताब को पढ़ना शुरू करेंगे तो पूरा पढ़ कर ही छोड़ेंगे। और मैं अपने शब्दों में कहूं की सत्ता की कुर्सी के बहुत पास रह कर भी जे पी नायक लोकनायक बने पर पर कोई पद की कभी इच्छा नहीं रखी ,ना ही कोई पद ग्रहण किया l यह पुस्तक स्पष्ट रूप से भारत की पूर्व और पिछली स्वतंत्रता की सामाजिक राजनीतिक गतिशीलता को संक्षेप में प्रस्तुत करती है। इससे यह भी पता चलता है और पता चलता है कि भारतीय राजनीति को किस मुकाम पर ले जाया गया है।
यदि आप भारत की स्वतंत्रता से पहले के आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद के भारत और उसकी राजनीति को बहुत कम शब्दों में और सरल भाषा में समझना चाहते हैं तो इस किताब को एक बार जरूर पढ़े। मैं तो कहूँगी की यह किताब आज के दौड़ते भागते समय के लिए उत्तम प्रस्तुति है। किताब दो भाग में बंटी हुईं हैं पहले भाग में आजादी मिलने तक 9 अध्याय दूसरे भाग में आजादी मिलने के बाद 13 अध्याय है अध्याय छोटे हैं और संक्षिप्त और सरल शब्दों का सहारा लेते हुए जे पी नारायण जी के पूरे जीवन को चित्रित करते हैं । जे पी नायक भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त क्रांति (quit India movement 1942 August Revolution) के नायक तो थे ही उन्होंने देश को आजादी की करवट बदलते देखा है। मार्क्सवाद के अपनाने के बाद समाजवाद मूलमंत्र को बढ़ावा देते हुए उन्होंने देश को एक नई दिशा देने की कोशिश की । उन्होंने देश को भ्रष्टाचार बेरोजगारी, महंगाई, मुक्त करने के अथक प्रयास किए।
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान मैं बिहार के रत्न जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति को जीवंत किया था । जे पी नायक के साथ हर लड़ाई में साथ कदवार नेता जैसे लालू प्रसाद यादव नीतीश कुमार ,रामविलास पासवान ,और सुशील कुमार मोदी आदि उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के कायकर्ता थे । उस दौर की राजनीति मैं इंदिरा गांधी जी को भी सिर्फ एक मात्र जे पी नारायण से ही खतरा था । उन ही की वजह से तब पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी । इस किताब में उस दौर को बहुत ही रोमांचक तरीके से पेश किया गया है।
Really great overview of the life of the great man! Growing up in Bihar, almost everyone had a story about him to tell, so atleast for me, a lot of the basic facts were known. But, for someone who doesn't know how crucial he was in both pre-independence and post-independence era, this is a must read.
I especially liked the way author has weaved other bigger events around JP ji's actions. A lot of his decisions and ideology was the product of the time and the social structure of India. That context setting, enhanced the experience of the narrative.
So far I'm my life I had heard the name of Loknayak J. P. and Lohiya. But didn't know anything about them. This book gave me lots of information about J. P. Narayan. The language is very easy and I read the book in one sitting only. I liked the way author tells the stories. Good one. Must read.
आज की तारीख में इतिहास और भारतीय राजनीति पर इतने कम शब्दों में लेकिन उतनी ही विस्तृत और मनोरंजक भाषा शैली में लिखी गयी बहुत कम किताबें है। लेखक को धन्यवाद।