“I AM wealthy, poor, healthy, sick, free, confined were first of all impressions or conditions felt before they became visible expressions. Your world is your consciousness objectified. Waste no time trying to change the outside; change the within or the impression; and the without or expression will take care of itself. When the truth of this statement dawns upon you, you will know that you have found the lost word or the key to every door. I AM (your consciousness) is the magical lost word which was made flesh in the likeness of that which you are conscious of being.”
― Your Faith is Your Fortune
― Your Faith is Your Fortune
“If you realize that all things change, there is nothing you will try to hold on to. If you are not afraid of dying, there is nothing you cannot achieve.”
― Tao Te Ching
― Tao Te Ching
“मंसूर मनुष्य के इतिहास में सबसे ज्यादा पीड़ा से मारा गया। पहले उसके पैर काट दिए। जब उसके पैरों से खून बहने लगा, तो उसने खून को लेकर अपने हाथों पर लगाया। भीड़ इकट्ठी थी, लोग पत्थर फेंक रहे थे। उन्होंने पूछा, ‘यह क्या कर रहे हो?’ उसने कहा, ‘वजू करता हूं।’ मुसलमान नमाज के पहले हाथ धोते हैं। उसने अपने खून से अपने हाथ धोए। उसने कहा, ‘वजू करता हूं।’ और उसने कहा, ‘याद रहे मंसूर का यह वचन कि जो प्रेम की वजू है असली, वह खून से की जाती है, पानी से नहीं की जाती। और जो अपने खून से वजू करता है, वही नमाज में प्रवेश करता है।’ लोग बहुत हैरान हुए कि पागल है। उसके पैर काट दिए गए, फिर उसके हाथ काट दिए गए। फिर उसकी उन्होंने आंखें फोड़ दीं। और एक लाख लोग इकट्ठे हैं और पत्थर मार रहे हैं और उसका एक-एक अंग काटा जा रहा है। और जब उसकी आंखें फोड़ दी गयीं, तब वह चिल्लाया कि ‘हे परमात्मा, स्मरण रखना। मंसूर जीत गया।’ लोगों ने पूछा, ‘क्या बात है? किस बात में जीत गए?’ उसने कहा, ‘परमात्मा को कह रहा हूं। परमात्मा स्मरण रखना, मंसूर जीत गया। मैं डरता था कि शायद इतनी शत्रुता में प्रेम कायम नहीं रह सकेगा। तो स्मरण रखना परमात्मा कि मंसूर जीत गया। प्रेम मेरा कायम है। इन्होंने जो मेरे साथ किया है, मेरे साथ नहीं कर पाए। इन्होंने जो मेरे साथ किया है, मेरे साथ नहीं कर पाए। प्रेम कायम है।’ और उसने कहा, ‘यही मेरी प्रार्थना है और यही मेरी इबादत है।’ मंसूर उस वक्त भी हंस रहा था, उस वक्त भी मस्त था। लोग मौत के सामने खुश रहे हैं और हंसते रहे हैं। और हम जिंदगी के सामने उदास और रोते हुए बैठे हैं। यह गलत है। कोई उदास रास्ते, कोई विषाद से भरा हुआ चित्त कोई बड़े अभियान नहीं कर सकता है। अभियान के लिए उत्फुल्लता, अभियान के लिए बड़े आनंद से भरा”
― ध्यान-सूत्र – Dhyan Sutra
― ध्यान-सूत्र – Dhyan Sutra
Amrish’s 2025 Year in Books
Take a look at Amrish’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
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