(?)
Quotes are added by the Goodreads community and are not verified by Goodreads. (Learn more)
Harsh Ranjan

“- क्या बात है भईया आजकल अपनी क्लास की कम और गैर क्लास की लड़कियां पर आपका ज्यादा ध्यान है? - तुम किसके बारे में कह रहे हो? - एक ही तो है! - हर्ष ने कहा - मिस इंडिया! - असल बात मैं बताता हूँ! - वर्द्धन ने कहा - वो इस बार मैट्रिक की परीक्षा दे रही है। इसी में मैं उसकी मदद कर रहा हूँ। - भईया के पास तो फोन नंबर भी है उसका। - हर्ष ने मुस्कुराकर कहा। ​मैंने हसरत भरी निगाहों से उसे देखा। - नहीं! सोचो भी मत! - वर्द्धन साफ मुकर गया। - आप जो कहेंगे मैं सो करूँगा। - तमंचा सटा दोगे तो भी नहीं। - वर्द्धन ने कहा - खुद उससे पूछो। दे देती है नंबर तो अच्छी बात है। मुझे पहली बार अपने ‘मैं’ होने पर अफसोस हुआ और उसके ‘वो’ होने से ईर्ष्या हुई। क्लास में वो हर्ष की थी, क्लास से बाहर वो वर्द्धन की थी और घर लौटते वक्त मेरी ....... नहीं! मैं ऐसा नहीं कह सकता। ​मैं भारी चिंता में जी रहा था। कहाँ मेरी पैसेंजर ट्रेन और कहाँ नेहा की राजधानी एक्सप्रेस। मैं उसकी गति से गति कैसे मिलाऊँ, इसी चिंता में मैं जिया जा रहा था। हो सकता है कि कल वर्द्धन और नेहा एक ही कॉलेज में पढ़ने लगें। ऐसे में क्या होगा? मैं तो सीनियर्स की बराबरी नहीं कर सकता। मुझे लगने लगा कि मैं छोटा हूँ। इस छोटेपन के एहसास ने मुझे बड़ा रूलाया। खुद से बड़ी लड़की से प्यार करना कभी-कभी बड़ा कष्ट देता है। मुझे लगा कि मुझे नेहा का प्यार .......... प्यार बड़ी चीज है, कहें तो ध्यान पाने के लिये कम से कम वर्द्धन जैसा होना था, मतलब दो क्लास सीनियर और उम्र में”

Harsh Ranjan, Sankshipt
Read more quotes from Harsh Ranjan


Share this quote:
Share on Twitter

Friends Who Liked This Quote

To see what your friends thought of this quote, please sign up!

0 likes
All Members Who Liked This Quote

None yet!


This Quote Is From

Sankshipt (Hindi Edition) Sankshipt by Harsh Ranjan
6 ratings, average rating, 0 reviews

Browse By Tag