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Shikhandi

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पितामह ने बड़े उत्साह से कहा, “तुम लोग जानते ही हो कि तुम्हारी सेना में मेरे वध के लिए कौन सबसे अधिक उत्कण्ठित है।" “शिखण्डी।” सारे पाण्डव सहमत थे। पितामह हँस पड़े, “अम्बा ने ही पुनर्जन्म लिया है। वह अन्तिम बार विदा होते हुए कह गयी थी कि वह उस जन्म में मेरी हत्या न कर पायी तो दूसरा जन्म लेगी। लगता है शिखण्डी के रूप में आयी है, नहीं तो मुझसे क्या इतनी शत्रुता है शिखण्डी की। पता नहीं यह उनकी शत्रुता है या प्यार है। प्रेम नहीं मिला तो शत्रुता पाल ली। कौन जाने लोहा-चुम्बक एक-दूसरे के शत्रु होते हैं या मित्र। किन्तु वे एक-दूसरे की ओर आकृष्ट अवश्य होते हैं। शिखण्डी मेरी ओर खिंच रहा है।... शिखण्डी या शिखण्डिनी।...” पितामह हँसे, “शिखण्डी को अनेक लोग आरम्भ में स्त्री ही मानते रहे हैं। मैं आज भी उसे स्त्री रूप ही मानता हूँ। लगता है कि कुछ देय है मेरी ओर। अम्बा को उसका देय नहीं दे पाया। शिखण्डिनी को दूँगा। उसकी कामना पूरी करूँगा। उसे कामनापूर्ति का वर देता हूँ।” “पर वह अम्बा नहीं है तात! वह शिखण्डी है, द्रुपद का पुत्र । महारथी शिखण्डी। वह शस्त्रधारी योद्धा है। वह आपका वध कर देगा।” भीम के मुख से जैसे अकस्मात ही निकला। “जानता हूँ।” भीष्म बोले, “तभी तो उसे कामनापूर्ति का वर दे रहा हूँ।" “यह तो आत्मवध है पितामह!” कृष्ण बोले। “नहीं! यह तो मेरी मुक्ति है वासुदेव ! स्वैच्छिक मुक्ति! मेरे पिता ने मुझे यही वर दिया था।” वे जैसे किसी और लोक से बोल रहे थे, “मैं जब कुरुवंश का नाश रोक नहीं सकता, तो इस जीवन रूपी बन्धन में बँधे रहने का प्रयोजन क्या है। मैं स्वेच्छा से मुक्त हो रहा हूँ।

240 pages, Hardcover

First published January 1, 2020

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About the author

Narendra Kohli

212 books106 followers
Padmashree Narendra Kohli is one of the most eminent and well-known Hindi writers of our times. His novel based on the Ram-Katha, Abhyuday, shifted the course of Hindi novel-writing. Another of his novels, Mahasamar, based on the Pandava-katha went on to become just as popular. His novel-series, Todo Kara Todo is considered the greatest and foremost novel in any language on the life of Swami Vivekananda. Abhigyan, Vasudev, Sharnam, Aatmaswikriti, Varunaputri, Sagar-Manthan, Ahalya etc. are his other well-known works. Apart from the Padmashree, he has also been awarded the Hindi Akademi award; Delhi Salaka Samman; Uttar Pradesh Hindi Sansthaan award; Pandit Deen Dayal Upadhyay Samman, Lucknow; K.K. Birla Foundation award; Vyasa Samman, New Delhi; Madhya Pradesh government and Bhopal’s Maithili Sharan Gupt Rashtriya Samman, among numerous other honours.

डॉ॰ नरेन्द्र कोहली (जन्म ६ जनवरी १९४०, निधन १७ अप्रैल २०२१, चैत्र शुक्ल पंचमी, नवरात्रि) प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार हैं। उन्होंने साहित्य के सभी प्रमुख विधाओं (यथा उपन्यास, व्यंग्य, नाटक, कहानी) एवं गौण विधाओं (यथा संस्मरण, निबंध, पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलाई है। उन्होंने शताधिक श्रेष्ठ ग्रंथों का सृजन किया है। हिन्दी साहित्य में 'महाकाव्यात्मक उपन्यास' की विधा को प्रारंभ करने का श्रेय नरेंद्र कोहली को ही जाता है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक सामाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना कोहली की अन्यतम विशेषता है। कोहलीजी सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है। जनवरी, २०१७ में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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Profile Image for Ujjwala Singhania.
221 reviews74 followers
May 26, 2021
नरेंद्र कोहली जी की रचित शिखण्डी, महाभारत की एक बहुत महत्वपूर्ण पात्र पर है जो भीष्मपितामह के मृत्यु का कारण बनता है I
ये कोहली जी का पहला उपन्यास है जो मैंने पढ़ा है I लेखक ने बड़ी ही कुशलतापूर्वक कहानी के द्वारा धर्म-अधर्म पर विवेचन किया है l क्या अम्बा का हठ्ठ धर्मपर्यन्त है या कामनासूचक I क्या भीष्म की प्रतिज्ञा स्वधर्म था या उसकी परीधी बड़ी थी। और यदि भीष्म परिस्थितियों के कारण अपनी प्रतिज्ञा भंग करते हैं तो उससे समाज और धर्म पर क्या असर पड़ेगा I
लेखक ने कुन्ती और धर्मराज के वार्तालाप से माँ और नारी के अन्तर को बहुत ही सुन्दरता से दर्शाया है I लेखक ने द्युत क्रीडा, युद्ध, भीष्म का अर्जुन के हाँथों बाणों की शैय्या पर लेटाना; इन सभी घटनाओं में धर्म क्या था और अधर्म के माने क्या है, न्याय संगत क्या है और अन्याय की परिभाषा क्या,
इस पर पाठकों को सोचने के लिए प्रोत्साहित किया है l
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