Aditya Kumar > Aditya's Quotes

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    Dinesh Gupta
    “मेरी उम्मीद का सागर कुछ यूँ छूटा है......................................
    कि हर ज़र्रे-ज़र्रे ने हमको लूटा है.............................................
    कश्तियाँ सारी डूब गयी किनारों तक आते-आते........................
    होसला जो कुछ भी बचा था तूफानों में, किनारों पर आकर टूटा है”
    Dinesh Gupta 'Din'



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