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Start by following Rajeev Saxena.
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“और मकान जैसी जीवन की बुनियादी जरूरत में ही उलझे हैं। जीवन को बेहतर बनाने में दिन-रात परिश्रम करते हैं। तो क्या साँस”
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
“आखिर चेतन के तार अवचेतन से जुड़ते कैसे हैं? मोटे तौर पर तीन अवस्थाओं में यह तार जुड़ते हैं—पहली, जब चेतन मन लगातार किसी चीज का अभ्यास, अध्ययन कर रहा हो। दूसरी, जब कुछ करना उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन गया हो, यानी सबसे बड़ी प्राथमिकता हो। तीसरी, जब चेतन मन किसी विषय-वस्तु में रस ले रहा हो, उसे उसमें आनंद अनुभव हो रहा हो।”
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
“का अर्थ ही यही है कि आपने खुद के अस्तित्व को परमात्मा से अलग समझ लिया है। जबकि आप उससे अलग नहीं हैं। दो नहीं हैं। बस एक ही हैं। बस इतनी छोटी सी बात है, लेकिन हमारा मन हमारी समझ के आड़े आ जाता है। इसलिए हम नहीं समझते।”
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
“दरअसल, खो जाने के दौरान ही मन को विश्राम मिलता है। और मन का विश्राम ही आनंद का दूसरा नाम है।”
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
“राजसी वैभव से महात्मा बुद्ध का मन तृप्त हो गया होता तो वे महलों के सुख छोड़कर जंगल में क्यों भटकते?”
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
“जिस जगह जाकर आपका जीवंत मन ठहर जाए, समझ लीजिए कि परमात्मा निकट आ गया।”
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
― Saans Ke Rahasya - Jo Chahein, So Paayein
“यह हमारी चेतना के सात अलग आयाम होते हैं। यह 7 चक्र हमारे स्थूल शरीर का संचालन तो करते हैं, लेकिन यह हमारे स्थूल शरीर में नहीं होते, बल्कि यह एक अलग आयाम, जीवात्मा जगत या आत्मिक जगत से जुड़े होते हैं।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“जीवात्मा जगत की अन्य जीवात्माएँ भी सूक्ष्म शरीर के ज़रिए हमारे मन को प्रभावित करती रहती हैं।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“सूक्ष्म शरीर, तीन कोषों (प्राणमय कोष, मनोमय कोष और विज्ञानमय कोष) से जुड़ा होता है। जबकि कारण शरीर, आनन्दमय कोष से जुड़ा होता है। आनन्द के क्षणों का अनुभव कारण शरीर को ही होता है, क्यूँकि इससे बिल्कुल सटी हुई, इसके ठीक पीछे, शुद्ध चैतन्य आत्मा होती है, जिसे परमानन्द कहते हैं।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“जिसकी चेतना पाँचवें शरीर तक सीमित रही है, उसे पुनर्जन्म लेना पड़ता है। लेकिन छठे शरीर को प्राप्त व्यक्ति स्थूल शरीर त्यागकर भी जब तक चाहे, तब तक आत्मिक जगत में सक्रिय रहकर जगत के कल्याण का कार्य करता रह सकता है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“हम जो कुछ भी हैं, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी चेतना के कारण ही होते हैं। उसके बिना हमारा कोई अस्तित्व नहीं।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“ईश्वर है मन के पार और हम उसे ढूँढते हैं मन के द्वार”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“अनुभव के संग्रह से चेतना और शरीर के बीच जीव भी आ गया। फिर जीव को जितनी बार जीवन मिला, तब के सारे अनुभव को वह संग्रह करता गया,”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“सूक्ष्म शरीर के मूल में होता तो कारण शरीर ही है, लेकिन उसका काम सिर्फ़ अनुभूति करना होता है। आनंद या दुःख का अनुभव कारण शरीर को ही होता है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“महल बनाने से जितनी ख़ुशी नहीं मिलती, उससे हज़ार गुना दुःख उन महलों के खंडहर होने पर होता है। अगर दुःख से बचना है, तो उतनी ही इच्छा करिए, जो जीवन के लिए ज़रूरी है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“श्रेष्ठ आत्मा जो स्वेच्छा से या अन्य किसी कारण से मोक्ष को धारण नहीं करती, वे देवता हैं। ऐसी आत्माओं को अपने योग्य मनुष्य शरीर प्राप्त करना कठिन कार्य होता है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“वाक़ई उस सत्य की खोज है, जिसे ईश्वर कहते हैं, तो आपको (सुषुम्ना नाड़ी) के माध्यम से साधना करना चाहिए।”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“देवताओं का स्थूल शरीर नहीं होता। उनका शरीर तीन तत्वों का होता है, आकाश, अग्नि और वायु। जबकि स्थूल शरीर के लिए पृथ्वी और जल तत्व की भी आवश्यकता होती”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“शून्य मन की अवस्था’ कहा जा सकता है। यानी हमारे मन की झील में जब किसी भी विचार की कोई लहर न उठे। झील पूरी तरह शांत हो तो वह दर्पण जैसी बन जाती है। उस दर्पण में जो दिखता है, वह उससे बहुत भिन्न होता है, जिसका अनुभव हम अपनी आँखों से कुछ देखकर कर रहे होते हैं। पर”
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
― Dhyan - Kitna Mushkil Kitna Aasaan
“बुद्धि बाहरी दुनियाँ से इतना अधिक प्रभावित होती गयी कि भीतर मौजूद अपनी चेतना के अनुभव को भूलते चले गये। मन का काम सिर्फ़ बाहरी जगत तक ही केंद्रित हो गया। बस, यही वजह है, जिसके चलते आज हम अपने मूल स्रोत शुद्ध चेतना की अनुभूति नहीं कर पाते। हमारा मूल शुद्ध चेतना यानी आत्मा ही है। यह बात हम शास्त्रों में तो पढ़ लेते हैं। लेकिन इसका अनुभव नहीं कर पाते।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“चौथा अनाहत चक्र है, जो मनस शरीर से जुड़ा होता है। इस चक्र के कारण व्यक्ति पूर्व जन्मों की इच्छाओं और इस जन्म की इच्छाओं को जोड़कर, उनमें जो भी इच्छा प्रबल होती है, उसके अनुरूप ही भविष्य बनाने की कल्पना करने लगता है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“किसी चीज़ में इतने डूब जाते हैं कि कुछ क्षणों के लिए हम अपने होने को ही भुला सकें, तो हमें आनन्द मिलता है। और जिस हद तक खुद को भुला सकेंगे, उतना ही आनन्द। खुद को भुलाने का अर्थ ही है,”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“विचार तो मन प्रस्तुत करता है, लेकिन उन विचारों के पीछे मूल में कोई न कोई भाव होता है। यह भाव संग्रहित रहते हैं चित्त में और सूक्ष्म शरीर चित्त से लेकर इन भावों का उपयोग अपनी इच्छा पूर्ति के लिए करता है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“वह अनुभव हमारा सूक्ष्म शरीर करता है। इसीलिए सपने हमें हक़ीक़त में कुछ घटित होने जैसा अनुभव कराते हैं, न कि किसी याद जैसा।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“आप अमल करते हैं उस विचार पर जो मन के साथ आपको बुद्धि भी करने को बोलती है। जैसे ही आप किसी विचार पर अमल करने के लिए कोई भी क्रिया करते हैं, वह फ़ौरन कर्म बन जाता है। और कर्म हुआ नहीं कि उसका फल आना निश्चित है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“चेतना के विकास से मनुष्य के भीतर मन का निर्माण हुआ, वही मन फिर चेतना तक पहुँचने में बाधा बन गया।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“सर्वव्यापी चेतना से बताया गया है। अस्मि का अर्थ ब्रह्म और आत्मा दोनों के एकाकार हो जाने से है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“भाव उठते हैं चित्त से। पूर्व जन्मों की अतृप्त इच्छाएँ ही भाव के रूप में बलवती होकर इस जन्म में हमारी इच्छाओं को जन्म देती हैं।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“मूलाधार चक्र में पृथ्वी तत्व प्रधान होता है। साँस में पृथ्वी तत्व चलने से ही काम वासना और वीर्य उत्पन होता है। पृथ्वी तत्व में ही यदि साधना की जाये, तो ऊर्जा विपरीत दिशा में यानी ऊपर के चक्रों की ओर प्रवाहित होने लगती है। मूलाधार का बीजमंत्र लाम होता है। इस मंत्र की ध्वनि इस चक्र की रुकावटों को दूर करने में सहायक होती है।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
“आख़िर हमें अपनी चेतना की अनुभूति क्यों नहीं हो पाती? ज़रा सा भी ग़ौर करेंगे, तो बात समझना बेहद आसान है। चेतना है हमारे भीतर और जिस चीज़ से हम यह अनुभूति करना चाहते हैं, वह है हमारा मन, जिसका काम ही है हमें बाहर की ओर ले जाना।”
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya
― Kahan Pahunche Aap?: Jeevatma Jagat Aur 7 Chakron Ki Yatra Ke Rahasya




