Puneeta > Puneeta's Quotes

Showing 1-1 of 1
sort by

  • #1
    “सुबह-ए-बनारस थी शाम-ए-अवध थी साँय-साँय करती शब-ए-सहरा थी और इस देश की दोपहरें पसीने और ख़ून से लथपथ और कोलतार की तरह पिघली हुई थीं!”
    Krishna Kalpit, Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha



Rss