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“ये मन भी अजीब जंतु है। शरीर की दशा-दिशा, हालत-मकसद, ताकत-आदत और सीमाओं का कभी ख्याल नहीं रखता। शरीर होता कहीं है और मन शरीर को लिए कहीं और जाता है। मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ते मन सबसे पापी हो सकता है और किसी का गला रेतते हुए यही जटिल मन गंगास्नान-से भाव में डूबा हो सकता है। ब”
― Neela Scarf
― Neela Scarf
“पहले परिवार कई और तरह से ‘कम्पलीट’ हुआ करते थे । अब न्यूक्लियर फैमिली के इस ज़माने में सारे मुद्दे बड़े हो गई हैं– पेरेन्टिंग, टीनएज, युवावस्था, करियर, शादी में लड़ाई और शादी बचाने की लड़ाई, बच्चे, तलाक़, तलाक़ के पहले और बाद के मसले, फाइनेन्शियल सेक्युरिटी, घर, गाड़ी, इंश्योरेंस, फ्यूचर... सबकुछ । जितनी आर्थिक ताक़त बढ़ी है, उतनी ही असुरक्षा भी बढ़ी है । प्रति व्यक्ति आमदनी और प्रति व्यक्ति संपत्ति, दोनों में इजाफा हुआ है । लेकिन तनाव और इच्छाएँ, दोनों बढ़ी हैं । अपार्टमेंट्स हम सबसे पास हो गए हैं, घर सिमट गए हैं ।”
― Mamma Ki Diary
― Mamma Ki Diary




