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“If you are comparing yourself with others in competition, it means you are loser.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation
“Every successful track don't reach success. Success depends on the person who is walking on that track.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation
“OPPORTUNITIES like an OTP's of your LIFE, if you didn't fix it on a correct place in correct time.....it will expired.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation
“If the Society understands me as Zero, then they should also know the meaning of zero.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation
“Again you have got 365 blank pages of your diary. Now you want to write new achievements or old stories... It depends on you.”
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“वो वक्त था उन लम्हों का, हमारा तो बस नाम था
आया था बनकर पैगाम, वो हमारे ही नाम था
कर गये ऐसी गुस्ताखी, जैसे हमारा ही काम था
हमें कहां पता था, कि वो पैगाम उन लम्हों के नाम था”
― Digitalization......For the prosperous nation
आया था बनकर पैगाम, वो हमारे ही नाम था
कर गये ऐसी गुस्ताखी, जैसे हमारा ही काम था
हमें कहां पता था, कि वो पैगाम उन लम्हों के नाम था”
― Digitalization......For the prosperous nation
“Dreams are not only for sharing. These are some aspects of life. Who are constantly engaged in connecting you with yourself.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation
“If you want success, then create your own Pathway with your own planning.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation
“वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है,
आहट उसकी, जैसे दिल में हलचल सी कर जाती है,
झुकी नजर उसकी, जैसे मुझको पागल कर जाती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
आइना है उसकी नज़रें, जो सबकुछ बतलाती है,
वो है पागल, जो दिल को झुटा बतलाती है,
लगती है प्यारी, जब खुद ही वो शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
कहता है जमाना कि, वो तो पागल है,
वे-वजह, जब-जब वो मुस्कुराती है,
जमाने को क्या पता, कि वो मुझसे क्यों शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
जब आँखें मेरी मदहोश चेहरे से उसके, मिलकर आती हैं,
काश वो समझ पाती कि, कितना मुझको वो तड़पती हैं,
खो गया गया हूँ मुझसे मै, न नींद मुझको अब आती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।....”
― Digitalization......For the prosperous nation
आहट उसकी, जैसे दिल में हलचल सी कर जाती है,
झुकी नजर उसकी, जैसे मुझको पागल कर जाती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
आइना है उसकी नज़रें, जो सबकुछ बतलाती है,
वो है पागल, जो दिल को झुटा बतलाती है,
लगती है प्यारी, जब खुद ही वो शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
कहता है जमाना कि, वो तो पागल है,
वे-वजह, जब-जब वो मुस्कुराती है,
जमाने को क्या पता, कि वो मुझसे क्यों शर्माती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।
जब आँखें मेरी मदहोश चेहरे से उसके, मिलकर आती हैं,
काश वो समझ पाती कि, कितना मुझको वो तड़पती हैं,
खो गया गया हूँ मुझसे मै, न नींद मुझको अब आती है,
वो पगली सी दीवानी सी, सपनों में मेरे आती है।....”
― Digitalization......For the prosperous nation
“politics, where what is stated is not necessarily what was actually said.”
― Seven Patients
― Seven Patients
“If you have curiosity to live the life that comes after success. Then nobody can stop you from succeeding.”
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“चली है हवा इश्क़ की, आंधी-तूफान वाकी हैं,
छा गए हैं बादल दिलों पर, बरसात अभी वाकी है,
मुश्कुरा लिया देखकर उनको युहीं, अभी उनका मुश्कुराना वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
होने लगी है गुफ्तगू ख्वावों में, तलाश अभी वाकी हैं,
दिखने लगा है चेहरा ख्वावों में उनका, ख्वाव फिर भी वाकी हैं,
आज देखा उन्होंने कातिल निगाहों से, मगर मुश्कुराना अभी वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
आज नहीं देखा है चेहरा ख्वावों में उनका, आश अभी वाकी है,
गुज़र चूका है दिन तलाश में उनके, शाम अभी वाकी है,
गुज़र चूका है समय अब उनके आने का, इंतज़ार फिर भी वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
हो गई है मुलाकात फर्श पर गिरी उनकी किताबों से, मगर उनसे अभी वाकी है,
मिल गया है वहाना मुकम्मल दोस्ती करने का उनसे, बस.. उनका मुश्कुराना वाकी है,
कह दिया है आज हंसकर उन्होंने पागल मुझको, बस.. और पागलपन वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।”
― Digitalization......For the prosperous nation
छा गए हैं बादल दिलों पर, बरसात अभी वाकी है,
मुश्कुरा लिया देखकर उनको युहीं, अभी उनका मुश्कुराना वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
होने लगी है गुफ्तगू ख्वावों में, तलाश अभी वाकी हैं,
दिखने लगा है चेहरा ख्वावों में उनका, ख्वाव फिर भी वाकी हैं,
आज देखा उन्होंने कातिल निगाहों से, मगर मुश्कुराना अभी वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
आज नहीं देखा है चेहरा ख्वावों में उनका, आश अभी वाकी है,
गुज़र चूका है दिन तलाश में उनके, शाम अभी वाकी है,
गुज़र चूका है समय अब उनके आने का, इंतज़ार फिर भी वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।
हो गई है मुलाकात फर्श पर गिरी उनकी किताबों से, मगर उनसे अभी वाकी है,
मिल गया है वहाना मुकम्मल दोस्ती करने का उनसे, बस.. उनका मुश्कुराना वाकी है,
कह दिया है आज हंसकर उन्होंने पागल मुझको, बस.. और पागलपन वाकी है,
अभी तो मिली है बस..नज़र से नज़र, जान-पहचान अभी वाकी है।”
― Digitalization......For the prosperous nation
“Digitalization... For the prosperous nation by Atul Kumar.”
― Digitalization......For the prosperous nation
― Digitalization......For the prosperous nation




