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“In history there are no permanent Heroes. Roles keep reversing with time.”
― Kashmir aur Kashmiri Pandit
― Kashmir aur Kashmiri Pandit
“इतिहास का सबसे बड़ा सबक यही है कि हम उससे कोई सबक नहीं सीखते।”
― Kashmirnama
― Kashmirnama
“दो नारे उत्कीर्ण किये गए, पहला—‘दुनिया के मज़दूरों एक हो’ और दूसरा—‘अभी तक दार्शनिकों ने भिन्न-भिन्न तरीकों से दुनिया की व्याख्या की है, सवाल दुनिया को बदलने का है।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“माता-पिता का ख़याल रखने के लिए एलीनोर अपनी नौकरी छोड़कर घर लौटीं तो पाया कि आर्थिक मुश्किलात के विदा होते ही अब रोगों ने मार्क्स परिवार में घर जमा लिया था। जीवन भर मार्क्स का साथ देने वाली जेनी भी अब थक रही थीं। जेनी के बारे में एंगेल्स ने लिखा है, ‘वह अपने पति के भाग्य, उनके प्रयत्नों और संघर्ष के दुःख-सुख को ही नहीं बाँटती थीं बल्कि पूरी चेतना और प्रबल उमंग के साथ उनकी सभी कार्यवाहियों में हिस्सेदारी करती थीं। उन्हें कैंसर ने अपनी चपेट में ले लिया था।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“उन्होंने सैद्धांतिक विज्ञान के क्षेत्रों में नई खोजों का स्वागत किया जिनकी व्यावहारिक क्रिया की समझ शायद अभी तक असम्भव रही थी।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“भौतिकवादी प्रणाली ने परिवर्तनशील विश्व की परिचालक शक्ति को एक स्थाई अपरिवर्तनशील भौतिक कारक की तलाश करने की कोशिश की। उन्हें यह शक्ति मिली ‘परमाणु’ के रूप में, जो पदार्थों का मूलतत्व था, अविनाशी था, स्थाई था और भौतिक जगत का था। यह कोई नई चीज़ नहीं था। याद कीजिए ग्रीक दार्शनिक एपीक्यूरस का ज़िक्र करते हुए हम पिछले अध्यायों में इस पर बात कर चुके हैं। भारतीय दर्शन में भी वैशेषिक पद्धति के दार्शनिक कणाद भी सूक्ष्म परिमाण वाले कण ‘परमाणु’ को सृष्टि के निर्माण की ईंटें मानते थे।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“सिद्धांत उसी हद तक प्रामाणिक हैं जिस हद तक वे प्रकृति तथा इतिहास के अनुरूप होते हैं।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“श्रम सारी सम्पदाओं का स्रोत है। वास्तव में यह वह स्रोत है, जो प्रकृति द्वारा आपूर्ति की गयीं चीज़ों को सम्पदा में बदल देता है। लेकिन यह इसके अलावा भी बहुत ज़्यादा कुछ है। यह सभी तरह के मानवीय अस्तित्व के लिए प्राथमिक मूल आवश्यकता”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“मालिक ख़ुद काम न करे और श्रमिकों द्वारा उत्पादित माल के विनिमय सहित सारे निर्णय लेने का अधिकारी हो तो वह ‘पूँजीवादी वस्तु उत्पादन’ कहा जाएगा।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“ढहती हुई सामंती सत्ताओं के लिए ‘श्रद्धापूर्ण विश्वास, शान्ति और संयम’ से बड़ा सहारा और क्या हो सकता था? लेकिन दार्शनिक बहस में अब इन भावोच्छ्वासों का कोई असर नहीं हो सकता था। जिन विचारों का समय आ गया था उन्हें अब रोका नहीं जा सकता था। भौतिकवादी विचार इस दौर में अपनी जड़ें जमाने लगे थे। वे अब पहले की तुलना में अधिक आक्रामकता के साथ सामने आये। भाववादी दार्शनिकों के विपरीत ये भौतिकवादी दार्शनिक मानते थे कि वास्तविक भौतिक जगत में परिवर्तनों के कारण भौतिक होते हैं और वे अगम्य नहीं होते बल्कि मानव बुद्धि से व्याख्यायित किये जा सकते हैं।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“डोगरा शासक ने इसे एक बड़ी राशि के बदले अंग्रेज़ों से एक समझौते के तहत हासिल किया था और इस तरह उस दौर में कश्मीर एक तरफ़ डोगरा शासकों की लूट का चारागाह बना तो दूसरी तरफ़ औपनिवेशिक भारत का एक ऐसा हिस्सा जिसका शासक अपने वादे के अनुसार सदा अंग्रेज़ों का स्वामिभक्त बना रहा।”
― Kashmirnama
― Kashmirnama
“हेगेल के लिए मानव मस्तिष्क की जीवन प्रक्रिया यानी चिंतन की प्रक्रिया, जिसे विचार के नाम से उन्होंने एक स्वतंत्र कर्ता बना डाला है, वास्तविक संसार का सृजन करने वाली है। इसके उलट मेरे लिए विचार इसके सिवा और कुछ नहीं है कि भौतिक संसार मानव मस्तिष्क में प्रतिबिम्बित होता है और चिंतन के रूपों में बदल जाता है।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“परजीविता का जीवन जीने वाले मालिक़ान को यह सुविधा भी मिली कि अपने ख़ाली समय में वे ज्ञान-विज्ञान, कला और दर्शन का विकास कर सकें। इसी दौर में गणित का विकास हुआ, विज्ञान का विकास होना शुरू हुआ और कला, स्थापत्य, खेल तथा दर्शन का भी।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“विचार मनुष्य की सामाजिक अवस्थिति के परिणाम होते हैं और लोगों के विश्वास उनकी भौतिक तथा सामाजिक परिस्थितियों से ही आकार लेते हैं,”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“यह केवल शत्रु को जानने का ही मामला नहीं था, इसका असली उद्देश्य पूँजीवादी व्यवस्था की परिचालक शक्तियों को तथा इस विकास से पैदा होने वाले अंतर्विरोध तथा तनावों को समझना था”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“सिद्धित्रयी”
― Kashmirnama
― Kashmirnama
“किसी भी राजनैतिक-सामाजिक व्यवस्था में संस्कृति उस व्यवस्था की उत्पाद होती है। राजा-महाराजाओं के काल में जो संस्कृति थी, वह आधुनिक युग में नहीं है।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“बुर्ज़ुआ सेना की जगह ‘सशस्त्र जन’, जनता की सेना ने ले ली। बुर्ज़ुआ जनतंत्र को एक ऐसे प्रत्यक्ष जनतंत्र से प्रतिस्थापित कर दिया गया जिसमें सभी प्रतिनिधियों को तुरंत ही उनके पद से हटाकर नए चुनाव कराए जा सकते थे”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“एक कुत्ते को अगर मैं रोटी दूँगा तो वह रात भर मेरी रखवाली करेगा ताकि मैं शान्ति से इबादत कर सकूँगा लेकिन अगर मैं अपनी बीवी और बच्चे को रोटी दूँगा तो वे मुझे भक्ति के पथ से दूर करने की कोशिश करेंगे!”
― Kashmirnama
― Kashmirnama
“योरप में हुई पूँजीवादी क्रांतियों के बाद दुनिया भर में हालात इतनी तेज़ी से बने-बिगड़े-बदले कि उनके मूल में अवस्थित कारणों की पहचान भविष्य में क्रांतिकारी परिवर्तनों के लिए संघर्ष हेतु ज़रूरी समझदारी बन गयी और मार्क्स ‘समाज के विज्ञान को भौतिकवादी आधार के अनुकूल बनाने और उस आधार पर उसका पुनर्निर्माण करने’86 के कायल हो गए।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“आपातकाल की महान रणनीतियाँ सामान्य स्थितियों में लागू नहीं हो सकीं। अर्थव्यवस्थाएँ पिछड़ने लगीं, उत्पादन प्रणालियाँ विफल हुईं, अकर्मक सामाजिक तथा गैर जनतांत्रिक राजनैतिक प्रणालियाँ उभरीं और इन सबने महान समाजवादी देशों को भीतर से खोखला कर दिया।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
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“अली की परम्परा के इमामों में सबसे प्रमुख नाम जफ़र अल सादिक़ का है, शिया उन्हीं अहदीस को प्रामाणिक मानते हैं जिन्हें जफ़र स्वीकृति देते हैं। हालाँकि उनका सम्मान सुन्नी भी करते हैं और फ़िक्ह के मामलात में उनके कहे को प्रामाणिक मानते हैं। सूफ़ी भी जफ़र की शिक्षाओं का बेहद सम्मान करते हैं।”
― Kashmirnama
― Kashmirnama
“सर बुरीदां पेश इन संगीन दिलां गुलचिदान अस1 (पत्थर दिल अफ़ग़ानों के लिए सिर काट देना वैसे ही है जैसे बागीचे से फूल तोड़ लेना।)”
― Kashmirnama
― Kashmirnama
“मार्क्स के लिए यह मनुष्यों के बीच के सम्बन्धों का अध्ययन है।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“मार्क्स की पुत्री एलिनार मार्क्स ने”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“उसका ‘परमतत्व’, मन और भौतिक तत्व (जिन्हें वह अलग-अलग नहीं बल्कि परमतत्व के आत्मप्रकाश के एक ही प्रवाह के दो अभिन्न अंग मानता था) थे तो भौतिक तत्व से सम्बद्ध उसके परमतत्व को भी स्थिर नहीं, चलायमान ही होना था। इस गति के कारण के रूप में उसने ‘द्वंद्व’ या ‘अंतर्विरोध’ की पहचान की। उदाहरण के लिए अणु था जिसमें धनात्मक प्रोटॉन और ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन होते हैं और गति इन विरोधी अवयवों की आपसी अंतर्क्रिया से होती है। ऊपर दिए गए उद्धरण में गर्भ के सन्दर्भ में भी हमने यह देखा।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“पूँजीवाद के भूमंडलीय व्यवस्था के रूप में कार्य करने तथा समय के साथ इसके विकास के रास्ते को समझाना या जैसा कि वे कहते हैं इसकी ‘गतिकी के नियम’ का रहस्योद्घाटन करना था। लेकिन बात सिर्फ़ इतनी सी नहीं है। समस्या यह है कि जो सतह पर दिखाई देता है, हो सकता है कि वह असल में व्यवस्था की आंतरिक परिचालक शक्ति न हो,”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“सामंतवाद को अंतिम शिकस्त देकर जो पूँजीपति वर्ग सत्ता में आया, उसका नारा था ‘स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“अस्मितामूलक पहचानों”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
“इस दृष्टिकोण की निजी विशेषता है ‘अनेकान्तवाद’ (non-absolutism) जो किसी भी प्रकार के चरमपंथ को स्वीकार नहीं करता। यह एक प्रयास था उपनिषद्-स्वीकृत तथा बौद्ध-स्वीकृत मंतव्यों के बीच का रास्ता निकालने का। इस रूप में जैन प्रणाली ने चरम वास्तविकता को नित्य और शाश्वत दोनों ही माना। यही ‘स्यादवाद’ का मूल है, जो स्यात अर्थात् ‘हो सकता है’ से निकला है।”
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant
― Marxvaad Ke Moolbhoot Siddhant





