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“इंसान ने हार और जीत में इतना ज़्यादा अंतर पैदा कर दिया है कि वे जीवन का हिस्सा न होकर एक जीवन हो चुके हैं । जीत स्वर्ग तो हार नरक हो चुकी है ।
किताब : कॉलेज के ठीक बाद”
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किताब : कॉलेज के ठीक बाद”
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“इश्क में रोना उतना ही जायज है जितना कि हँसना । यहाँ न आँसू छिपते हैं न हँसी । किताब : कॉलेज के ठीक बाद , लेखक : सुभाष वर्मा”
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“संघर्ष कभी हारता नहीं, या तो वह जीतता है या संघर्ष रहता है।”
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“दौड़ना मनुष्य के लिए नया नहीं है। ख़ुद को खोजना नया है। ख़ुद को खोज पाना जीवन को सार्थक करता है और तुम यह कर सकते हो। किताब : कॉलेज के ठीक बाद ,”
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