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Ravi Prakash
Goodreads Author
Born
in India
Genre
Influences
Member Since
December 2017
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Ravi’s Recent Updates
“Life has no remote....get up and change it yourself!”
― Operation Einstein
― Operation Einstein
“If you want your children to be intelligent, read them fairy tales. If you want them to be more intelligent, read them more fairy tales.”
―
―
“तुच्छ है राज्य क्या है केशव?
पाता क्या नर कर प्राप्त विभव?
चिंता प्रभूत, अत्यल्प हास,
कुछ चाकचिक्य, कुछ क्षण विलास |
पर वह भी यहीं गँवाना है,
कुछ साथ नहीं ले जाना है |
'मुझसे मनुष्य जो होते हैं,
कंचन का भार न ढोते हैं,
पाते हैं धन बिखराने को,
लाते हैं रतन लुटाने को |
जग से न कभी कुछ लेते हैं,
दान ही हृदय का देते हैं |
'प्रासादों के कनकाभ शिखर,
होते कबूतरों के ही घर,
महलों में गरुड़ ना होता है,
कंचन पर कभी न सोता है |
बसता वह कहीं पहाड़ों में,
शैलों की फटी दरारों में |
'होकर समृद्धि-सुख के अधीन,
मानव होता नित तप: क्षीण,
सत्ता, किरीट, मणिमय आसन,
करते मनुष्य का तेज-हरण.
नर विभव हेतु लालचाता है,
पर वही मनुज को खाता है |
'चाँदनी, पुष्प-छाया में पल,
नर भले बने सुमधुर, कोमल,
पर अमृत क्लेश का पिये बिना,
आतप अंधड़ में जिये बिना,
वह पुरुष नहीं कहला सकता,
विघ्नों को नहीं हिला सकता |
'उड़ते जो झंझावतों में,
पीते जो वारि प्रपातों में,
सारा आकाश अयन जिनका,
विषधर भुजंग भोजन जिनका,
वे ही फणिबंध छुड़ाते हैं,
धरती का हृदय जुड़ाते हैं |
'मैं गरुड़ कृष्ण ! मैं पक्षिराज,
सिर पर ना चाहिए मुझे ताज |
दुर्योधन पर है विपद घोर,
सकता न किसी विधि उसे छोड़,
रण-खेत पाटना है मुझको,
अहिपाश काटना है मुझको”
― रश्मिरथी
पाता क्या नर कर प्राप्त विभव?
चिंता प्रभूत, अत्यल्प हास,
कुछ चाकचिक्य, कुछ क्षण विलास |
पर वह भी यहीं गँवाना है,
कुछ साथ नहीं ले जाना है |
'मुझसे मनुष्य जो होते हैं,
कंचन का भार न ढोते हैं,
पाते हैं धन बिखराने को,
लाते हैं रतन लुटाने को |
जग से न कभी कुछ लेते हैं,
दान ही हृदय का देते हैं |
'प्रासादों के कनकाभ शिखर,
होते कबूतरों के ही घर,
महलों में गरुड़ ना होता है,
कंचन पर कभी न सोता है |
बसता वह कहीं पहाड़ों में,
शैलों की फटी दरारों में |
'होकर समृद्धि-सुख के अधीन,
मानव होता नित तप: क्षीण,
सत्ता, किरीट, मणिमय आसन,
करते मनुष्य का तेज-हरण.
नर विभव हेतु लालचाता है,
पर वही मनुज को खाता है |
'चाँदनी, पुष्प-छाया में पल,
नर भले बने सुमधुर, कोमल,
पर अमृत क्लेश का पिये बिना,
आतप अंधड़ में जिये बिना,
वह पुरुष नहीं कहला सकता,
विघ्नों को नहीं हिला सकता |
'उड़ते जो झंझावतों में,
पीते जो वारि प्रपातों में,
सारा आकाश अयन जिनका,
विषधर भुजंग भोजन जिनका,
वे ही फणिबंध छुड़ाते हैं,
धरती का हृदय जुड़ाते हैं |
'मैं गरुड़ कृष्ण ! मैं पक्षिराज,
सिर पर ना चाहिए मुझे ताज |
दुर्योधन पर है विपद घोर,
सकता न किसी विधि उसे छोड़,
रण-खेत पाटना है मुझको,
अहिपाश काटना है मुझको”
― रश्मिरथी
World, Writing, Wealth
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Friends, would you care to partake in a learned discussion of current events, the global economy, writing, selling, film, and reading? Then gift us wi ...more
The History Book Club
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"Interested in history - then you have found the right group". The History Book Club is the largest history and nonfiction group on Goodread ...more
Indian Readers
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"For Indians /non Indians/Earthlings/Aliens, who have a zeal to read and are passionate about books" says the Creator of this group :) To add to it, ...more








































