(?)
Quotes are added by the Goodreads community and are not verified by Goodreads. (Learn more)

“गुरुराज सिंह झारखंड के संत कोलंबस कॉलेज का छात्र रहा था। कुछ समय राँची में भी सिविल की तैयारी के लिए रहा। अपनी पहली मुख्य परीक्षा उसने वहीं रहते दी थी। पाँच साल से दिल्ली में था। पिता सरकारी नौकरी में थे। गुरुराज अपने आप में कई विरोधाभासों का मिश्रण था। दुनिया दाएँ चले तो वह बाएँ चलता था। आईएएस की तैयारी के लिहाज से वह उतना पढ़ चुका था जितने की जरूरत नहीं थी। दुनिया को अपनी दृष्टि से देखता था और बिना हिचक अपनी बात कह भी देता था। कुछ लोग उसे अक्खड़ और दंभी कहते थे, पर मूलत: वह साहसी था। मुखर्जी नगर के बौद्धिक वर्ग के लिए वह एक बिगड़ैल आदमी था। बौद्धिकता की गंभीरता और तार्किकता पर बड़ी निर्ममता से व्यंग्य करता था। ‘बुद्धिजीवी वर्ग’ इस शब्द को वह एक गंभीर फूहड़पन कहता था। दारू और किताब उसके दो प्रिय साथी थे। काम भर का धार्मिक भी था और ज्योतिष का इल्म भी पा रखा था उसने। अब तक आईएएस में असफल था। पिता दशरथ सिंह उसे अपने जीवन की सबसे बड़ी समस्या कहते थे पर गुरुराज के लिए उसके पिता ही उसके जीवन दर्शन के गुरु थे। गुरुराज ने अपने जीवन के कई साल झारखंड के आदिवासियों के बीच गुजारे थे और उनके प्रति उसकी संवेदना कभी-कभार उसके विचारों में छलककर दिख ही जाती थी। कुछ लोगों का कहना था कि वह कभी नक्सली संपर्क में भी रहा था। यद्यपि उसके सर पर कुछ पुलिस केस भी थे जिसे वह अपने छात्र जीवन के दौरान कई सामाजिक संगठनों से जुड़े होने के कारण राजनीतिक षड्यंत्र का नतीजा बताता था। कुल-मिलाकर उसे देखकर कहा जा सकता था कि वह संभावनाओं से भरा एक निराश और बेचैन आदमी था।”

Nilotpal Mrinal, Dark Horse । डार्क हॉर्स (21वीं सदी की हिंदी की सर्वाधिक चर्चित किताब)
Read more quotes from Nilotpal Mrinal


Share this quote:
Share on Twitter

Friends Who Liked This Quote

To see what your friends thought of this quote, please sign up!

0 likes
All Members Who Liked This Quote

None yet!



Browse By Tag