हिंदी फ़िल्मों के कमज़ोर नायक


वो चाहे कोई देशभक्त की इमेज वाला नायक हो चाहे क्रुद्ध युवा या हीमैन, मुझे हैरानी होती कि जब भी किसी फ़िल्म में किसी लड़की, बहन या बेटी की शादी की बात चलती और दहेज का प्रसंग आता तो हीरो उधार लेकर या डाका डालकर या भीख मांगकर लड़की की शादी धूमधाम से करने की बात करता.
मुझे कभी समझ में नहीं आता कि यह आदमी यह बात क्यों नहीं करता कि हम समाज से इस रस्म को ही ख़त्म कर देंगे ?
यह पूरा समाज चार लोगों के समाज से इतना डरता क्यों है ? डरता है तो ऐसे डरपोक लोगों में हीरो कहलवाने की इतनी हवस क्यों है ?
क्या इन लोगों को नहीं मालूम कि इन गंदी रस्मों का असर कितने लोगों के जीवन पर पड़ता है ? (क्रमश)

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Published on July 28, 2020 05:33
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