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“Who says that tradition cannot be changed? The traditions which go against the human values has to be changed, otherwise it is like a poisonous snake that is hanging on our neck to kill us.”
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“The meaning of Maya is magic, affection, attachment, deception. That meaning, which results from mixing all of these, is called life. In other words, life is maya”
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
“When a man loses faith in himself he seeks some different path. He cheats himself till his sorrow has passed to be free from torment”
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
“A woman is not a touch but a response to it”
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“From a bud of the evening a flower opens its petal in the dawn. The world sees the bud of the last night smiling with nectar on its lips. No one observed the diligence that was needed for the opening of each petal.”
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“चन्द्रावली गोपियों में अन्यतम है। कृष्ण की परम प्रेमिका। चन्द्रावली और श्रीराधा में भावगत भेद क्या है ? चन्द्रावली का कृष्ण के प्रति भाव है–‘‘त्वं ममैव’’ यानी तुम मेरे हो। जबकि श्री राधा कहती हैं–‘‘तवैवाहं’’ अर्थात् मैं आपकी हूं। बस इस भेद के कारण श्रीराधाजी चन्द्रावली से श्रेष्ठ हो जाती”
― Draupadi
― Draupadi
“कृष्ण-बलराम की लाड़ली बहन सुभद्रा, मेरे पांव पकड़ दासी बन इंद्रप्रस्थ में सिर छुपाने की अनुमति मांग रही है। उसकी नम्रता, कोमल सहनशीलता के आगे हार माननी पड़ी। ऐसे कोमल पाद कलिका को सौत मानकर द्वेष में जलती”
― Draupadi
― Draupadi
“Is there any paucity of books of knowledge? This vast cosmos is a library. From each atom and molecule to every planet and star, all are books of His creation. Its pages are the experiences of every moment linked to this earth's dust particles. Therefore, every experience of life is a subject for study.”
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“अभागी राजकन्याओं को बंधनमुक्त कर उनके माता-पिता को खबर दी। पर जो पिता अपनी कन्या की इस दुरावस्था पर रोते-धोते नहीं थकते, अब उनमें किसी एक ने भी कन्या को वापस लेना स्वीकार नहीं किया। वरन् भेजकर खबर दी–‘‘आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता है। नरकासुर के बन्दी गृह में इतने दिन रहने के बाद कोई राजपुत्र तो क्या इतर पुरुष भी उनका पाणिग्रहण नहीं करेगा। वरन् वे फिर पिता के राज्य में जायेंगी तो राज्य का यश क्षय होगा। ऐसे में आत्महत्या के सिवाय कोई चारा नहीं।”
― Draupadi
― Draupadi
“इस सरल और भोले विश्वास के कारण ही तो चित्रा इतनी सुन्दर है। विश्वास का इतना सुन्दर रूप चार्ल्स ने अपने देश में कभी नहीं देखा। वहां अविश्वास और सन्देह मां के पेट से पैदा होते हैं। और इस विश्वास के कारण ही चार्ल्स कई बार कह उठता—इडिया इज़ ग्रेट। इंडिया इज़ ग्रेट।”
― Konark
― Konark
“कृष्ण का कभी विश्वास न करना। बहुत मायावी हैं। तुम-से नारी-रत्न को पाकर क्या वे निष्कपट हृदय से ही अर्जुन के हाथ सौंप देंगे ? याद रखना, अर्जुन में कृष्ण की कला है। तुम अर्जुन को प्राप्त कर भी कृष्ण की ही रहीं। तुम पर न्यायतः उन्हीं का अधिकार रहेगा। स्वयंवर का आयोजन देखकर पता नहीं क्यों मेरे मन में संशय हो रहा है ।’’ मैं”
― Draupadi
― Draupadi
“प्रतिदिन द्रौपदी की सेवा, साहचर्य, सान्निध्य और संसर्ग पांचों भाई चाहेंगे। इसमें अस्वाभाविक भी क्या है ? पर इसी से पांचों की एकता नष्ट हो जायेगी।’’ युधिष्ठिर ने दृढ़ स्वर में कहा–‘‘मेरे भाई मुझे ईश्वर जैसा मानते हैं। अतः हमारे बीच वैसा कोई द्वंद्व उपज नहीं सकता। मेरे आदेश पर भाई राज्य, धन, संपदा सब त्याग कर वनवास जाने में भी कुंठित नहीं होंगे।”
― Draupadi
― Draupadi
“कर्ण ने माया के कुछ निकट आकर कहा– ‘‘राजवधू से क्षमा मांग लेना। जानबूझ कर मैंने उन्हें वेदना नहीं दी। मैं जानता हूं जानबूझ कर सबके सामने यंत्रणा देने का कष्ट कैसा होता है। मेरे स्नेह उपहार ने ही राजवधू को क्षताक्त कर दिया। खैर, मन की ज्वाला से देह की ज्वाला बहुत हल्की होती है, इसी भाव से मुझे क्षमा देंगी”
― Draupadi
― Draupadi
“Parents desire that their daughter should remain happy, be married to the best of men. But every daughter does not fall into the hands of an eminent man. And even if that happens, there is no guarantee of her being entirely happy. What was the point of expressing before them that sorrow for which there was no solution, which was not within the capacity of my parents to resolve?”
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
“तुम्हारे चेहरे में कोणार्क की तरह सुन्दरता खिली है। मगर पाषाण की तरह वह भी निर्विकार है। कब खुश होती हो या कब दुखी, जान पाना कठिन है।”
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“There is poetry in the heart of every human being. Some pour it out in writing, others do not.”
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
“आम, कटहल के बेशुमार पेड़। पुन्नाग का बगीचा। जामुन, तेंदु, अमरूद आदि के पेड़। काठचंपा, चंपा, कनेर, मंदार, हेना, जुही, मल्ली, मालती आदि का विराट बगीचा।”
― Konark
― Konark
“बलिष्ठ लोमश हाथ बढ़ाकर मेरे दीर्घ कुंचित घन केश पकड़ अपनी ओर खींच लिया। लाचार, किसी छिन्नमूल-सी हो रही थी मैं। अरणा भैंसा किसी टूटी लता को घसीटकर ले जाता है, वैसे दुःशासन मुझे सभा भवन तक ले गया।”
― Draupadi
― Draupadi
“एकछत्रवाद की प्रतिष्ठा नहीं वरन् इससे देश में धर्मनिष्ठा, ऐक्य प्रतिष्ठा और सख्य की प्रतिष्ठा होती”
― Draupadi
― Draupadi
“पाषाण में भी जान होती है, आत्मा रहती है, कोणार्क पत्थर से बना है। अब मन्दिर कहां? सिर्फ मुखशाला रह गई है। लोग कहते हैं—कोणार्क कोई मन्दिर नहीं, एक आत्मा है। स्पंदन है। एक गहन उच्छवास है। कभी-कभी यह चैतन्य हो उठता है। इसका एक-एक पत्थर जी उठता है।”
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“मैं युवती के रूप में ही पैदा हुई। जनमी नहीं–यज्ञदेवी ही मेरी मां है। याज्ञसेन मेरे पिता हैं। अतः मैं हूं याज्ञसेनी।”
― Draupadi
― Draupadi
“कोणार्क प्रेम का मंदिर है। त्याग की पूजावेदी है। उत्सर्ग एवं पवित्रता का अमित स्मृति सौध है। एकाग्र साधना का पुण्यपीठ है।” चार्ल्स”
― Konark
― Konark
“द्रोणान्तक पुत्र पाने के लिए राजा द्रुपद ने कश्यप ॠषि के वंशज उपयाज को संतुष्ट किया। पुत्र-प्राप्ति के लिए उपयाज एवं याज ॠषि से यज्ञ करवाया। यज्ञ की होमाग्नि से तेजोवंत पुत्र मेरे भाई धृष्टद्युम्न और यज्ञवेदी के दो भागों से नील पद्मकांत मणि-सी मैं जन्मी–याज्ञसेनी !”
― Draupadi
― Draupadi
“एकाग्र चित्त इसमें खचित केन्द्रस्थल की ओर कुछ क्षण देखने पर मन की अनेक दुविधाओं का समाधान हो जाता है।”
― Draupadi
― Draupadi
“There is great need for tears in life. There are times when you faint if you do not cry. Therefore, it is not proper to insult tears whimsically. It is the companions in adversity who are the finest friends, and those are tears. Do not waste them”
― Yajnaseni: The Story of Draupadi
― Yajnaseni: The Story of Draupadi




