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Ian Fleming
“Once is happenstance. Twice is coincidence. Three times is enemy action”
Ian Fleming, Goldfinger

Harishankar Parsai
“मेरी सुलझी हुई दृष्टि का यही रहस्य है। दूसरो को सुख का रास्ता बताने के लिए में प्रश्न और उत्तर बता देता हूं।

तुम किस देश के निवासी हो?
भारत के।
तुम किस जाति के हो?
आर्य।
विश्व में सबसे प्राचीन जाति कौन?
आर्य।
और सबसे श्रेष्ठ?
आर्य।
क्या तुमने खून की परीक्षा कराइ है?
हां, उसमे सौ प्रतिशत आर्य सेल है।
देवता भगवान को क्या प्रार्थना करते है?
की हमे पुण्यभूमि भारत में जन्म दो।
बाकी भूमि कैसी है?
पापभूमि है।
देवता कही और जन्म नही लेते?
कतई नहीं। वे मुझे बताकर जन्म लेते है।
क्या देवताओ के पास राजनितिक नक्शा है?
हां, देवताओंके पास 'ऑक्सफर्ड वर्ल्ड एटलास' है।
क्या उन्हें पाकिस्तान बनने की खबर है?
उन्हें सब मालूम है। वे 'बाउंड्री कमीशन' की रेखा को मानते है।
ज्ञान विज्ञान किसके पास है?
सिर्फ आर्यो के पास।
यानी तुम्हारे पास?
नही हमारे पूर्वज आर्यो के पास।
उसके बाहर कही ज्ञान विज्ञान नही है?
कहीँ नहीँ।
इन हजारो सालो में मनुष्य जाति ने कोई उपलब्धि की?
कोई नहीँ। सारी उपलब्धि हमारे यहाँ हो चुकी थी।
क्या अब हमे कुछ शीखने की जरूरत है?
कतई नहीँ। हमारे पूर्वज तो विश्व के गुरू थे।
संसार में महान कौन?
हम, हम, हम।
मेरा ह्रदय गदगद होने लगा। अश्रुपात होने लगा। मैंने आँखे बंद कर ली। मुख से”
Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

Harishankar Parsai
“-स्वामीजी, पश्चिम के देश गौ की पूजा नही करते, फिर भी समृद्ध है?
- उनका तो भगवान दूसरा है बच्चा! उन्हें कोई दोष नही लगता।
- यानी भगवान रखना भी एक झंझट ही है। वह हर बात दंड देने लगता है।
- तर्क ठीक है, बच्चा, पर भावना गलत है।
- स्वामीजी, जहॉ तक मै जानता हूँ, जनता के मनमे इस समय गोरक्षा नही है, महगाई और अर्थिक शोषण है। जनता महँगाई के खिलाफ आंदोलन करती है। वह वेतन और महगाईभत्ता बढ़वाने के लिए हड़ताल करती है। जनता आर्थिक न्याय के लिए लड़ रही है। और इधर आप गोरक्षा आंदोलन लेकर बेठ गए है। इसमें तुक क्या है?
- बच्चा, इसमें तुक है। देखो जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलज़ा देना चाहिए, नही तो वः खतरनाक हो जाती है। जनता कहती है- हमारी माँग है महगाई बन्ध हो, मुनाफाखोरी बन्द हो, वेतन।बढ़े, शोषण बंद हो, तब हम उससे कहते है की नही तुम्हारी बुनियादी मांग गोरक्षा है। बच्चा, आर्थिक क्राँति की तरफ बढ़ती जनता को हम रास्ते में ही गाय के खूंटे से बाँध देते है। यह आंदोलन जनता को उलझाये रखने के लिए है।”
Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

Harishankar Parsai
“खुद चाहे कुछ न करूँ, पर दूसरों के काम में दखल जरूर दूँगा ।”
Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

Harishankar Parsai
“मैं इतना बड़ा लेखक हूँ । यहाँ तीन गर्ल्स-कालेज हैं । उनकी सारी लड़कियों को मेरे इर्द-गिर्द होना चाहिए कि नहीं ? मगर कोई नहीं आती ।”
Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

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