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Chand Pagal Hai
राहत एक अरबी लफ़्ज है। इसका एक अर्थ आराम भी है, लेकिन राहत इन्दौरी ने इस आराम को बेआराम बनाकर अपनी शायरी की बुनियादें रखी हैं। उनके यहाँ ये बेआरामी जाती कम, कायनाती ज्यादा है। उनकी इस कायनात का रकबा काफी फैला हुआ है। इसमें मुल्की ग़म भी है और मुल्क के बाहर के सितम भी हैं। ऐसा नहीं है कि उनकी अपनी बातों से उनकी ग़ज़ल यहीं तक सीमित नहीं है। उनकी होशमंदी ने उन्हें जीते-जागते समाज का एक सदस्य बनाकर इस सीमित दायरे को फैलाया भी है और शायरी को अपने सामय का आईना भी बनाया है। इस आईने में जो परछाइयाँ चलती-फिरती नज़र आती हैं, वो ऐसा इतिहास रचती महसूस होती हैं, जो सामाजिक उतार-चढ़ाव में शरीक होकर आम लफ़्जों में ढली हैं। राहत इन्दौरी इतिहास को अपी ग़ज़लों के माध्यम से स्टेज पर अपनी ड्रामाई प्रस्तुति से सुनाते भी हैं और श्रोताओं को चौंकाते भी हैं।
- GenresPoetry
Unknown Binding
First published January 1, 2012
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Community Reviews
Displaying 1 - 6 of 6 reviews
November 30, 2023
देर शाम या रात को राहत इंदौरी जी की दो चार ग़ज़लें हो जाएं, तो पूरे दिन की थकान मिट जाती है. मन को सुकून भरी 'राहत' मिलती है.
जिस दिन 'नाराज़' पढ़ा था, तब से मंशा थी चाँद पागल है को चखने की.
हालांकी इन 117 ग़ज़लों के संग्रह में नाराज़ जितनी संजीदगी तो नहीं मिल पाई, अलबत्ता सभी ग़ज़लें वही इंदौरी जी के लहज़े एवं जुनून से प्रचुर थी.
जिस दिन 'नाराज़' पढ़ा था, तब से मंशा थी चाँद पागल है को चखने की.
हालांकी इन 117 ग़ज़लों के संग्रह में नाराज़ जितनी संजीदगी तो नहीं मिल पाई, अलबत्ता सभी ग़ज़लें वही इंदौरी जी के लहज़े एवं जुनून से प्रचुर थी.
September 1, 2021
शेर-ओ-शायरी के शौक़ीन लोगों के लिए राहत इंदौरी कोई अनजाना नाम नहीं है.. राहत साहब भारत के सबसे मशहूर-ओ-मारूफ़ शायरों में से एक हैं.. यूँ तो मैंने राहत साहब के कई मुशायरे सुने हैं, लेकिन 'चाँद पागल है' उनकी पहली किताब है जिसे पढ़ने का मुझे मौका मिला..
मुशायरों में उन्हें सुन चुके होने की वजह से इस किताब की कई ग़ज़लें मुझे पहले से मालूम थी, कुछ ज़बानी याद भी थीं; लेकिन फिर भी राहत साहब के शेरों को दोबारा, बार-बार, कई बार पढ़ने का मज़ा भी पहली बार जैसा ही है..
हालाँकि, राहत साहब की शायरी उनकी आवाज़ और उनके अंदाज़ में सुनने का जो मज़ा है वो पढ़ने में नहीं.. उनका वो अल्हड़पन, मुस्कराहट, तीखे व्यंग्य और गरजती हुई आवाज़ जैसे पढ़ते हुए मेरे कानों में गूँज रही थी.. पिछले साल इस कमाल के शायर ने इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन इन किताबों और अपने मुशायरों में अपना एक बेशकीमती हिस्सा हम जैसे शायरी के दीवानों के लिए छोड़ गए.. 'चाँद पागल है' उस पागल शायर का उनके दीवानों के नाम एक नायाब तोहफा है..!
मुशायरों में उन्हें सुन चुके होने की वजह से इस किताब की कई ग़ज़लें मुझे पहले से मालूम थी, कुछ ज़बानी याद भी थीं; लेकिन फिर भी राहत साहब के शेरों को दोबारा, बार-बार, कई बार पढ़ने का मज़ा भी पहली बार जैसा ही है..
हालाँकि, राहत साहब की शायरी उनकी आवाज़ और उनके अंदाज़ में सुनने का जो मज़ा है वो पढ़ने में नहीं.. उनका वो अल्हड़पन, मुस्कराहट, तीखे व्यंग्य और गरजती हुई आवाज़ जैसे पढ़ते हुए मेरे कानों में गूँज रही थी.. पिछले साल इस कमाल के शायर ने इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन इन किताबों और अपने मुशायरों में अपना एक बेशकीमती हिस्सा हम जैसे शायरी के दीवानों के लिए छोड़ गए.. 'चाँद पागल है' उस पागल शायर का उनके दीवानों के नाम एक नायाब तोहफा है..!
September 16, 2017
Poetry in book are great but most of them are same as his book Naraz. so didn't enjoy much
Read
October 15, 2022YES
Want to Read
July 14, 2017its good
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