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“A book may give us wisdom, but it cannot make us wise. A book can give us knowledge, but it cannot make us experience the truth of that knowledge.”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“Without peace, we cannot be creative.”
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“हम ध्यान में क्या करते हैं? हम भीतर जाते हैं। हम अपने अस्तित्व के केन्द्र की ओर बढ़ते हैं। गहरे ध्यान में हम अपने स्रोत के सम्पर्क में आ जाते हैं। इसमें विलय होकर, इसमें मिलकर और इसमें डूबकर हम इसके साथ एक हो जाते हैं। यह मिलन योग की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। यह उस स्रोत की ओर वापसी है जहाँ से हमारी उत्पत्ति हुई है। इस प्रकार देखें तो योग विलय के सिद्धान्त का प्रतिनिधित्व करता है। यह हमारी सृष्टि के सृजन से पहले के क्षण में वापसी है। तब सब कुछ एक में समाया हुआ था। उस ‘एक’ में कोई हलचल नहीं थी। इसी कारण योग की स्थिति पूर्ण शान्ति और आन्तरिक स्थिरता की स्थिति होती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“पूर्णता केवल देने से ही आती है और देने के लिए सबसे वास्तविक उपहार है ख़ुद को देना। इसलिए ‘ख़ुद’ को दें।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“कारण एक ही है जो मेरे सभी अनुभवों पर असर डालता है और वह है अपने अहं से निपटने का मेरा तरीका। मेरा अहंकार जितना अधिक होगा उतना ही बदतर मेरा अनुभव भी होगा। जितना अधिक मैं विनम्र और शालीन रहूँगा, उतना ही बेहतर मेरा अनुभव भी होगा। यह एक सरल सूत्र है। और फिर एक दिन मेरे दिमाग़ में एक बल्ब जल उठता है : “क्यों न मैं जीरो ही हो जाऊँ या क्यों न मैं ‘कुछ नहीं’ हो जाऊँ?”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“एक खुला हृदय सूर्य के सामान है जो हरेक के लिए चमकता है। यह अपना प्रेम उत्सर्जित करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता। खुले हृदय से प्रेम बिना किसी भेद-भाव के बहता है। लेकिन हम सचमुच यह नहीं कह सकते कि हृदय प्रेम करता है। बल्कि एक खुला हृदय स्वयं ही प्रेम है और जो कोई इसकी किरणों में आकर खड़ा होता है वह महसूस करता है कि उसे प्रेम मिल रहा है। और बन्द हृदय क्या है? यह उस व्यक्ति के समान है जिसने स्वयं को पूरे दिन अन्दर बन्द रखा।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“प्राण एक आवश्यक मौलिक जीवन शक्ति है, हम यह भी समझ जाते हैं कि प्राणाहुति उसी पवित्र सार तत्व की भेंट है।” “यह भेंट किसे दी जाती है? यह हमें दी जाती है। परम् स्रोत हम सब के लिए स्वयं को भेंट करता है। इस बात से हमें ईसाई धर्म की याद आती है, जहाँ ईश्वर सभी की खातिर अपना बलिदान करता है और स्वयं की भेंट दे देता है। इसलिए प्राणाहुति को हम एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में समझ सकते हैं जिसमें ईश्वर अपने ही सार से हमें सराबोर करता”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“The first principle of destiny is that we can only change it in the present. The past is gone and cannot be changed.”
― Designing Destiny
― Designing Destiny
“जिज्ञासु की सच्ची तड़प मालिक को उसके दरवाज़े पर ले आती है। कुछ मामलों में जिज्ञासु इस आन्तरिक पुकार के प्रति जागरूक होता है। कुछ अन्य मामलों में यह पुकार अचेतन होती है। और जिस प्रकार यह सत्य है कि साधक या जिज्ञासु गुरु को खींच लेता है, यह भी उतना ही सत्य है कि गुरु जिज्ञासु का चयन करता है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“The attitudes of humility, supplicancy, innocence and insignificance create a vacuum in the heart, so that the current from the Source flows in and enlivens the connection, just as electrical current flows from the positive to the negative pole in an electrical wire.”
― Designing Destiny
― Designing Destiny
“भक्ति कैसी? आपने कुछ अनुभव ही नहीं किया। आप दिव्य को वास्तव में जान ही नहीं पाये। अभ्यास के बिना भक्ति अपने उद्देश्य से अलग रहती है। यह बाह्य हो जाती है। जैसे ही हम भगवान के बारे में सोचते हैं हमारी कल्पनाएँ काम करना शुरू कर देती हैं। शायद हम दिव्य सिंहासन पर बैठे एक यशस्वी अस्तित्व की कल्पना करते हैं। या फिर हम शक्ति और ऊर्जा के एक निराकार स्रोत के बारे में सोचते हैं। ईश्वर है लेकिन जब तक हम भीतर नहीं जाते और उसकी उपस्थिति महसूस नहीं करते, तब तक ईश्वर एक अवधारणा ही रह जाता है—एक मानसिक जोड़-तोड़।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“आध्यात्मिक यात्रा की अवस्थाएँ जिज्ञासु के लिए बेहद आकर्षक हो सकती हैं। क्योंकि वे अत्यन्त उल्लास, शान्ति और आनन्द से परिपूर्ण होती हैं। असल में वे इतनी मोहक होती हैं कि हम वहीं ठहर जाने और आध्यात्मिक यात्रा का पूर्णतः त्याग करने के लिए प्रलोभित हो जाते हैं।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“जब तक किसी परिस्थिति से प्रभावित होने के लिए आप पहले से ही संवेदनशील न हों तब तक वो परिस्थिति आपको प्रभावित नहीं कर सकती।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“Duality is intrinsic to prayer. In prayer, there are always two: a person in need and the personality whose help is needed.”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“However, if you suffer from insomnia, that is also the cure. Lie in bed and start meditating. You’ll fall asleep straight away!”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“यदि आपके अन्दर आस्था है तो फिर अपनी परेशानियों के बारे में ईश्वर को याद दिलाने की ज़रूरत ही क्या है? और अगर आपमें आस्था नहीं है तो फिर प्रार्थना करने की ज़रूरत ही क्या है?”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“Think that everything around you is absorbed in Godly remembrance. Start by first feeling absorbed in Godly remembrance yourself, so its echo will be felt outside.”
― Designing Destiny
― Designing Destiny
“अगर आपका हृदय तैयार है तो फिर आपको गुरु से बार-बार मिलने की ज़रूरत ही क्या है? गुरु बहुत दूर से कार्य कर सकता है। यह सही है कि वह वाकई कुछ नहीं करता लेकिन कार्य उसी के ज़रिये होता है। और उस कार्य के होने के लिए आपको गुरु की भौतिक मौजूदगी में होना ज़रूरी नहीं है। यह एक ऐसी सीमा है जिसे हम अपने मन में बना लेते हैं। गुरु को आपका नाम जानने की ज़रूरत नहीं है। वह आपको चेहरे से पहचाने, यह भी ज़रूरी नहीं है। इस तरह का सचेतन ज्ञान उसके कार्यों के लिए पूरी तरह अनावश्यक है। गुरु को इस बारे में भी जानने की ज़रूरत नहीं है कि वह आप पर कार्य कर रहा है, क्योंकि आध्यात्मिक कार्य गुरु के हृदय से स्वतः होते हैं। आपके हृदय ने पुकार लगायी है तो गुरु के रूप में प्रकृति उत्तर देती है। इस प्रकार, गुरु-शिष्य का सम्बन्ध आन्तरिक होता है जो गुप्त रूप से हृदय में फलता है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“वाकई, गुरु कुछ नहीं करता। और न ही उसे कुछ करना है। क्या सूर्य की मौजूदगी में रात हो सकती है? सूर्य उदय होता है, और अँधकार चला जाता है। इसके लिए सूर्य कुछ नहीं करता। उसका स्वभाव ही यह है। गुरु भी ठीक इसी प्रकार होता है। गुरु का शाब्दिक अर्थ है ‘अँधकार को दूर करने वाला’। लेकिन सूर्य की ही तरह वह भी अँधकार को दूर करने के लिए कुछ नहीं करता। वह तो जैसा है, वैसा है।” “कली पर जैसे ही सूर्य की किरणें पड़ती हैं, वह धीरे-धीरे खिलने लगती है। क्या सूर्य को इसके लिए कुछ करना पड़ता है? क्या कली को कुछ करना पड़ता है? यह तो बस हो जाता है।” “इसलिए गुरु ख़ुद कुछ नहीं करता। यह तो उसकी मौजूदगी है जो सब कुछ करती है। और उसकी मौजूदगी तभी कार्य करती है जब जिज्ञासु का हृदय पुष्पित होने के लिए तैयार हो। कली को जबरन खोलने का प्रयास उसे बर्बाद ही करेगा। अगर गुरु को हम पर कार्य करना पड़े तो वह एक थोपी हुई चीज़ होगी। यह विध्वंसकारी होगा। इसलिए गुरु ऐसा नहीं करेगा।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“प्राणाहुति के कारण, इस प्रेमपूर्ण, शक्तिहीन शक्ति के कारण हम स्रोत के साथ अपने ऐक्य की मूल अवस्था फिर से हासिल कर पाते हैं और यही योग की असल परिभाषा भी है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“हम गुरु की उपस्थिति के कारण साफ़ होते हैं। उसकी उपस्थिति के कारण ही हम प्राणाहुति प्राप्त करते हैं। गुरु कुछ भी नहीं करता है। लेकिन वह जैसा है, वैसा बनने के लिए उसने ख़ुद पर बहुत मेहनत की ठीक उसी तरह जैसे हमें भी अपने ऊपर मेहनत करनी है। हमें अभ्यास करना होता है! अभ्यास के ज़रिये हम अपने हृदय को तैयार करते हैं जिससे कि वह गुरु से सब कुछ खींच सके। इसीलिए हम प्रतिदिन ध्यान, सफ़ाई और प्रार्थना करते हैं। हमारे प्रयास के बिना हमारे जीवन में गुरु की मौजूदगी व्यर्थ चली जाती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“Generally people complain of numerous ideas creeping into their mind at the time of meditation. They think that they have failed in their practice unless they bring their mind to a standstill. But it is not so. We are not practising concentration, but only meditation. We must go on with meditation unmindful of the foreign ideas that happen to come to our mind at the time. The flow of ideas is due to the activities of our conscious mind, which is never at rest. We are still busy in meditation with our subconscious mind, while our conscious mind is roaming about and forming numerous ideas. Thus we are not the loser in any way. In due course, after sufficient practice, the conscious mind too gets moulded and begins to act in harmony with the subconscious mind. The result thus achieved is deep-rooted and lasting, and finally calmness, the characteristic of the soul, becomes predominant.”
― Designing Destiny
― Designing Destiny
“असल में ‘आदि शक्ति’ से भी बेहतर एक शब्द ‘शक्तिहीन शक्ति’ होगा।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“जहाँ प्रेम होता है, वहाँ कर्तव्य का विचार गायब हो जाता है, काम करने का विचार गायब हो जाता है। प्रेम में हम अपना कर्तव्य बिलकुल प्राकृतिक तरीके से करते हैं। बिना किसी बोझ के। बिना प्रेम के कर्तव्य निभाना हमें गुलाम बनाता है जबकि प्रेम हमें स्वतन्त्रता देता है। यही प्रयास रहित कर्म का रहस्य है। यह केवल प्रार्थना का ही नहीं बल्कि हमारे हर कार्य का आधार है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“The more you allow your heart to yield, the humbler and more loving you become. And is there any limit to how much the heart can yield? We come from infinity, we merge into infinity, and our capacity to love is infinite. The more the heart surrenders, the more love flows through you.”
― Spiritual Anatomy: Meditation, Chakras, and the Journey to the Center
― Spiritual Anatomy: Meditation, Chakras, and the Journey to the Center
“Through meditation, we move from the complexity of mind to the simplicity of heart.”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“समाधि के गहनतम स्तरों पर, हमारी स्थिति उस मूल अवस्था से मेल खाती है जो कि हमारे अस्तित्व में आने के पूर्व थी। उस समय कोई हरकत नहीं थी, केवल स्थिरता थी। लेकिन उस स्थिरता में असीम क्षमता थी। असीम ऊर्जा थी। जब उस ऊर्जा को गति प्रदान कर दी जाती है तो हम इसे मूल शक्ति या आदि शक्ति कहते हैं। यौगिक प्राणाहुति वही मूल शक्ति या आदि शक्ति है। केवल मूल शक्ति ही हमें मूल स्थिति में ला सकती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“The ascent of consciousness is the transformation of imperfection into perfection, impurity into purity, and complexity into simplicity. Each day you are waging war with your tendencies and shortcomings. You try to gain new ground while holding the line and preventing losses.”
― Spiritual Anatomy: Meditation, Chakras, and the Journey to the Center
― Spiritual Anatomy: Meditation, Chakras, and the Journey to the Center






