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“ज्ञान, कर्तव्य और विज्ञान से भी बढ़कर है प्राणिमात्र के प्रति संवेदनाओं की अनुभूति; संवेदना के आधार पर ही सत असत् का निर्धारण होता है।”
― Bolo gangaputra
― Bolo gangaputra
“सत्य को उसी रूप में देखने का प्रयास करना चाहिए जिस रूप में वह विद्यमान है। आने वाले समय में असंख्य लोग असंख्य सत्य होने की बात करेंगे। सत्य, वस्तुनिष्ठ न होकर व्यक्तिनिष्ठ हो जाएगा। सत्य के सनातन प्रवाह के स्थान पर किसी व्यक्ति को सत्य का प्रवर्तक मानकर उसके द्वारा तय किये गये मापदंडों पर चलने के कारण सम्पूर्ण विश्व अशांत रहेगा”
― Bolo gangaputra
― Bolo gangaputra




