Pradyumna Kumar Tiwari > Quotes > Quote > Ajit liked it
“पश्चताप की अग्नि बहुत भयंकर होती है, जो व्यक्ति के जीवन के हरित उपवन को धीरे-धीरे सुखाकर निर्जन मरुस्थल में बदल देती है और मृत्यु ही उसकी अंतिम गति होती है, किन्तु यदि यही अग्नि दायित्व से जुड़ जाती है तो व्यक्ति की पवित्र शक्ति में परिणत हो जाती है। यही वास्तव में प्रायश्चित का वह मार्ग है, जिसकी मंजिल निःश्रेयष है, शांति है, आनंद है।”
― त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह
― त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह
No comments have been added yet.
