Rajesh Kumar

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Sanjay Choubey
“पच्चीस साल के एक नौजवान को लोगों ने बाबा कहना शुरू कर दिया था क्योंकि उस नौजवान की विशालता में लोगों ने अपना आश्रय ढूंढा था. समय के साथ अपनी विशालता और दूसरों को आश्रय देने के अहंकार ने उसे ‘मालिक’ बना दिया, उसे पता भी नहीं चला.”
Sanjay Choubey, 9 November

Sanjay Choubey
“अंधकार को दूर करने के लिए अँधेरे से लड़ने की कोई जरुरत नहीं होती; बस रोशनी लानी होती है और जब लड़ाई नहीं होगी तो मन में कोई अवसाद नहीं होगा. साथ ही जब कोई लड़ाई ही नहीं रहेगी तो किसी के पक्ष में खड़े होने, विपक्ष में रहने या मूक साक्षी बने रहने से क्या फर्क पड़ता है. रोशनी लाने हेतु जिस दीप को जलाया जाता है, वह दीप जलता रहता है....”
Sanjay Choubey, 9 November

Sanjay Choubey
“गैबीनाथ महादेव, एक सौ पांच किलोमीटर की नंगे पांव यात्रा और जाह्णु मुनि जिन्होंने एक ही घूँट में पूरी गंगा को निगल लिया था. भागीरथ के बहुत अनुनय विनय पर गंगा जाह्णु मुनि के जांघ से निकलती और इसी वजह से गंगा जाहन्वी भी कहलाती है.”
Sanjay Choubey, 9 November

Sanjay Choubey
“और एक बात जो पहले कही थी – परेशान मत हुआ करो.... समय कभी भी कम नहीं होता. तुम्हें तुम्हारे हिस्से का समय जरुर मिलेगा !”
Sanjay Choubey, 9 November

Sanjay Choubey
“एक और बात याद रखना. वही परिवर्तन स्थायी होता है जिसकी खबर भी न लगे, जैसे बच्चे का जवान और जवान व्यक्ति का बूढ़ा हो जाना. बच्चे को खबर भी नहीं होती और बच्चा बचपन छोड़ बड़ा हो चुका होता है. समाज में स्थायी परिवर्तन भी ऐसे ही होता है. रातो – रात बदलाव की कोशिश में ऐसे ही मासूमों के खून बहते हैं और क्रांति धरी की धरी रह जाती है.”
Sanjay Choubey, 9 November

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