“सुनो, जिसे हम पीड़ा कहते हैं, उसका जीने या मरने से कोई सम्बन्ध नहीं। उसका धागा प्रेम से जुड़ा होता है, वह खिंचता है, तो दर्द की लहर उठती है, ‘अगर तुम मुझे चाहते हो’, उसने कहा था। मुझे लगता है, उसका विश्वास ईश्वर में नहीं, मुझमें था”
―
Nirmal Verma,
अन्तिम अरण्य