विनोद कुमार शुक्ल जी का कोई सानी नहीं। सँवेदना को शब्दों में बयां करने की कला उन्हें सबसे अलग रखती है। आज उनकी लिखी कविता 'रायपुर बिलासपुर सम्भाग' पढ़ी। हरेक शब्द मन को गहराई तक छू गया। हरेक पद्य एक बार पढ़ने के उपरान्त बार-बार पढ़ने का मन करता है, और बीते दिनों की याद वेदना बनकर उभर आती है। इस कविता की कुछ पंक्तियां यहां लिख रही हूँ।
एक ग़रीब खेतिहर के बेदख़ल होते ही
छूटकर रह गई ज़मीन
ज़मीन का नक्शा होकर
टँग गई ज़म
— Jan 19, 2021 11:02PM
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