* Description: दरअसल ब्राह्मण विरोध के परदे के पीछे वास्तविक हमला भारतीयता और सनातन संस्कृति पर रहा है। ब्राह्मण भारत के बौद्धिक और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है । ब्राह्मणवाद से आजादी का नरेटिव बहुत दिनों से एक गहरे निहितार्थ के साथ राष्ट्र के सामने लाया जा रहा है। जैसे ईसाइयों का बौद्धिक केंद्र "पोप" हैं, इस्लाम के "उलेमा" और यदि उनसे कोई समूह या व्यक्ति आजादी की मांग करे तो इसका अर्थ हुआ कि वह उस धर्म या रिलीजन से ही मुक्ति की कामना कर रहा है। उसी प्रकार ब्राह्मण भी सनातन धर्म, संस्कारों, शास्त्रीय ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र बिंदु रहा है। ब्राह्मण को मिटाने का अर्थ ही सनातन संस्कृति को समाप्त करना है।
इतिहास से भी पुराना इतिहास है ब्राह्मणों का। वेद जैसे प्राचीनतम ज्ञान को गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से एक कंठ से दूसरे कंठ में प्रतिष्ठित करते हुए जीवित रखा ब्राह्मणों ने। विश्वविद्यालयों में समय-समय पर डफली बजाकर नाचते- कूदते , भटकाए गई युवा और छद्म सेक्युलर बौद्धिक समूह द्वारा ब्राह्मणवाद से आजादी के नारे लगाकर वास्तव में भारत की जड़ों, इतिहास और उसकी सनातन पहचान मिटाने की तैयारी है।.... शोषण और दमन की अतिकल्पित कथाएं सुना- सुना कर दिग्भ्रमित किया गया है एक वर्ग को और ब्राह्मणों के शत्रु रूप में खड़ा किया गया उन्हें अपने ही देश में। इस्लाम और ईसाइयत के टारगेट पर भी वही तथाकथित हिंदू समाज का विशेष वर्ग है। भारत को तोड़ना है और उस पर विजय प्राप्त करनी है तो उसके अभेद्य धार्मिक, सांस्कृतिक दुर्ग को छिन्न- भिन्न करना आवश्यक है तभी भारत विश्व के सामने घुटनों के बल बैठ सकता है । इस उद्देश्य को प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा है ब्राह्मण वर्ग। चूंकि भारतीय संस्कृति और उसकी ज्ञान परंपरा निशाने पर है इसलिए ब्राह्मण निशाने पर और इस प्रकार पूरा सवर्ण समाज निशाने पर। सदियों से उनके विरुद्ध नॉरेटिव गढ़े गए।
नवन्यास के रूप में नीरजा माधव की एक निर्भीक और क्रांतिकारी पुस्तक "ब्राह्मणो!"
Actually, behind the facade of anti-Brahminism, the real attack has been on Indianness and Sanatan culture. Brahmins have been the center of India's intellectual and spiritual consciousness. The narrative of freedom from Brahminism has been presented to the nation for a long time with deep implications. Just as Christians have Pope as their intellectual center, and Islam has Ulema, if any group or person demands freedom from them, it means they seek liberation from that religion itself. Similarly, Brahmins have been the focal point of Sanatan Dharma, rituals, classical knowledge, and cultural traditions. To eliminate Brahmins means to destroy Sanatan culture.
The history of Brahmins is older than history itself. Brahmins kept alive the most ancient knowledge, like the Vedas, by passing it from one voice to another through the guru-disciple tradition. In universities, by time to time playing the drum and dancing around, misleading the youth, and through pseudo-secular intellectual groups, with slogans about freedom from Brahmanism, there is actually a preparation to erase India’s roots, history, and its eternal identity. A class has been confused by repeatedly being told exaggerated stories of exploitation and oppression, and Brahmins have been positioned as enemies in their own country. On the targets of Islam and Christianity, the same so-called special section of Hindu society is involved. If India is to be divided and conquered, it is essential to break its impregnable religious and cultural forts; only then can India be made to kneel before the world. The biggest obstacle to achieving this goal is the Brahmin class. Since Indian culture and its knowledge tradition are being targeted, Brahmins are targeted, and thus the entire upper-caste society is targeted. Narratives have been built against them for centuries.
As a fresh take, Neerja Madhav's bold and revolutionary book 'BRAHMANO!'
About the Author: नीरजा माधव भारत की एक सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हैं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के कोतवालपुर (सरेमू) गांव में श्री मथुरा प्रसाद और श्रीमती विमला देवी की चौथी संतान के रूप में पैदा हुई नीरजा माधव की अब तक पचपन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें उपन्यास, कहानी संग्रह, कविता संग्रह, ललित निबंध संग्रह और अन्य विधाओं पर प्रकाशित पुस्तकें भी हैं। सर्वथा अछूते विषयों जैसे- तिब्बती शरणार्थियों, थर्ड जेंडर, साहित्य के इतिहास से ओझल स्त्रियों आदि पर भारत में सर्वप्रथम लिखने और विश्व शांति की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली लेखिका के रूप में नीरजा माधव की राष्ट्रव्यापी ख्याति है। इस कार्य हेतु उन्हें समय-समय पर भारत सरकार और अन्य भारतीय साहित्यिक अकादमियों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। लेखन के माध्यम से विश्व शांति की दिशा में विशेष योगदान और थर्ड जेंडर और तिब्बती शरणार्थियों के मानवाधिकारों के लिए आवाज उठातीं नीरजा माधव को भारत के राष्ट्रपति महोदय द्वारा सर्वोच्च महिला नागरिक सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के द्वारा राजभाषा गौरव सम्मान 2024,उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान, मध्य प्रदेश शासन द्वारा मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी सम्मान आदि से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। उनके अनेक उपन्यास और कहानियां विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल हैं। उनकी कृतियों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है । अनेक शोध छात्र उनके साहित्य पर अपना शोध प्रबंध पूर्ण कर चुके हैं। राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लिखने वाली नीरजा माधव भारत की एकमात्र निर्भीक लेखिका हैं जो उलझे हुए अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी अपनी बेबाक लेखनी चलाती हैं।
* Author: Neerja Madhav, नीरजा माधव
*ISBN: 9358690925, 978-9358690927
* Publisher: Pralek Prakashan
* Publication: 23 August 2026
* Page count: 180
* Format: Paperback
* Description: दरअसल ब्राह्मण विरोध के परदे के पीछे वास्तविक हमला भारतीयता और सनातन संस्कृति पर रहा है। ब्राह्मण भारत के बौद्धिक और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है । ब्राह्मणवाद से आजादी का नरेटिव बहुत दिनों से एक गहरे निहितार्थ के साथ राष्ट्र के सामने लाया जा रहा है। जैसे ईसाइयों का बौद्धिक केंद्र "पोप" हैं, इस्लाम के "उलेमा" और यदि उनसे कोई समूह या व्यक्ति आजादी की मांग करे तो इसका अर्थ हुआ कि वह उस धर्म या रिलीजन से ही मुक्ति की कामना कर रहा है। उसी प्रकार ब्राह्मण भी सनातन धर्म, संस्कारों, शास्त्रीय ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र बिंदु रहा है। ब्राह्मण को मिटाने का अर्थ ही सनातन संस्कृति को समाप्त करना है।
इतिहास से भी पुराना इतिहास है ब्राह्मणों का। वेद जैसे प्राचीनतम ज्ञान को गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से एक कंठ से दूसरे कंठ में प्रतिष्ठित करते हुए जीवित रखा ब्राह्मणों ने। विश्वविद्यालयों में समय-समय पर डफली बजाकर नाचते- कूदते , भटकाए गई युवा और छद्म सेक्युलर बौद्धिक समूह द्वारा ब्राह्मणवाद से आजादी के नारे लगाकर वास्तव में भारत की जड़ों, इतिहास और उसकी सनातन पहचान मिटाने की तैयारी है।.... शोषण और दमन की अतिकल्पित कथाएं सुना- सुना कर दिग्भ्रमित किया गया है एक वर्ग को और ब्राह्मणों के शत्रु रूप में खड़ा किया गया उन्हें अपने ही देश में। इस्लाम और ईसाइयत के टारगेट पर भी वही तथाकथित हिंदू समाज का विशेष वर्ग है। भारत को तोड़ना है और उस पर विजय प्राप्त करनी है तो उसके अभेद्य धार्मिक, सांस्कृतिक दुर्ग को छिन्न- भिन्न करना आवश्यक है तभी भारत विश्व के सामने घुटनों के बल बैठ सकता है । इस उद्देश्य को प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा है ब्राह्मण वर्ग। चूंकि भारतीय संस्कृति और उसकी ज्ञान परंपरा निशाने पर है इसलिए ब्राह्मण निशाने पर और इस प्रकार पूरा सवर्ण समाज निशाने पर। सदियों से उनके विरुद्ध नॉरेटिव गढ़े गए।
नवन्यास के रूप में नीरजा माधव की एक निर्भीक और क्रांतिकारी पुस्तक "ब्राह्मणो!"
Actually, behind the facade of anti-Brahminism, the real attack has been on Indianness and Sanatan culture. Brahmins have been the center of India's intellectual and spiritual consciousness. The narrative of freedom from Brahminism has been presented to the nation for a long time with deep implications. Just as Christians have Pope as their intellectual center, and Islam has Ulema, if any group or person demands freedom from them, it means they seek liberation from that religion itself. Similarly, Brahmins have been the focal point of Sanatan Dharma, rituals, classical knowledge, and cultural traditions. To eliminate Brahmins means to destroy Sanatan culture.
The history of Brahmins is older than history itself. Brahmins kept alive the most ancient knowledge, like the Vedas, by passing it from one voice to another through the guru-disciple tradition. In universities, by time to time playing the drum and dancing around, misleading the youth, and through pseudo-secular intellectual groups, with slogans about freedom from Brahmanism, there is actually a preparation to erase India’s roots, history, and its eternal identity. A class has been confused by repeatedly being told exaggerated stories of exploitation and oppression, and Brahmins have been positioned as enemies in their own country. On the targets of Islam and Christianity, the same so-called special section of Hindu society is involved. If India is to be divided and conquered, it is essential to break its impregnable religious and cultural forts; only then can India be made to kneel before the world. The biggest obstacle to achieving this goal is the Brahmin class. Since Indian culture and its knowledge tradition are being targeted, Brahmins are targeted, and thus the entire upper-caste society is targeted. Narratives have been built against them for centuries.
As a fresh take, Neerja Madhav's bold and revolutionary book 'BRAHMANO!'
About the Author: नीरजा माधव भारत की एक सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हैं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के कोतवालपुर (सरेमू) गांव में श्री मथुरा प्रसाद और श्रीमती विमला देवी की चौथी संतान के रूप में पैदा हुई नीरजा माधव की अब तक पचपन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें उपन्यास, कहानी संग्रह, कविता संग्रह, ललित निबंध संग्रह और अन्य विधाओं पर प्रकाशित पुस्तकें भी हैं। सर्वथा अछूते विषयों जैसे- तिब्बती शरणार्थियों, थर्ड जेंडर, साहित्य के इतिहास से ओझल स्त्रियों आदि पर भारत में सर्वप्रथम लिखने और विश्व शांति की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली लेखिका के रूप में नीरजा माधव की राष्ट्रव्यापी ख्याति है। इस कार्य हेतु उन्हें समय-समय पर भारत सरकार और अन्य भारतीय साहित्यिक अकादमियों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। लेखन के माध्यम से विश्व शांति की दिशा में विशेष योगदान और थर्ड जेंडर और तिब्बती शरणार्थियों के मानवाधिकारों के लिए आवाज उठातीं नीरजा माधव को भारत के राष्ट्रपति महोदय द्वारा सर्वोच्च महिला नागरिक सम्मान नारी शक्ति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के द्वारा राजभाषा गौरव सम्मान 2024,उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान, मध्य प्रदेश शासन द्वारा मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी सम्मान आदि से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। उनके अनेक उपन्यास और कहानियां विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल हैं। उनकी कृतियों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है । अनेक शोध छात्र उनके साहित्य पर अपना शोध प्रबंध पूर्ण कर चुके हैं। राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लिखने वाली नीरजा माधव भारत की एकमात्र निर्भीक लेखिका हैं जो उलझे हुए अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी अपनी बेबाक लेखनी चलाती हैं।
*Language: Hindi
*Link: https://www.amazon.in/BRAHMANO-%E0%A4...
*Hardcover: https://www.amazon.in/BRAHMANO-%E0%A4...