बच्चे!


बच्चे!वे अपने चेहरे पर जो था उसकी शांति लेकर चलते हैं, और हम बैचेनी का सागर ढोते हैं,हम चुन-चुनकर किसी की फिक्र करते हैं, उनसे स्वतः सबकी फिक्र होती है, सब में फिर चाँद - तारे, जल-जीव, मनुष्य और जो कुछ है, वो सभी आता है!

© मनन शील



 •  0 comments  •  flag
Share on Twitter
Published on September 15, 2026 07:17
No comments have been added yet.