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Start by following राही मासूम रज़ा.
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“नारियल के पेड़ों की छाँव बेचनेवालो, बरगदों को मत काटो पीपलों को मत छेड़ो इमलियों को जीने दो इनकी पत्ती-पत्ती पर धूप पर सुखाती है इनकी पत्ती-पत्ती पर सुबह अपनी उँगली से अपने नाम लिखती है…”
― नीम का पेड़
― नीम का पेड़
“वह सन्नाटा चम्मच भर चीनी बन गया और मेरी चाय मीठी हो गयी।”
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“बात यह है कि तब वह जवान था। आँखें मजबूत थीं। सपने देख सकती थी , तो उसने अपनी आँखों को कोई और काम सिखलाया ही नहीं और फिर ऐसा हुआ कि सपनो का बाज़ार मंदा हो गया जिंदगी बाजार का उतार चढाव होकर रह गई।”
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“और क्या इस दुनिया में कुछ भी हो सकता है ...... अगर मुसलमान अपना घर जलवाने और अपने आपको क़त्ल करवाने के लिए दंगे शुरू कर सकते हैं, तो वह सरकारी नौकरी क्यों नहीं कर सकता।”
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“हमारी फिल्मों में तो बराबर यही होता है। गाल पर एक मस्सा लगा लो तो कोई नहीं पहचानता।अगर वाकई ऐसा हो जाये तो कैसा मजा आये ! मालिक मकान किराया मांगने आये और हम गाल पर मस्सा जड़ के उसके सामने मुस्कुराते निकल गए। अब तमाम लोग अपने बिल के लिए हमें खोज रहे हैं और हम हैं कि गाल पर एक मस्सा चिपटाये मस्ती छांट रहे हैं, पर जीवन में मस्सें का यह महत्त्व नहीं है यह सोचकर हम उदास हो गए।”
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“अब उस उल्लू की दुम फ़ाख्ता को यह कैसे समझाता कि अरे भैया, जीना है तो किसी न किसी धर्म और किसी न किसी जाति की अंगुली पकड़ ले! निधर्मा मारा गया तो किसी पत्र - पत्रिका में खबर भी नहीं छपेगी !”
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“नींद तो सपने की रोटी हैं न!”
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
― राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]



