* Title: कुंती: महाभारत के नारी पात्र [Kunti: Mahabharat k Nari Patra]
* Author: Sushil Kumar, सुशील कुमार
*ISBN: 9393232776, 978-9393232779
* Publisher: Samayik Prakashan
* Publication: 30 June 2025
* Page count: 272
* Format: Paperback
* Description: कालजयी महाकाव्य ‘महाभारत’ का अभिनंदन ‘पंचम वेद’ कहकर किया जाता रहा है। इस वृहद् ग्रंथ के संबंध में मान्यता रही है कि ‘जो महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है।’ अध्यात्म एवं ज्ञान की उच्चतम स्थापनाओं से संपन्न यह महाग्रंथ भारतीय संस्कृति का विश्वकोश माना जाता है। इसकी आधारभूत संकल्पनाएं ही वर्तमान भारतीय सभ्यता एवं समाज की आधारभूमि रही हैं। लोक कल्याण के प्रति जागरूक भारतीय नारी आज समानता के अधिकार तथा सहज सम्मान के लिए जो रचनात्मक आंदोलन कर रही है, उसकी सफलता की शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है— 6 खंडों में उपन्यास-माला महाभारत के नारी पात्रें की गौरव गाथा सत्यवती, गांधारी, कुंती, देवकी, रुक्मिणी और पांचाली। स्वभावतः इस महाकाव्य की समर्थ नारियां हमारी संस्कृति के लिए—विशेषकर भारतीय स्त्री के लिए दीपस्तंभ की ज्योति की भांति युगों से दिशा-निर्देश करती रही हैं। उनमें से एक हैं— कुंती कुंती नारी के महानतम रूप मातृत्व की पराकाष्ठा है। कुंती का अधिकांश जीवन हिमालय की उपत्यकाओं तथा दुर्गम वनों में बीता। कन्यावस्था में ही वह एक बलशाली पुत्र की मां बनी। फिर तीन अपने तथा अपनी सपत्नी माद्री के दो पुत्रें को लेकर उनके लालन-पालन तथा पोषण में लगी रहीं। उसके पुत्रें की हत्या के षड्यंत्र होते रहे वह स्वयं उन्हें लेकर दुर्गम स्थानों में भटकती रही। कन्यावस्था में जन्मे अपने पुत्र का रहस्य हृदय में छिपाए वह जीवन-भर उसके लिए तड़पती रही। उसने अपने मातृत्व का कर्तव्य अविचल रहकर निभाया। माता कुंती की प्रेरणा से ही पुरुषार्थ करके पराक्रमी पांडव शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सफल रहे। इस उपन्यास में कर्तव्यनिष्ठ माता की प्रतीक कुंती की तेजस्विता और उदार नारी का दर्शन मिलता है।
* Author: Sushil Kumar, सुशील कुमार
*ISBN: 9393232776, 978-9393232779
* Publisher: Samayik Prakashan
* Publication: 30 June 2025
* Page count: 272
* Format: Paperback
* Description: कालजयी महाकाव्य ‘महाभारत’ का अभिनंदन ‘पंचम वेद’ कहकर किया जाता रहा है। इस वृहद् ग्रंथ के संबंध में मान्यता रही है कि ‘जो महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है।’ अध्यात्म एवं ज्ञान की उच्चतम स्थापनाओं से संपन्न यह महाग्रंथ भारतीय संस्कृति का विश्वकोश माना जाता है। इसकी आधारभूत संकल्पनाएं ही वर्तमान भारतीय सभ्यता एवं समाज की आधारभूमि रही हैं। लोक कल्याण के प्रति जागरूक भारतीय नारी आज समानता के अधिकार तथा सहज सम्मान के लिए जो रचनात्मक आंदोलन कर रही है, उसकी सफलता की शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है— 6 खंडों में उपन्यास-माला महाभारत के नारी पात्रें की गौरव गाथा सत्यवती, गांधारी, कुंती, देवकी, रुक्मिणी और पांचाली। स्वभावतः इस महाकाव्य की समर्थ नारियां हमारी संस्कृति के लिए—विशेषकर भारतीय स्त्री के लिए दीपस्तंभ की ज्योति की भांति युगों से दिशा-निर्देश करती रही हैं। उनमें से एक हैं— कुंती कुंती नारी के महानतम रूप मातृत्व की पराकाष्ठा है। कुंती का अधिकांश जीवन हिमालय की उपत्यकाओं तथा दुर्गम वनों में बीता। कन्यावस्था में ही वह एक बलशाली पुत्र की मां बनी। फिर तीन अपने तथा अपनी सपत्नी माद्री के दो पुत्रें को लेकर उनके लालन-पालन तथा पोषण में लगी रहीं। उसके पुत्रें की हत्या के षड्यंत्र होते रहे वह स्वयं उन्हें लेकर दुर्गम स्थानों में भटकती रही। कन्यावस्था में जन्मे अपने पुत्र का रहस्य हृदय में छिपाए वह जीवन-भर उसके लिए तड़पती रही। उसने अपने मातृत्व का कर्तव्य अविचल रहकर निभाया। माता कुंती की प्रेरणा से ही पुरुषार्थ करके पराक्रमी पांडव शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सफल रहे। इस उपन्यास में कर्तव्यनिष्ठ माता की प्रतीक कुंती की तेजस्विता और उदार नारी का दर्शन मिलता है।
*Language: Hindi
*Link: https://www.amazon.in/Kunti-%E0%A4%95...
*Hardcover: https://www.amazon.in/Kunti-%E0%A4%95...