Nirmal Verma > Quotes > Quote > Nistha liked it
“कैसी विचित्र बात है, सुखी दिनों में हमें अनिष्ट की छाया सबसे साफ़ दिखाई देती है, जैसे हमें विश्वास न हो कि हम सुख के लिए बने हैं। हम उसे छूते हुए भी डरते हैं कि कहीं हमारे स्पर्श से वह मैला न हो जाए और इस डर से उसे भी खो देते हैं, जो विधाता ने हमारे हिस्से के लिए रखा था। दुख से बचना मुश्किल है, पर सुख को खो देना कितना आसान है”
― अन्तिम अरण्य
― अन्तिम अरण्य
No comments have been added yet.
