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“दिल खुश हुआ है मस्जिदे वीरान देखकर
चलो मेरी तरह खुदा का भी खाना खराब है।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
चलो मेरी तरह खुदा का भी खाना खराब है।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
“एजुकेशन कम्ज़ बट विज़डम लिंगर्ज़।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
“तब मैंने कात्यायनी की यह कविता पंक्ति नहीं पढ़ी थी: सारी वासनाएँ दुष्ट नहीं होतीं।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
“दिल नाउम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
लंबी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
“निर्मल: चुग्गा लाइए। पक्षियों को डालिए। उन्हें चुगते देखेंगे तो अंदर के रिक्त स्थान भरने शुरू हो जाएँगे। पत्तों पर पड़ती सूर्य किरणों के कारण....रंग देखिए। सैर को जाइए। मन के स्टोर रूम में आवाजें जमा हो जाएँगी।......आवाजें शब्दों का रूप धारण कर लेंगी।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
“एक चुप-सौ सुख।”
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा
― Maine Mandu Nahin Dekha/ मैंने मांडू नहीं देखा




