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Indian Philosophy
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प्रवरा रूपी शक्ति आज कल्याण रूपी शिव को ढूँढ रही थी, जिसके संग से पूर्ण अर्द्धनारीश्वर सा चमत्कार प्रकट होने वाला था। वही अर्द्धनारीश्वर तत्त्व जिसके पूर्ण अभाव से पुरुष एक शक्तिशाली यंत्र मात्र बन जाता है और स्त्री मात्र एक सजीली वस्तु, पौरुष मात्र अहंकार बन जाता है और स्त्रीत्व मात्र प्रदर्शन। एक मानवीय स्वतंत्रता का दमन करने लगता है तथा दूसरे की स्वतंत्रता स्वच्छंदता में परिवर्तित होने लगती है। इसी तत्व के अभाव में रावण और सूर्पनखा का जन्म होता है। ये दोनों असंतुलित ऊर्जाएँ उन्मुक्ततता का रूप
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”
― त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह
― त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह
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Spirituality is not about 'the doings' but 'the living'. Once chosen, one ought to follow it 24x7 endlessly to be spiritual.
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”
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![A History of Indian Philosophy [5 Volume Set]](https://i.gr-assets.com/images/S/compressed.photo.goodreads.com/books/1327782959l/4434766.jpg)



















