Badrinath Kapoor
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“राजा उस समय नर्तकों और संगीतकारों के बीच बैठे थे। यहाँ भी शुकदेव धैर्य धारण किए और शांतिपूर्वक बैठे रहे।”
― Yog Vashishth
― Yog Vashishth
“जिस प्रकार लहरें और जल की धाराओं की हलचल एक दूसरे पर आश्रित होकर चक्र बनाती हैं उसी प्रकार ये दोनों भी एक-दूसरे पर आश्रित होकर चक्र बनाती हैं। जब मन विचार की हलचल छोड़ देता है, तब दृश्य संसार का भ्रम जाता रहता है।”
― Yog Vashishth
― Yog Vashishth
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