Konark Quotes

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Pratibha Ray
“तुम्हें छोड़ आया था भारत में—पर यहां देख रहा हूं अपने अंदर, तुम्हारे पास समय और दूरी सब हार मान गए हैं। तुम्हारे देश में कोणार्क को देखा, समझा है। भग्नावशेष भी कितना कमनीय है, अतुलनीय है, और कितना कीर्तिमय हो सका है—फिर भग्न अंश में भी कितनी पूर्णता होती है। और तुम्हें देख कर जाना है—करुणा भी कितनी कमनीय! असहायता भी कितनी शक्तिमयी कर देती है आदमी को?”
Pratibha Ray
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Pratibha Ray
“तुम्हारे चेहरे में कोणार्क की तरह सुन्दरता खिली है। मगर पाषाण की तरह वह भी निर्विकार है। कब खुश होती हो या कब दुखी, जान पाना कठिन है।”
Pratibha Ray
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Pratibha Ray
“चार्ल्स को लगा जैसे प्राची बहुत सारे दुःख अपने में समाये है। कोणार्क की तरह निर्विकार और मौन होने पर भी प्राची में अनेक टूटी-फूटी कहानियां छुपी हैं। क्या है प्राची जैसी युवती का दुःख? क्या हो सकती है प्राची के खण्डित जीवन की कहानी? पूछने का साहस नहीं हुआ।”
Pratibha Ray
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Pratibha Ray
“पाषाण में भी जान होती है, आत्मा रहती है, कोणार्क पत्थर से बना है। अब मन्दिर कहां? सिर्फ मुखशाला रह गई है। लोग कहते हैं—कोणार्क कोई मन्दिर नहीं, एक आत्मा है। स्पंदन है। एक गहन उच्छवास है। कभी-कभी यह चैतन्य हो उठता है। इसका एक-एक पत्थर जी उठता है।”
Pratibha Ray
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Pratibha Ray
“भग्न कोणार्क आज भी सौंदर्य का अथाह खजाना है। सच, मेरी गवेषणा अधूरी रह गई है—आदमी के जीवन की तरह। कोणार्क जीवन का प्रतीक है। कोणार्क का अध्ययन कभी पूरा नहीं हो सकता। सदा बाकी ही रह जायेगा—आदमी की अनंत पाने की इच्छा तरह—असीम अनुशीलन का गवेषणागार है।”
Pratibha Ray
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