“रोने से और इश्क़ में बेबाक हो गये,
धोये गये हम ऐसे कि बस पाक हो गये.
कहता है कौन नाला-ए-बुलबुल को बे-असर,
परदे में गुल कि लाख जिगर चाक हो गये.
करने गये थे उससे तग़ाफ़ुल का हम गिला,
की एक ही निगाह कि बस ख़ाक हो गये.
इस रंग से उठाई कल उसने असद की लाश,
दुश्मन भी जिसको देखके ग़मनाक हो गये.”
― Love Sonnets of Ghalib [Jul 01, 2002] Mirza Asadullah Khan Ghalib
धोये गये हम ऐसे कि बस पाक हो गये.
कहता है कौन नाला-ए-बुलबुल को बे-असर,
परदे में गुल कि लाख जिगर चाक हो गये.
करने गये थे उससे तग़ाफ़ुल का हम गिला,
की एक ही निगाह कि बस ख़ाक हो गये.
इस रंग से उठाई कल उसने असद की लाश,
दुश्मन भी जिसको देखके ग़मनाक हो गये.”
― Love Sonnets of Ghalib [Jul 01, 2002] Mirza Asadullah Khan Ghalib
“There is only one thing that makes a dream impossible to achieve: the fear of failure.”
― The Alchemist
― The Alchemist
Sarfraz’s 2025 Year in Books
Take a look at Sarfraz’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
More friends…
Polls voted on by Sarfraz
Lists liked by Sarfraz









