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“आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ”
―
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ”
―
“दो दिन मिले उधार में, घाटे के व्यापार में, क्षण-क्षण का हिसाब जोड़ूँ या पूँजी शेष लुटाऊँ मैं? राह कौन-सी जाऊँ मैं?”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“दाँव पर सबकुछ लगा है, रुक नहीं सकते। टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“To those who try to reach
The throne of power
Over mounds of dead bodies
Of innocent children
Old women
Young men,
I have a question:
Did nothing bind them
To those who died?
- Power”
― Twenty-One Poems
The throne of power
Over mounds of dead bodies
Of innocent children
Old women
Young men,
I have a question:
Did nothing bind them
To those who died?
- Power”
― Twenty-One Poems
“टू टे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर, पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर, झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ। गीत नया गाता हूँ। टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी? अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी। हार नही मानूँगा, रार नई ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ। गीत नया गाता हूँ।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“आदमी की पहचान, उसके धन या आसन से नहीं होती, उसके मन से होती है। मन की फकीरी पर कुबेर की संपदा भी रोती है।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“भारत-पाकिस्तान पड़ोसी, साथ-साथ रहना है, प्यार करें या वार करें, दोनों को ही सहना है, तीन बार लड़ चुके लड़ाई, कितना महँगा सौदा, रूसी बम हो या अमेरिकी, खून एक बहना है। जो हम पर गुजरी बच्चों के संग न होने देंगे। जंग न होने देंगे।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“प्रखर प्यार से वंचित यौवन, नीरवता से मुखरित मधुवन, पर-हित अर्पित अपना तन-मन, जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“My lord!
Do not place me so high,
That I cannot embrace
Those who are not my own.
- Never Place Me So High”
― Twenty-One Poems
Do not place me so high,
That I cannot embrace
Those who are not my own.
- Never Place Me So High”
― Twenty-One Poems
“हरी-हरी दूब पर ओस की बूँदें अभी थीं, अब नहीं हैं। ऐसी खुशियाँ जो हमेशा हमारा साथ दें कभी नहीं थीं, कभी नहीं हैं। क्वार की कोख से फूटा बाल सूर्य, जब पूरब की गोद में पाँव फैलाने लगा, तो मेरी बगीची का पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा, मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूँ या उसके ताप से भाप बनी, ओस की बूँदों को ढूँढ़ूँ? सूर्य एक सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता मगर ओस भी तो एक सच्चाई है यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है क्यों न मैं क्षण-क्षण को जीऊँ? कण-कण में बिखरे सौंदर्य को पीऊँ? सूर्य तो फिर भी उगेगा, धूप तो फिर भी खिलेगी, लेकिन मेरी बगीची की हरी-हरी दूब पर, ओस की बूँद हर मौसम में नहीं मिलेगी।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“मन हारकर, मैदान नहीं जीते जाते, न मैदान जीतने से मन ही जीते जाते हैं।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.”
―
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.”
―
“बिखरा शीशे-सा शहर, अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ, गीत नहीं गाता हूँ। पीठ में छुरी-सा चाँद, राहु गया रेखा फाँद, मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ, गीत नहीं गाता हूँ।”
― Kya Khoya kya Paya
― Kya Khoya kya Paya
“पाँच दशकों से अधिक राजनीतिक यात्रा के बाद भी देश की बँटी हुई राजनीति को जोड़ने की आवश्यकता स्पष्ट दिखाई देती है। जो केवल सत्ता के लिए नहीं अपितु विघटनकारी शक्तियों से लोहा लेकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के काम में आगे बढ़ सकें, उनके लिए ऐसे मंच की सार्थकता सदैव रहेगी।”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ
“बाद मुद्दत के मिले हैं दिवाने, कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने.
खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने.”
―
खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने.”
―
“जन्म-मरण का अविरत फेरा, जीवन बंजारों का डेरा, आज यहाँ, कल कहाँ कूच है, कौन जानता, किधर सवेरा, अँधियारा आकाश असीमित, प्राणों के पंखों को तौलें। अपने ही मन से कुछ बोलें!”
― चुनी हुई कविताएँ
― चुनी हुई कविताएँ

![मेरी इक्यावन कविताएँ [Merī ikyāvana kavitāem̐] मेरी इक्यावन कविताएँ [Merī ikyāvana kavitāem̐]](https://i.gr-assets.com/images/S/compressed.photo.goodreads.com/books/1603581460l/17668382._SX98_.jpg)


