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Pradeep Pandit Pradeep Pandit > Quotes

 

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“एक सिपाही से ज्यादा किसान हूँ। वास्तव में मैं दुःखद स्थिति में मिलिटरी में आया था; लेकिन बिना आनंद लिये मैंने इसे नहीं छोड़ा।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“हम शिष्टता से बचा लें या क्षुद्रता से वंचित हो जाएँ धरती की अंतिम सर्वश्रेष्ठ उम्मीद!!”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“उन्होंने कहा कि वे बचपन में दो बड़े कद्दू अपने घोड़े पर लादकर ले जाते थे, ताकि दोनों तरफ वजन बराबर रहे और वे घोड़े की सवारी आराम से कर सकें। यही उन्होंने काबीना के लिए भी किया। दो धुर विरोधियों को उसमें जगह दी। इसलिए नहीं कि वे अपने विचार लिंकन पर थोपते रहें, बल्कि इसलिए कि वे लिंकन प्रशासन को बेहतर तरीके से चलाने में उनकी मदद करते रहें।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“लिंकन नियाग्रा प्रपात देखने गए और उससे बहुत प्रभावित हुए। उनके मन में इसी तरह ताजगी और शक्ति की आकांक्षा के कुसुम पल्लवित हो गए। एक ऐसी आकांक्षा, जो तमाम जद्दोजहद के बाद भी आपकी ताकत को कम नहीं होने देती। ऐसी आकांक्षा जिसका अनंत अमिय कभी खत्म नहीं होता—निरंतर अपनी निष्ठा, गति और संकल्प के साथ बहता रहता है। ऐसी आकांक्षा, जो अपने लक्ष्य को लेकर बदलती नहीं, सिर्फ उसकी ओर बढ़ती रहती है।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“Bhakti, it is believed, are of two varieties – one, that of a traditionalist who follows holy scriptures and two, that of one whose sole route to the Lord is his selfless love. It is accepted that there are five ways pujas are performed. The first is calm meditation, the one followed by hermits. The second is complete surrender to the Lord. The third is acceptance of the Lord as your sakha (friend). The fourth is vatsalya, where the devotee considers himself as a child and the Lord as his guardian. The fifth form of puja is madhurya, where the Lord and the devotee are seen as lovers.”
Pradeep Pandit, The Life and Times of Ramakrishna Parmahamsa by Pradeep Pandit: Delving into the Life of Ramakrishna Parmahamsa
“केलसी की इस सामर्थ्य ने पहली बार लिंकन को बताया कि अनंत सौंदर्य होता क्या है। भावनाओं का उद्रेक ज्वार कैसे बनता है? शेक्सपियर ने अब्राहम लिंकन से श्रद्धा ली और बर्न्स ने उनका प्रेम जीत लिया। शायद इसलिए भी कि बर्न्स लिंकन की तरह गरीब था।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“लिंकन कहते थे कि मैं सिर्फ इतना चाहता हूँ कि यदि तुम उन्हें नापसंद करते हो तो उन्हें अकेला छोड़ दो। ईश्वर ने उन्हें थोड़ा दिया है तो उन्हें थोड़े का आनंद उठाने दो। उनके पास जीवन, स्वतंत्रता और सुखोपभोग का अधिकार तो किसी भी दूसरे आदमी से कम नहीं है। डगलस कहने लगे कि लिंकन चाहते हैं कि गोरों को नीग्रो से वैवाहिक संबंध बनाने चाहिए। सभी गोरों को चाहिए कि वे कालों का न सिर्फ आलिंगन करें, बल्कि उन्हें अपने घर में जगह भी दें। लिंकन ने इसका कई स्थानों पर खंडन किया। उन्होंने कहा कि मैं कह रहा हूँ कि काले लोगों को दास नहीं बनाया जाना चाहिए तो इसका आशय यह नहीं है कि मैं यह कह रहा हूँ कि नीग्रो स्त्री से वैवाहिक संबंध बनाने चाहिए। हमारे यहाँ पर्याप्त गोरे पुरुष हैं, जो गोरी स्त्रियों से विवाह कर सकते हैं और उनके यहाँ भी पर्याप्त नीग्रो हैं, जो नीग्रो महिलाओं के साथ घर बसा सकते हैं। ईश्वर के लिए उन्हें ऐसा करने दीजिए। करीब”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“लिंकन पहुँचे ही नहीं। ली समर्पण कर चुका था। ऐसे में बूथ का मानना था कि अब लिंकन के अपहरण का कोई तुक नहीं है। अब तो उन्हें गोली ही मारनी चाहिए। 14 अपै्रल, 1865 को गुडफ्राइडे था। लिंकन फोर्ड थिएटर जाने को उद्यत थे। मैरी लिंकन के सिर में दर्द था, फिर भी वे लिंकन के कहने से जाने को तैयार हो गईं। लिंकन के सुरक्षा प्रमुख लेमन रिचमौंड चले थे; मगर वे जाते हुए लिंकन से थिएटर न जाने की गुजारिश कर गए थे। लिंकन और उनके साथ के कुछ लोग करीब 8.30 बजे थिएटर पहुँचे। नाटक शुरू हो चुका था। दर्शक बार-बार उस बॉक्स को देख रहे थे, जहाँ लिंकन और ग्रांट को बैठना था। दरअसल, टिकट से पहले ही यह घोषणा हो गई थी कि राष्ट्रपति और ग्रांट आने वाले हैं। इसी कारण एक डॉलर का टिकट ढाई डॉलर में बिका था। राष्ट्रपति के पहुँचते ही कुछ क्षणों के लिए नाटक रोककर 'प्रमुखों का स्वागत है' धुन बजाई गई।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“वे लगातार इसमें लगे रहे कि विजय कहीं है तो उसे यहीं होना होगा। असफलता और पराजय लिंकन के लिए नए अनुभव नहीं थे; लेकिन वे हर बार नई विजय के संकल्प के साथ अपने को तैयार कर लेते थे। अंतिम विजय में जीत के प्रति उनका विश्वास कभी डिगा नहीं। यानी उन्हें लगता था कि ऐसी विजय कहीं है ही नहीं, जो उनसे अपनी सगाई तोड़ ले। उस दौर में भी जब सेना बिखराव झेल रही थी, पराजय के दंश झेल रही थी, लिंकन स्वयं सैनिकों से व्यक्तिगत रूप से मिले, 'गॉड ब्लेस यू' उनकी जुबाँ पर होता था और हाथ सैनिक के हाथ में। स्पर्श की इस कीमिया से लिंकन ने अमरीकी सेना में पुरजोर विश्वास रोपा, उनके साथ बैठकर खाया-पिया और सुनहरे कल की बातें कीं। उनके वाक्यों में सपना होता, शब्दों में अक्षत विश्वास। इस सबसे लिंकन का विजय अभियान आरंभ हुआ।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“घृणा एक संक्रामक रोग की तरह”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“His absolute faith in becoming one with God was based on the tripartite principle of devotion, knowledge and love.”
Pradeep Pandit, The Life and Times of Ramakrishna Parmahamsa by Pradeep Pandit: Delving into the Life of Ramakrishna Parmahamsa
“Yes indeed, I have seen Him. I see Him as I see you here, only more clearly. God can be seen. One can talk to Him. But who cares for God? People shed torrents of tears for their wives, children, wealth, and property, but who weeps for the vision of God? If one cries sincerely for God, one can surely see Him.”
Pradeep Pandit, The Life and Times of Ramakrishna Parmahamsa by Pradeep Pandit: Delving into the Life of Ramakrishna Parmahamsa
“लिंकन ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पहली प्राथमिकता युद्ध जीतना है। नागरिक अधिकारों का मसला इसके बाद आता है। उन्होंने कहा कि देश का भाग्य यदि दाँव पर लगा हो तो नागरिक अधिकारों का सम्मान करना गौण हो जाता है और उसे गौण हो जाना चाहिए। इस युद्ध को उन्होंने लोकतंत्र और लोकतंत्र की रक्षा करनेवाला लोकयुद्ध बताया। एक ऐसा लोकतंत्र जो जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए है।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“अब्राहम ने बेंजामिन फे्रंकलिन की आत्मकथा और जॉर्ज वाशिंगटन की जीवनी पढ़ डाली। इसके अलावा लिंकन सबसे ज्यादा इतिहास की एक पुस्तक से प्रभावित हुए। वह पुस्तक थी 'संयुक्त राज्य का इतिहास'। ग्रीमशा की लिखी वह पुस्तक अमरीका की खोज और फ्लोरिडा के विलय का विवरणात्मक इतिहास व्यक्त करती है। इस पुस्तक से लिंकन उतने ही प्रभावित थे, जितने रस्किन की पुस्तक 'अन टु द लास्ट' से महात्मा गांधी।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln
“लिंकन ने प्रकरण का गहराई से अध्ययन किया और अदालत के सामने प्रभावशाली ढंग से अपनी दलील रखी। इसका असर हुआ और कोर्ट ने जैक आर्मस्ट्रांग को रिहा कर दिया। इसके एवज में आभार मानते हुए श्रीमती आर्मस्ट्रांग ने लिंकन से 50 एकड़ जमीन लेने की प्रार्थना की। उसने कहा कि उसके पास लिंकन को देने के लिए और कुछ नहीं है। इस पर लिंकन ने कहा कि आंटी, वह भी वक्त था, जब मेरे पास पहनने लायक कपड़े भी नहीं थे। आप लोगों ने बचपन में कितनी मदद की। मैं आपका ऋणी हूँ। किसी भी तरह से उस अहसान का बदला नहीं चुका सकता। मुझे माफ करें। मैं आपसे एक भी पैसा नहीं ले सकता। और उन्होंने लाख मिन्नतों के बाद भी कोई शुल्क नहीं लिया।”
Pradeep Pandit, Abraham Lincoln

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