Mayank Shakya > Mayank's Quotes

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  • #1
    Ramdhari Singh 'Dinkar'
    “दो न्याय अगर तो आधा दो,

    पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
    तो दे दो केवल पाँच ग्राम,

    रक्खो अपनी धरती तमाम।
    हम वहीं खुशी से खायेंगे,

    परिजन पर असि न उठायेंगे!


    दुर्योधन वह भी दे ना सका,

    आशिष समाज की ले न सका,
    उलटे, हरि को बाँधने चला,

    जो था असाध्य, साधने चला।
    जन नाश मनुज पर छाता है,

    पहले विवेक मर जाता है।


    हरि ने भीषण हुंकार किया,

    अपना स्वरूप-विस्तार किया,
    डगमग-डगमग दिग्गज डोले,

    भगवान् कुपित होकर बोले-
    'जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,

    हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।


    यह देख, गगन मुझमें लय है,

    यह देख, पवन मुझमें लय है,
    मुझमें विलीन झंकार सकल,

    मुझमें लय है संसार सकल।
    अमरत्व फूलता है मुझमें,

    संहार झूलता है मुझमें।”
    Ramdhari Singh Dinkar, रश्मिरथी

  • #2
    Kamleshwar
    “तहजीब के तहत इन्सान फिर भी एक दुसरे के लिए सहिष्णु और एक होने कि कोशिश में कामयाब हो सकता है, लेकिन इंसान का ईश्वर कभी एक नहीं हो सकता !”
    Kamleshwar, कितने पाकिस्तान

  • #3
    Prabhavananda
    “The little space within the heart is as great as the vast universe.
    The heavens and the earth are there, and the sun and the moon and the stars. Fire and lightening and winds are there, and all that now is and all that is not.”
    Swami Prabhavananda, The Upanishads: Breath from the Eternal



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