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Satya Vyas Satya Vyas > Quotes

 

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“ब्याह औरतों से आँगन छीनता है और व्यापार मर्दों से गाँव.”
Satya Vyas, Chaurasi/चौरासी/84
“त्रासदी यह है कि प्रेम हर मज़हब का एक अंग है जबकि इसे ख़ुद ही एक मज़हब होना था.”
Satya Vyas, Chaurasi/चौरासी/84
“मूर्खताओं की एक परिणति प्रेम और प्रेम की एक परिणति मूर्खता भी है.”
Satya Vyas, Chaurasi/चौरासी/84
“बात बिगाड़े तीन; अगर मगर लेकिन।”
Satya Vyas, बनारस टॉकीज [Banaras Talkies]
“मनु ने सीखा कि मुस्कुराहटें सीधी याददाश्त में घर बना लेती हैं। उन्हें रटकर ज़ेहन में बिठाना नहीं पड़ता।”
Satya Vyas, Chaurasi/चौरासी/84
“बाप की खटिया टूटी, बेटा पिए फ्रूटी।”
Satya Vyas, बनारस टॉकीज [Banaras Talkies]
“प्रेम के मसले दरअसल, प्रेम तक ही सीमित होते हैं। दुनियावी बवालों, सियासती अहवालों और मज़हबी सवालों से प्रेमी अछूते ही रहते हैं। हरियाणा, पंजाब को जल दे, न दे यह इनकी समस्या नहीं होती। इन्हें एकांत जगह नहीं मिले तो यह इनकी समस्या है। अलग राज्य बने न बने यह सियासतदाँ जाने। यह तो बस इतना जानते हैं कि इलाही इन्हें अलग न करें। त्रासदी यह है कि प्रेम हर मज़हब का एक अंग है जबकि इसे ख़ुद ही एक मज़हब होना था।”
Satya Vyas, Chaurasi/चौरासी/84
“और बेटी! जिसे कहना पड़ता था कि ‘अब चुप कर!’ न जाने कितने दिनों से अब बोल ही नहीं रही। दिन में ऊँघते पंखे को देखती और रात में रौशनदान में चाँद के उतर आने का इंतजार करती रहती है। बेटी जो अब किसी के भी चिल्लाने से यह सोचकर काँप उठती है कि गुस्से का कारण वह ही है। बेटी जो माँ को आँचल के किनारे से आँसू पोंछते देखती तो है मगर उठकर आँसू पोछ नहीं पाती। उसे झिड़क दिए जाने का डर है।”
Satya Vyas, Baaghi Ballia । बाग़ी बलिया
“कभी-कभी मन न चाहते हुए भी यह मानने को बाध्य हो जाता है कि बुरा वक्त वाकई ग्रहों-नक्षत्रों से संचालित होता है। चीजें सही चलते-चलते अचानक ही गलत होने लगती हैं और यह समस्याएँ एक-एक कर नहीं बल्कि एकसाथ आकर व्यक्ति के मनोबल पर प्रहार करती हैं और यूँ करती हैं कि वह व्यक्ति स्वयं भी स्वयं को भाग्य के हाथ की कठपुतली समझने लगता है।”
Satya Vyas, Baaghi Ballia । बाग़ी बलिया
“माँ, जिसे दोनों ही ओर से पिसना होता है। पति को इज्जत की खातिर पल-पल कुढ़ते देखने को शापित औरत बेटी को तिल-तिल मरते भी देख ही लेती है।”
Satya Vyas, Baaghi Ballia । बाग़ी बलिया
“अरे खा लो। यह ब्रेड है। किसान का समाजवाद, मजदूर का साम्यवाद और मालिक का पूँजीवाद सब तो इसी में हैं। खा लो।”
Satya Vyas, Baaghi Ballia । बाग़ी बलिया
“अपना-अपना नसीब है भाई! कुछ लोग जिंदगी भर दूसरों की सिस्टर सेट करते हैं और कुछ लोग जिंदगी भर दूसरों का बिस्तर सेट करते हैं।”
Satya Vyas, Dilli Darbaar
“ब्याह औरतों से आँगन छीनता है और व्यापार मर्दों से गाँव।”
Satya Vyas, Chaurasi/चौरासी/84

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