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Sanjay Choubey Sanjay Choubey > Quotes

 

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“अंधकार को दूर करने के लिए अँधेरे से लड़ने की कोई जरुरत नहीं होती; बस रोशनी लानी होती है और जब लड़ाई नहीं होगी तो मन में कोई अवसाद नहीं होगा. साथ ही जब कोई लड़ाई ही नहीं रहेगी तो किसी के पक्ष में खड़े होने, विपक्ष में रहने या मूक साक्षी बने रहने से क्या फर्क पड़ता है. रोशनी लाने हेतु जिस दीप को जलाया जाता है, वह दीप जलता रहता है....”
Sanjay Choubey, 9 November
“लक्ष्य चाहे लाख उत्तम हो उसे प्राप्त करने के लिए गलत रास्ते नहीं अपनाने चाहिए. गलत तरीके से प्राप्त उत्तम लक्ष्य भी दूषित हुए बिना नहीं रह सकता.”
Sanjay Choubey, 9 November
“और एक बात जो पहले कही थी – परेशान मत हुआ करो.... समय कभी भी कम नहीं होता. तुम्हें तुम्हारे हिस्से का समय जरुर मिलेगा !”
Sanjay Choubey, 9 November
“दमयंती जी, पहाड़ी दिल के सच्चे और अक्ल के खोटे. अब इस अक्ल के खोटे को नमकीन चाय पिला दीजिये.’ ​शर्माती हुई दमयंती ने कहा था, “आप अक्ल के खोटे क्यों होंगे, अक्ल के खोटे तो हम जैसे पहाड़ी होते हैं.” थोड़ी देर की नोक-झोक में पता नहीं चला और लोलाब घाटी की रूमानी हवाओं का जादू चल गया, जिसमें अक्ल के खोटे व दिल के सच्चे दो पहाड़ी खो गये. ​दोनों पहाड़ी पौने दो महीने लोलाब घाटी में खोये रहे.”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne
“पच्चीस साल के एक नौजवान को लोगों ने बाबा कहना शुरू कर दिया था क्योंकि उस नौजवान की विशालता में लोगों ने अपना आश्रय ढूंढा था. समय के साथ अपनी विशालता और दूसरों को आश्रय देने के अहंकार ने उसे ‘मालिक’ बना दिया, उसे पता भी नहीं चला.”
Sanjay Choubey, 9 November
“और इज्ज़त भी कमाल की चीज है!
उसके छोड़ जाने मात्र से लुट जायेगी, यह मालूम नहीं था,”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne
“दिल्ली में बैठी आयरन लेडी के सख्त मिजाज से घाटी में संदेह और अविश्वास की हवा बह रही थी. स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उसने अपने आस्मानी दूतों के कमाल से घाटी का मुख्यमंत्री बदल दिया और देखते ही देखते वर्तमान इतिहास से मिलकर कुछ ऐसी चालें चलने लगा कि बर्फीली घाटी गरमाने लगी. ​लेकिन इन सबसे बेखबर घाटी में चिनार के पत्ते अपने निराले अंदाज में जमीन पर गिर रहे थे. ऐसे में भारत की आयरन लेडी, जिसे अपनी मौत का अंदेशा हो चला था, को चिनार ने पतझड़ के मौसम में बुलावा भेजा और वह अपने को रोक नहीं पायी. उसे बताया गया था कि ‘हालात ठीक नहीं हैं’, लेकिन उसने अपनी आदतानुसार किसी की नहीं सुनी और 27 अक्टूबर, 1984 की सुबह अपने पोते व पोती के संग लोलाब घाटी से सौ-सवा सौ किलोमीटर दूर श्रीनगर पहुँची.”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne
“अन्दर झाँक कर देखो कहीं यह तुम्हारी पराजय की टीस तो नहीं है. तुम्हारा अहंकार कि केवल तुम सही हो और बाकी सब गलत – इसी अहंकार को पहुँचे ठेस का दर्द तो नहीं.” “बाबा”
Sanjay Choubey, 9 November
“एक और बात याद रखना. वही परिवर्तन स्थायी होता है जिसकी खबर भी न लगे, जैसे बच्चे का जवान और जवान व्यक्ति का बूढ़ा हो जाना. बच्चे को खबर भी नहीं होती और बच्चा बचपन छोड़ बड़ा हो चुका होता है. समाज में स्थायी परिवर्तन भी ऐसे ही होता है. रातो – रात बदलाव की कोशिश में ऐसे ही मासूमों के खून बहते हैं और क्रांति धरी की धरी रह जाती है.”
Sanjay Choubey, 9 November
“मोहम्मद नदीम लोन, तुमने अल्लाह व उसके रसूल की तौहीन की है.” ​“तुम्हारी इतनी मजाल कि तुम एक काफिर के बच्चे को नबी कहो. हिमाकत देखो तुम उसे नया नबी कह रहे हो.” ​“मोहम्मद नदीम लोन, तुमने कुफ्र किया है. तुम्हे सजा मिलनी चाहिए.” ​बूढा नदीम लोन गरम होता है, ‘क्या बेवकूफी है. जुबान से कुछ निकला नहीं कि उसे मजहब से जोड़ देते हो. ऐसा क्या कह दिया मैंने कि कुफ्र हो गया.’ फिर वह थोड़ा ठंडा होता है और सफाई देता है, ‘अरे तुम सब मेरे बच्चों की तरह हो, बच्चों में नबी दिखते हैं मुझे. तुम भी बूढ़े हो जाओगे और जब इन आँखों से दिखना कम हो जायेगा, तो मासूम बच्चों में तुम्हें खुदा का अक्स दिखेगा, नबी दिखेंगे.’ ​बूढा”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne
“तेज - ​बिस्मिल्लाहि र-रहमानि र-रहीम ​अल हम्दु लिल्लाहि रब्बि ल-आलमीन ​अर रहमानि र-रहीम ​मालिकि यौमि द-दीन ​इय्याक न'आबुदु व इय्याक नस्त'ईन ​इह्दिन स-सिरात अल-मुस्तक़ीम ​सिरात अल-लादीना अन'अमता अलैहिम ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम वलद दाल्लीन”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne
“इसी बीच 1987 का चुनावी मौसम आया. कहते हैं दिल्ली के इशारे पर धाँधली हुई और दिल्ली के प्यादे को रियासत की कमान सौंप दी गयी. ​इसी के साथ शिकायतों को अल्लाह की जुबान मिली और अल्लाह के टाइगर्स को एक गज़ब का खिलौना, जिसे अल्लाह की बजाय मिखाइल कलाश्निकोव ने बनाया था. इस”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne
“गैबीनाथ महादेव, एक सौ पांच किलोमीटर की नंगे पांव यात्रा और जाह्णु मुनि जिन्होंने एक ही घूँट में पूरी गंगा को निगल लिया था. भागीरथ के बहुत अनुनय विनय पर गंगा जाह्णु मुनि के जांघ से निकलती और इसी वजह से गंगा जाहन्वी भी कहलाती है.”
Sanjay Choubey, 9 November
“लोलाब घाटी के चमन में खिले नए फूल से मोहम्मद नदीम लोन नदीम व ख़ादिम होने की बात कर रहे थे, चिनार के मोहपाश में बंधी भारत की आयरन लेडी श्रीनगर में पतझड़ का आनंद ले रही थी. उसने शंकराचार्य पहाड़ी पर स्थित मंदिर के दर्शन किये; वह कश्मीरी शैव संत लक्ष्मण जू से मिली और कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी शारिका माँ के मंदिर गई. जबतक यहाँ रही बड़ी प्रसन्न दिखी, मौत के अंदेशे के बावजूद, शायद चिनार का जादू था. ​इसके बाद राजनीति के अखाड़े में या कि लोगों के बीच वापस लौटते हुए वह भुवनेश्वर में खड़ी थी, जहाँ उसके पिता को पहली बार दिल का दौरा पड़ा था, जहाँ लोगों ने कभी उसपर पत्थरबाजी की थी और उसकी नाक टूट गयी थी. भले ही अँधेरा हो चुका था, लोग प्रतीक्षा में थे कि वह कुछ कहे और उसने कहा – ​“.... मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को मजबूत करने के काम आएगा.”
Sanjay Choubey, Betarteeb Panne

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Sanjay Choubey
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9 November (Hindi Edition) 9 November
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Awsaan Nikat Hai (अवसान निकट है) Awsaan Nikat Hai
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