देश सेवा में निरन्तर तत्पर कवि चंदन कुमार नित्यप्रति उत्पन्न समस्याओं से आहत हैं: यथा- अलगाववाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, बलात्कार, प्रदुषण का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव, नेताओं की स्वार्थपरता, जाति का राजनीतिकरण, धार्मिक उन्माद, प्रेम का बदलता स्वरूप, तलाक आदि, ऐसे अनेक पहलुओ एवं घटनाओ को अपने काव्य का विषय बनाया है और हम देश वासियो को "देश-दशा " पुस्तक के माध्यम से चिंतन हेतु झकझोरा है| राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त जी ने भारत-भारती में कहा था- " हम कौन थे, क्या हो गये और क्या होंगे अभी, आओ विचारे आज मिलकर, ये समस्यायें सभी|"